वांग यी ने शांगहाई में डोमिनिका, लेसोथो और इंडोनेशिया के मंत्रियों से की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने 18 जुलाई 2026 को शांगहाई में तीन देशों के वरिष्ठ मंत्रियों से अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ता की। ये सभी मंत्री विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन में थे। वांग यी सीपीसी केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य भी हैं।
डोमिनिका के साथ संबंधों पर चर्चा
डोमिनिका के विदेश मंत्री विंस हेंडरसन के साथ बातचीत में वांग यी ने कहा कि डोमिनिका कैरेबियन क्षेत्र में चीन का एक विश्वसनीय मित्र और साझेदार है। उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों देश सदैव परस्पर सम्मान और पारस्परिक लाभ के आधार पर सहयोग करते आए हैं, जिससे राजनीतिक विश्वास और बहुक्षेत्रीय सहयोग दोनों गहरे हुए हैं।
लेसोथो से एआई तक पहुँचा संवाद
लेसोथो के विदेश मंत्री लिम्फो ताऊ के साथ वार्ता में वांग यी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास में किसी भी देश को, विशेषकर विकासशील देशों को, पीछे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति का अधिकार सभी राष्ट्रों को समान रूप से प्राप्त होना चाहिए। वांग यी ने यह भी स्पष्ट किया कि चीन की विदेश नीति देशों के आकार या संसाधनों की परवाह किए बिना समानता के सिद्धांत पर आधारित है। उन्होंने चीन और लेसोथो को 'रणनीतिक साझेदार' बताया जो परस्पर विश्वास और समर्थन पर टिके हैं।
इंडोनेशिया के साथ आर्थिक सहयोग पर जोर
इंडोनेशिया के आर्थिक मामलों के समन्वय मंत्री एयरलंगा हार्टार्टो के साथ बैठक में वांग यी ने कहा कि दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के रणनीतिक मार्गदर्शन में चीन-इंडोनेशिया साझा भविष्य समुदाय के निर्माण में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने दोनों देशों को ग्लोबल साउथ और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि उनके विकास लक्ष्य समान हैं और उन्हें अपनी विकास रणनीतियों के बीच समन्वय और मजबूत करना चाहिए।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब चीन वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता शासन में अपनी भूमिका को सक्रिय रूप से रेखांकित कर रहा है। विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन जैसे मंचों का उपयोग कर बीजिंग विकासशील देशों के साथ तकनीकी साझेदारी को कूटनीतिक प्राथमिकता के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। गौरतलब है कि इन तीनों बैठकों में 'समानता' और 'समावेशी विकास' का साझा सूत्र स्पष्ट रूप से उभरा, जो चीन की तथाकथित 'ग्लोबल साउथ कूटनीति' का केंद्रीय स्वर है।
आगे की दिशा
इन द्विपक्षीय वार्ताओं के बाद तीनों देशों के साथ सहयोग के नए क्षेत्रों पर आगे की बातचीत अपेक्षित है। इंडोनेशिया के साथ आर्थिक रणनीतियों के समन्वय पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन की बढ़ती आर्थिक उपस्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण है।