शी जिनपिंग की सितंबर वाशिंगटन यात्रा तय, रूबियो बोले — बड़े मतभेद हैं पर संवाद ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने 23 जुलाई को मनीला में आसियान बैठकों के इतर पत्रकारों को बताया कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ उनकी विस्तृत वार्ता का मुख्य उद्देश्य सितंबर में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा की ज़मीन तैयार करना था। रूबियो ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच गहरे रणनीतिक मतभेदों के बावजूद निरंतर कूटनीतिक संवाद न केवल उचित है, बल्कि अनिवार्य भी है।
शिखर वार्ता की तैयारी
रूबियो ने कहा, 'हमने सितंबर में होने वाली यात्रा पर काफी विस्तार से चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य इसी दौरे की तैयारी करना था, ताकि यह एक और सकारात्मक यात्रा साबित हो।' उन्होंने भरोसा जताया कि राष्ट्रपति शी की वाशिंगटन यात्रा 'बेहद सकारात्मक' रहेगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता में लौटने के बाद यह अमेरिका-चीन के बीच सर्वोच्च स्तरीय वार्ता होगी। दोनों पक्षों के अधिकारी शिखर सम्मेलन से पहले उन क्षेत्रों की पहचान करेंगे जहाँ सहयोग संभव है, ताकि ठोस परिणाम सामने आ सकें।
मतभेद और संवाद की ज़रूरत
रूबियो ने अमेरिका और चीन को दुनिया की दो सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाएँ और प्रमुख देश बताते हुए कहा, 'हमारे बीच कई मुद्दों पर बड़े मतभेद हैं और दोनों पक्ष इसे स्वीकार करते हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि इन्हें इस तरह प्रबंधित किया जाए कि स्थिति कभी नियंत्रण से बाहर न जाए।' उन्होंने इस जुड़ाव की तुलना शीत युद्ध के दौरान अमेरिका-सोवियत संचार से की, जिसने उस दौर में तबाही को टालने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच संबंध न होना 'लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना' होगा।
ताइवान और दक्षिण चीन सागर
ताइवान के मसले पर रूबियो ने कहा कि यह विषय चीनी अधिकारियों के साथ हर बैठक में इसलिए उठता है क्योंकि वाशिंगटन ने द्वीप के आसपास बीजिंग की सैन्य गतिविधियों का विरोध किया है। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका नेविगेशन की स्वतंत्रता के अभियान जारी रखेगा और फिलीपींस सहित क्षेत्रीय सहयोगियों के प्रति अपनी संधि प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा। रूबियो ने स्पष्ट कहा, 'हम कभी यह नहीं मानेंगे कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग किसी दूसरे देश के नियंत्रण में हैं।'
ईरान, फेंटेनाइल और भारत
होर्मुज़ स्ट्रेट के मसले पर रूबियो ने कहा कि ईरान से जुड़े संकट के एक अहम पहलू पर चीन का रुख 'रचनात्मक' रहा है — चीन ने वाणिज्यिक जहाजों पर किसी भी प्रतिबंध का सार्वजनिक रूप से विरोध किया है। फेंटेनाइल तस्करी रोकने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि 'कुछ प्रगति' हुई है, हालाँकि सहयोग अभी वांछित स्तर तक नहीं पहुँचा। भारत का उल्लेख करते हुए रूबियो ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दोनों नेताओं की बैठक में जेनेरिक दवाओं के आयात पर अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा नहीं उठाया, जबकि इस विषय पर चिंताएँ जताई जा रही थीं।
आगे क्या होगा
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और प्रभाव के मोर्चे पर चीन से मुकाबला करते हुए भी बीजिंग के साथ संबंध स्थिर करना चाहता है। ताइवान, निर्यात नियंत्रण, दक्षिण चीन सागर में सैन्य गतिविधियाँ और व्यापक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा — ये सभी मुद्दे दोनों देशों के बीच तनाव की जड़ बने हुए हैं। सितंबर की शिखर वार्ता से पहले दोनों पक्षों के अधिकारी व्यापार और निवेश पहलों सहित पहले से तय उपायों को लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं।