23 जुलाई 2026
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शी जिनपिंग की सितंबर वाशिंगटन यात्रा तय, रूबियो बोले — बड़े मतभेद हैं पर संवाद ज़रूरी

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शी जिनपिंग की सितंबर वाशिंगटन यात्रा तय, रूबियो बोले — बड़े मतभेद हैं पर संवाद ज़रूरी

सारांश

सितंबर में शी जिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा से पहले मनीला में रूबियो-वांग यी की लंबी बैठक हुई। रूबियो ने साफ कहा — ताइवान, व्यापार और सैन्य मोर्चे पर गहरे मतभेद हैं, फिर भी संवाद टूटना दुनिया के लिए खतरनाक होगा।

मुख्य बातें

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने 23 जुलाई को मनीला में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से विस्तृत वार्ता की।
बैठक का मुख्य उद्देश्य सितंबर में शी जिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा की तैयारी करना था।
रूबियो ने ताइवान के आसपास चीनी सैन्य गतिविधियों का विरोध दोहराया; नेविगेशन की स्वतंत्रता जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
चीन ने होर्मुज़ स्ट्रेट पर वाणिज्यिक जहाजों के प्रतिबंध का सार्वजनिक विरोध किया — रूबियो ने इसे 'रचनात्मक' रुख बताया।
फेंटेनाइल तस्करी रोकने पर 'कुछ प्रगति' हुई, लेकिन सहयोग अभी वांछित स्तर से कम।
जयशंकर ने बैठक में जेनेरिक दवाओं पर अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा नहीं उठाया।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने 23 जुलाई को मनीला में आसियान बैठकों के इतर पत्रकारों को बताया कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ उनकी विस्तृत वार्ता का मुख्य उद्देश्य सितंबर में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा की ज़मीन तैयार करना था। रूबियो ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच गहरे रणनीतिक मतभेदों के बावजूद निरंतर कूटनीतिक संवाद न केवल उचित है, बल्कि अनिवार्य भी है।

शिखर वार्ता की तैयारी

रूबियो ने कहा, 'हमने सितंबर में होने वाली यात्रा पर काफी विस्तार से चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य इसी दौरे की तैयारी करना था, ताकि यह एक और सकारात्मक यात्रा साबित हो।' उन्होंने भरोसा जताया कि राष्ट्रपति शी की वाशिंगटन यात्रा 'बेहद सकारात्मक' रहेगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता में लौटने के बाद यह अमेरिका-चीन के बीच सर्वोच्च स्तरीय वार्ता होगी। दोनों पक्षों के अधिकारी शिखर सम्मेलन से पहले उन क्षेत्रों की पहचान करेंगे जहाँ सहयोग संभव है, ताकि ठोस परिणाम सामने आ सकें।

मतभेद और संवाद की ज़रूरत

रूबियो ने अमेरिका और चीन को दुनिया की दो सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाएँ और प्रमुख देश बताते हुए कहा, 'हमारे बीच कई मुद्दों पर बड़े मतभेद हैं और दोनों पक्ष इसे स्वीकार करते हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि इन्हें इस तरह प्रबंधित किया जाए कि स्थिति कभी नियंत्रण से बाहर न जाए।' उन्होंने इस जुड़ाव की तुलना शीत युद्ध के दौरान अमेरिका-सोवियत संचार से की, जिसने उस दौर में तबाही को टालने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच संबंध न होना 'लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना' होगा।

ताइवान और दक्षिण चीन सागर

ताइवान के मसले पर रूबियो ने कहा कि यह विषय चीनी अधिकारियों के साथ हर बैठक में इसलिए उठता है क्योंकि वाशिंगटन ने द्वीप के आसपास बीजिंग की सैन्य गतिविधियों का विरोध किया है। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका नेविगेशन की स्वतंत्रता के अभियान जारी रखेगा और फिलीपींस सहित क्षेत्रीय सहयोगियों के प्रति अपनी संधि प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा। रूबियो ने स्पष्ट कहा, 'हम कभी यह नहीं मानेंगे कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग किसी दूसरे देश के नियंत्रण में हैं।'

ईरान, फेंटेनाइल और भारत

होर्मुज़ स्ट्रेट के मसले पर रूबियो ने कहा कि ईरान से जुड़े संकट के एक अहम पहलू पर चीन का रुख 'रचनात्मक' रहा है — चीन ने वाणिज्यिक जहाजों पर किसी भी प्रतिबंध का सार्वजनिक रूप से विरोध किया है। फेंटेनाइल तस्करी रोकने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि 'कुछ प्रगति' हुई है, हालाँकि सहयोग अभी वांछित स्तर तक नहीं पहुँचा। भारत का उल्लेख करते हुए रूबियो ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दोनों नेताओं की बैठक में जेनेरिक दवाओं के आयात पर अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा नहीं उठाया, जबकि इस विषय पर चिंताएँ जताई जा रही थीं।

आगे क्या होगा

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और प्रभाव के मोर्चे पर चीन से मुकाबला करते हुए भी बीजिंग के साथ संबंध स्थिर करना चाहता है। ताइवान, निर्यात नियंत्रण, दक्षिण चीन सागर में सैन्य गतिविधियाँ और व्यापक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा — ये सभी मुद्दे दोनों देशों के बीच तनाव की जड़ बने हुए हैं। सितंबर की शिखर वार्ता से पहले दोनों पक्षों के अधिकारी व्यापार और निवेश पहलों सहित पहले से तय उपायों को लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक असुविधाजनक सच्चाई है — अमेरिका और चीन के बीच ताइवान, निर्यात नियंत्रण और दक्षिण चीन सागर पर कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है। सितंबर की शिखर वार्ता को 'सकारात्मक' बताना अभी से शुरू हो गया है, जबकि एजेंडे के कठिन बिंदु अनसुलझे हैं। फेंटेनाइल पर 'कुछ प्रगति' और ईरान पर चीन का 'रचनात्मक रुख' — ये छोटे संकेत हैं, बड़े समझौते नहीं। असली परीक्षा यह होगी कि सितंबर की बैठक में शब्दों से आगे कोई बाध्यकारी प्रतिबद्धता निकलती है या नहीं।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शी जिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा कब होगी और इसका उद्देश्य क्या है?
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा सितंबर 2025 में प्रस्तावित है। यह राष्ट्रपति ट्रंप के दोबारा सत्ता में लौटने के बाद अमेरिका-चीन के बीच सर्वोच्च स्तरीय वार्ता होगी, जिसमें व्यापार, सुरक्षा और रणनीतिक मतभेदों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
मनीला में रूबियो और वांग यी की बैठक में क्या हुआ?
23 जुलाई को मनीला में आसियान बैठकों के इतर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच विस्तृत वार्ता हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य सितंबर में शी जिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा की तैयारी करना था, साथ ही व्यापार, निवेश और फेंटेनाइल जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
ताइवान पर अमेरिका का क्या रुख है?
रूबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ताइवान के आसपास चीनी सैन्य गतिविधियों का विरोध करता है और नेविगेशन की स्वतंत्रता के अभियान जारी रखेगा। उन्होंने फिलीपींस सहित क्षेत्रीय सहयोगियों के प्रति संधि प्रतिबद्धताओं का भी पुनः आश्वासन दिया।
होर्मुज़ स्ट्रेट और ईरान के मुद्दे पर चीन का रुख क्या है?
रूबियो के अनुसार, चीन ने होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर किसी भी प्रतिबंध का सार्वजनिक रूप से विरोध किया है। रूबियो ने इसे ईरान संकट के संदर्भ में चीन का 'रचनात्मक' रुख बताया।
भारत के जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ का मुद्दा बैठक में उठा या नहीं?
रूबियो ने बताया कि भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दोनों नेताओं की बैठक में जेनेरिक दवाओं के आयात पर अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा नहीं उठाया। रूबियो ने कहा कि संभव है जयशंकर ने यह विषय अमेरिकी प्रणाली के अन्य अधिकारियों के साथ उठाया हो।
राष्ट्र प्रेस
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