विदेश सचिव विक्रम मिस्री की कोलंबो यात्रा: भारत-श्रीलंका के बीच ₹350 मिलियन डॉलर की ऋण सुविधा पर हस्ताक्षर
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री की कोलंबो यात्रा के दौरान 5 अगस्त 2026 को भारत और श्रीलंका ने 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर की भारतीय रुपये में दी जाने वाली 'लाइन ऑफ क्रेडिट' (एलओसी) से संबंधित समझौतों का औपचारिक आदान-प्रदान किया। यह राशि चक्रवात 'डिटवाह' से हुई तबाही के बाद भारत द्वारा घोषित 450 मिलियन डॉलर के व्यापक पुनर्निर्माण पैकेज का अभिन्न हिस्सा है।
मुख्य घटनाक्रम
ये समझौते कोलंबो में विदेश सचिव विक्रम मिस्री और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक के पश्चात संपन्न हुए। बैठक में दोनों देशों के बीच चल रही प्रमुख द्विपक्षीय परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई, जिनमें भारतीय सहायता से संचालित विकास कार्य भी शामिल रहे। श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
श्रीलंका में भारतीय उच्चायोग ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने 'आपसी हितों से जुड़े मुद्दों और प्रमुख द्विपक्षीय परियोजनाओं की समीक्षा की, जिनमें भारत की सहायता से चल रहे विकास कार्य भी शामिल हैं।'
ऋण सुविधा का उपयोग
उच्चायोग के अनुसार, इन ऋण सुविधाओं का उपयोग तीन प्रमुख क्षेत्रों में किया जाएगा — पुनर्निर्माण कार्य, बुनियादी ढाँचे का विकास, और चक्रवात के बाद उत्पन्न खरीद संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति। 450 मिलियन डॉलर के मूल पैकेज के अंतर्गत सड़कों, रेलवे और पुलों की मरम्मत, क्षतिग्रस्त घरों का निर्माण, स्वास्थ्य एवं शिक्षा क्षेत्र को सहायता, कृषि को समर्थन और आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को सुदृढ़ करना शामिल है।
द्विपक्षीय वार्ता का विस्तार
इससे पहले दिन में, मिस्री ने अपनी श्रीलंकाई समकक्ष विदेश सचिव अरुनी रनराजा से भी मुलाकात की। दोनों अधिकारियों ने क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। उच्चायोग के अनुसार, मिस्री ने इस अवसर पर भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति और 'विजन महासागर' में श्रीलंका की महत्वपूर्ण भूमिका को पुनः रेखांकित किया।
मिस्री ने श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ से भी अलग से बैठक की, जिसमें प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में जारी द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की गई।
नेबरहुड फर्स्ट और रणनीतिक संदर्भ
यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक उपस्थिति को और सुदृढ़ कर रहा है। गौरतलब है कि चक्रवात 'डिटवाह' के बाद भारत ने सबसे पहले और सबसे बड़े पुनर्निर्माण पैकेज की घोषणा की थी, जो 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत पड़ोसी देशों को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आगे की राह
इन समझौतों के लागू होने से दोनों देशों के बीच आर्थिक और विकासात्मक साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद है। ऋण सुविधाओं के तहत परियोजनाओं का क्रियान्वयन श्रीलंका की पुनर्निर्माण प्राथमिकताओं के अनुरूप चरणबद्ध तरीके से होगा।