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शी चिनफिंग और किम जोंग-उन ने चीन-डीपीआरके मित्रता टावर पर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

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शी चिनफिंग और किम जोंग-उन ने चीन-डीपीआरके मित्रता टावर पर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

सारांश

शी चिनफिंग और किम जोंग-उन ने एक साथ चीन-डीपीआरके मित्रता टावर पर कोरियाई युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी — यह केवल एक स्मारक समारोह नहीं, बल्कि पूर्वी एशिया की भू-राजनीति में दोनों देशों की एकजुटता का स्पष्ट संदेश है।

मुख्य बातें

शी चिनफिंग और उनकी पत्नी फंग लीयुआन ने 9 जून को चीन-डीपीआरके मित्रता टावर पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
किम जोंग-उन और उनकी पत्नी री सोल-जू ने दोनों नेताओं का स्वागत किया; डीपीआरके सैन्य बैंड ने दोनों देशों के राष्ट्रगान बजाए।
फूलों की टोकरी के रिबन पर 'चीनी जन स्वयंसेवी सेना के शहीदों को हमेशा सलाम' अंकित था।
दोनों नेताओं ने 1950 के दशक के साझा युद्ध इतिहास को 'शाश्वत ऐतिहासिक स्मृति' बताया।
दोनों पक्षों ने युवा पीढ़ी में क्रांतिकारी व नैतिक शिक्षा को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के महासचिव और राष्ट्रपति शी चिनफिंग तथा उनकी पत्नी फंग लीयुआन ने मंगलवार, 9 जून की सुबह चीन-डीपीआरके मित्रता टावर पर चीनी जन स्वयंसेवी सेना के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर कोरियाई श्रमिक पार्टी के महासचिव और कोरियाई लोकतांत्रिक जन गणराज्य (डीपीआरके) के राज्य मामला आयोग के अध्यक्ष किम जोंग-उन तथा उनकी पत्नी री सोल-जू भी उपस्थित रहे।

मुख्य घटनाक्रम

सुबह 10 बजकर 40 मिनट पर शी चिनफिंग और फंग लीयुआन मूतान चोटी के तल पर स्थित मित्रता टावर पहुँचे, जहाँ किम जोंग-उन और री सोल-जू ने उनका औपचारिक स्वागत किया। डीपीआरके के सैन्य बैंड ने दोनों देशों के राष्ट्रगान बजाए और ऑनर गार्ड ने फूलों की टोकरी को मंच पर रखा।

फूलों की टोकरी के रिबन पर 'चीनी जन स्वयंसेवी सेना के शहीदों को हमेशा सलाम' लिखा हुआ था। शी चिनफिंग ने स्वयं मंच पर जाकर रिबन सजाए, जिसके बाद उपस्थित सभी लोग शहीदों की स्मृति में मौन खड़े रहे। इसके पश्चात दोनों नेताओं ने गार्ड ऑफ ऑनर परेड देखी।

स्मारक भवन में ऐतिहासिक संवाद

श्रद्धांजलि समारोह के बाद मित्रता टावर के स्मारक भवन में किम जोंग-उन ने शी चिनफिंग को ऐतिहासिक सामग्री, तस्वीरों और चित्रों से अवगत कराया। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि 1950 के दशक में चीन और डीपीआरके का कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने का इतिहास दोनों देशों के लिए एक शाश्वत और अमूल्य स्मृति है।

द्विपक्षीय मित्रता को आगे बढ़ाने पर जोर

दोनों पक्षों ने इस बात पर बल दिया कि स्मारक सुविधाओं की सुरक्षा करते हुए क्रांतिकारी शिक्षा और युवा पीढ़ी के लिए नैतिक शिक्षा को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उनका मानना है कि इससे चीन-डीपीआरके की परंपरागत मित्रता पीढ़ी दर पीढ़ी और सुदृढ़ होती रहेगी। गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पूर्वी एशिया में भू-राजनीतिक तनाव की पृष्ठभूमि में दोनों देश अपने संबंधों को नई ऊँचाई देने का प्रयास कर रहे हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ

चीन-डीपीआरके मित्रता टावर कोरियाई युद्ध (1950–53) में शहीद हुए चीनी जन स्वयंसेवी सेना के सैनिकों की स्मृति में बनाया गया है। यह टावर दोनों देशों के बीच 'रक्त से सींचे गए' संबंधों का प्रतीक माना जाता है। शी चिनफिंग की यह यात्रा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क की निरंतरता को दर्शाती है।

आगे की संभावनाएँ

इस यात्रा के दौरान हुई बातचीत और साझा श्रद्धांजलि से दोनों देशों के बीच राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंध और प्रगाढ़ होने की उम्मीद है। विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के उच्चस्तरीय आदान-प्रदान क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय सहयोग के संदेश देने की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों देशों की एकता का सुनियोजित प्रदर्शन है। ऐसे समय में जब अमेरिका और उसके सहयोगी उत्तर कोरिया पर दबाव बनाए हुए हैं, यह यात्रा बीजिंग के लिए प्योंगयांग को एकाकी न पड़ने देने की रणनीतिक प्रतिबद्धता को दोहराती है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि इस तरह के उच्चस्तरीय प्रदर्शन परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में ठोस प्रगति की अनुपस्थिति को ढँक देते हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह 'पीढ़ी दर पीढ़ी मित्रता' का नारा व्यावहारिक कूटनीतिक परिणामों में बदलेगा।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन-डीपीआरके मित्रता टावर क्या है और यह कहाँ स्थित है?
चीन-डीपीआरके मित्रता टावर डीपीआरके में मूतान चोटी के तल पर स्थित एक स्मारक है, जो कोरियाई युद्ध (1950–53) में शहीद हुए चीनी जन स्वयंसेवी सेना के सैनिकों की याद में बनाया गया है। यह दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है।
शी चिनफिंग ने मित्रता टावर पर श्रद्धांजलि क्यों दी?
शी चिनफिंग ने चीनी जन स्वयंसेवी सेना के उन शहीदों को सम्मान देने के लिए श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने 1950 के दशक में कोरियाई युद्ध में अपने प्राण न्योछावर किए थे। दोनों नेताओं ने इस इतिहास को चीन-डीपीआरके मित्रता की नींव बताया।
इस यात्रा के दौरान शी चिनफिंग और किम जोंग-उन के बीच किन विषयों पर चर्चा हुई?
स्मारक भवन में किम जोंग-उन ने शी चिनफिंग को ऐतिहासिक सामग्री और चित्रों से परिचित कराया। दोनों नेताओं ने साझा युद्ध इतिहास को 'शाश्वत स्मृति' बताते हुए युवा पीढ़ी में क्रांतिकारी व नैतिक शिक्षा को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
इस कूटनीतिक यात्रा का क्षेत्रीय महत्त्व क्या है?
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पूर्वी एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बना हुआ है। विश्लेषकों के अनुसार, यह उच्चस्तरीय संपर्क चीन की ओर से डीपीआरके के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को सार्वजनिक रूप से पुनर्पुष्ट करने का संकेत है।
फूलों की टोकरी के रिबन पर क्या लिखा था?
फूलों की टोकरी के रिबन पर 'चीनी जन स्वयंसेवी सेना के शहीदों को हमेशा सलाम' लिखा हुआ था। शी चिनफिंग ने स्वयं मंच पर जाकर यह रिबन सजाए।
राष्ट्र प्रेस
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