AIIA डायरेक्टर का दावा — लाइफस्टाइल सुधारें तो 50% बीमारियाँ अपने आप खत्म हो जाएँगी
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) के डायरेक्टर प्रोफेसर (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने गुरुवार, 10 सितंबर को नई दिल्ली में कहा कि यदि लोग अपनी दिनचर्या और खान-पान को संतुलित कर लें, तो लगभग 50 प्रतिशत बीमारियाँ बिना किसी औषधि के समाप्त हो सकती हैं। उन्होंने आयुर्वेद को जन आंदोलन बनाने की ज़रूरत पर बल दिया और बताया कि निकारागुआ के साथ आयुर्वेद सहयोग के लिए जल्द ही एक MoU पर हस्ताक्षर होंगे।
निकारागुआ के साथ आयुर्वेद सहयोग की तैयारी
प्रोफेसर प्रजापति ने बताया कि निकारागुआ की राजदूत नादेस्का कुथबर्ट ने हाल ही में AIIA का दौरा किया। इस दौरे के बाद दोनों देशों के बीच आयुर्वेद ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शीघ्र ही एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर दस्तख़त किए जाने की योजना है। यह कदम भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता के बढ़ते दायरे को दर्शाता है।
आयुर्वेद को जन आंदोलन बनाने का लक्ष्य
AIIA डायरेक्टर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में आयुर्वेद को लेकर एक जन आंदोलन की तैयारी चल रही है। इसका मूल उद्देश्य आयुर्वेद में वर्णित आहार-विहार की अवधारणा को आम लोगों तक पहुँचाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई देशों में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का प्रयोग हो रहा है, लेकिन बिना वैज्ञानिक प्रमाणों के लोग इन पर भरोसा नहीं करते। इसीलिए देश के सभी आयुर्वेद कॉलेजों, रिसर्च इंस्टीट्यूटों और विदेशों में स्थापित केंद्रों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे इन पद्धतियों को वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत करें।
स्क्रीन टाइम और बदलती जीवनशैली का संकट
प्रोफेसर प्रजापति ने आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि आज लोग चाहे कितनी भी कोशिश करें, प्रतिदिन 6 से 7 घंटे स्क्रीन टाइम में बीत ही जाते हैं। इसकी वजह से आँखों की समस्या, नींद में गड़बड़ी और मानसिक तनाव जैसी अनेक परेशानियाँ सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि आज की जीवनशैली खाने, सोने, काम करने और घूमने तक सीमित रह गई है, ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए दिनचर्या में आयुर्वेद और योग को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
दिनचर्या और ऋतुचर्या का महत्व
AIIA प्रमुख ने समझाया कि विटामिन-डी, कैल्शियम और फास्फोरस की कमी जैसी समस्याएँ मूलतः हमारे खान-पान और रहन-सहन से जुड़ी हैं। उनके अनुसार, यदि लोग सुबह थोड़ा जल्दी उठें, सूर्योदय के समय टहलें और व्यायाम करें, तो शरीर में विटामिन-डी की कमी धीरे-धीरे स्वतः ठीक हो सकती है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोपीनिया जैसी हड्डी संबंधी बीमारियों का ख़तरा कम होगा। गौरतलब है कि भारत में विटामिन-डी की कमी एक व्यापक स्वास्थ्य समस्या है, जो विभिन्न अध्ययनों के अनुसार शहरी आबादी के बड़े हिस्से को प्रभावित करती है।
टेक्नोलॉजी पर अत्यधिक निर्भरता से चेतावनी
प्रोफेसर प्रजापति ने आगाह किया कि टेक्नोलॉजी पर बढ़ती निर्भरता चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि हमारे घरों के बड़े-बुज़ुर्ग जिस तरह समय से उठते, खाते और सोते थे तथा शारीरिक-मानसिक व्यायाम करते थे, उसी अनुशासन को आज भी अपनाना ज़रूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर टेक्नोलॉजी पर इसी तरह निर्भरता बढ़ती रही, तो एक दिन यह मनुष्य पर हावी हो जाएगी। इसीलिए जीवनशैली में बदलाव लाना और इस संदेश को घर-घर तक पहुँचाना आवश्यक है।
आयुर्वेद दिवस 2026 की थीम
उन्होंने आयुष मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि इस वर्ष आयुर्वेद दिवस की थीम 'आयुर्वेद फॉर ए हेल्थियर टुमारो' (स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद) रखी गई है। यह थीम आयुर्वेद को केवल उपचार तक सीमित न रखकर रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली के व्यापक दृष्टिकोण से जोड़ती है। आने वाले दिनों में AIIA और निकारागुआ के बीच MoU की औपचारिक प्रक्रिया और आयुर्वेद जन आंदोलन के विस्तृत रोडमैप पर नज़र बनी रहेगी।