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AIIA डायरेक्टर का दावा — लाइफस्टाइल सुधारें तो 50% बीमारियाँ अपने आप खत्म हो जाएँगी

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AIIA डायरेक्टर का दावा — लाइफस्टाइल सुधारें तो 50% बीमारियाँ अपने आप खत्म हो जाएँगी

सारांश

AIIA डायरेक्टर प्रो. प्रजापति का दावा है कि सही दिनचर्या और संतुलित आहार-विहार अपनाने से 50% बीमारियाँ बिना दवा के दूर हो सकती हैं। निकारागुआ के साथ आयुर्वेद सहयोग MoU की तैयारी और आयुर्वेद को जन आंदोलन बनाने की मुहिम, भारतीय पारंपरिक चिकित्सा की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का संकेत है।

मुख्य बातें

AIIA डायरेक्टर प्रो.
प्रदीप कुमार प्रजापति ने कहा कि लाइफस्टाइल सुधारने से 50% बीमारियाँ समाप्त हो सकती हैं।
निकारागुआ की राजदूत नादेस्का कुथबर्ट ने AIIA का दौरा किया; दोनों देशों के बीच आयुर्वेद MoU जल्द अपेक्षित।
आयुर्वेद को जन आंदोलन बनाने और वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत करने पर ज़ोर दिया गया।
रोज़ाना 6-7 घंटे स्क्रीन टाइम को स्वास्थ्य के लिए गंभीर ख़तरा बताया।
आयुर्वेद दिवस 2026 की थीम ' स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद ' रखी गई है।

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) के डायरेक्टर प्रोफेसर (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने गुरुवार, 10 सितंबर को नई दिल्ली में कहा कि यदि लोग अपनी दिनचर्या और खान-पान को संतुलित कर लें, तो लगभग 50 प्रतिशत बीमारियाँ बिना किसी औषधि के समाप्त हो सकती हैं। उन्होंने आयुर्वेद को जन आंदोलन बनाने की ज़रूरत पर बल दिया और बताया कि निकारागुआ के साथ आयुर्वेद सहयोग के लिए जल्द ही एक MoU पर हस्ताक्षर होंगे।

निकारागुआ के साथ आयुर्वेद सहयोग की तैयारी

प्रोफेसर प्रजापति ने बताया कि निकारागुआ की राजदूत नादेस्का कुथबर्ट ने हाल ही में AIIA का दौरा किया। इस दौरे के बाद दोनों देशों के बीच आयुर्वेद ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शीघ्र ही एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर दस्तख़त किए जाने की योजना है। यह कदम भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता के बढ़ते दायरे को दर्शाता है।

आयुर्वेद को जन आंदोलन बनाने का लक्ष्य

AIIA डायरेक्टर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में आयुर्वेद को लेकर एक जन आंदोलन की तैयारी चल रही है। इसका मूल उद्देश्य आयुर्वेद में वर्णित आहार-विहार की अवधारणा को आम लोगों तक पहुँचाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई देशों में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का प्रयोग हो रहा है, लेकिन बिना वैज्ञानिक प्रमाणों के लोग इन पर भरोसा नहीं करते। इसीलिए देश के सभी आयुर्वेद कॉलेजों, रिसर्च इंस्टीट्यूटों और विदेशों में स्थापित केंद्रों से अनुरोध किया जा रहा है कि वे इन पद्धतियों को वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत करें।

स्क्रीन टाइम और बदलती जीवनशैली का संकट

प्रोफेसर प्रजापति ने आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि आज लोग चाहे कितनी भी कोशिश करें, प्रतिदिन 6 से 7 घंटे स्क्रीन टाइम में बीत ही जाते हैं। इसकी वजह से आँखों की समस्या, नींद में गड़बड़ी और मानसिक तनाव जैसी अनेक परेशानियाँ सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि आज की जीवनशैली खाने, सोने, काम करने और घूमने तक सीमित रह गई है, ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए दिनचर्या में आयुर्वेद और योग को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।

दिनचर्या और ऋतुचर्या का महत्व

AIIA प्रमुख ने समझाया कि विटामिन-डी, कैल्शियम और फास्फोरस की कमी जैसी समस्याएँ मूलतः हमारे खान-पान और रहन-सहन से जुड़ी हैं। उनके अनुसार, यदि लोग सुबह थोड़ा जल्दी उठें, सूर्योदय के समय टहलें और व्यायाम करें, तो शरीर में विटामिन-डी की कमी धीरे-धीरे स्वतः ठीक हो सकती है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोपीनिया जैसी हड्डी संबंधी बीमारियों का ख़तरा कम होगा। गौरतलब है कि भारत में विटामिन-डी की कमी एक व्यापक स्वास्थ्य समस्या है, जो विभिन्न अध्ययनों के अनुसार शहरी आबादी के बड़े हिस्से को प्रभावित करती है।

टेक्नोलॉजी पर अत्यधिक निर्भरता से चेतावनी

प्रोफेसर प्रजापति ने आगाह किया कि टेक्नोलॉजी पर बढ़ती निर्भरता चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि हमारे घरों के बड़े-बुज़ुर्ग जिस तरह समय से उठते, खाते और सोते थे तथा शारीरिक-मानसिक व्यायाम करते थे, उसी अनुशासन को आज भी अपनाना ज़रूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर टेक्नोलॉजी पर इसी तरह निर्भरता बढ़ती रही, तो एक दिन यह मनुष्य पर हावी हो जाएगी। इसीलिए जीवनशैली में बदलाव लाना और इस संदेश को घर-घर तक पहुँचाना आवश्यक है।

आयुर्वेद दिवस 2026 की थीम

उन्होंने आयुष मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि इस वर्ष आयुर्वेद दिवस की थीम 'आयुर्वेद फॉर ए हेल्थियर टुमारो' (स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद) रखी गई है। यह थीम आयुर्वेद को केवल उपचार तक सीमित न रखकर रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली के व्यापक दृष्टिकोण से जोड़ती है। आने वाले दिनों में AIIA और निकारागुआ के बीच MoU की औपचारिक प्रक्रिया और आयुर्वेद जन आंदोलन के विस्तृत रोडमैप पर नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बिना किसी विशिष्ट शोध या डेटा के हवाले के यह एक सामान्यीकृत बयान बना रहता है। आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर स्वीकृति दिलाने का प्रयास सराहनीय है, लेकिन असली चुनौती यह है कि क्या भारत के अपने सरकारी अस्पतालों में आयुर्वेद को एलोपैथी के बराबर संसाधन और शोध अवसर मिल रहे हैं। निकारागुआ जैसे छोटे देशों से MoU से ज़्यादा ज़रूरी यह होगा कि WHO स्तर पर भारतीय पारंपरिक चिकित्सा के क्लिनिकल ट्रायल डेटा को मान्यता मिले — तभी 'जन आंदोलन' की बात विश्वसनीय लगेगी।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

AIIA डायरेक्टर ने 50% बीमारी खत्म होने की बात क्यों कही?
AIIA डायरेक्टर प्रो. प्रदीप कुमार प्रजापति का कहना है कि अधिकांश बीमारियाँ गलत खान-पान, अनियमित दिनचर्या और अत्यधिक स्क्रीन टाइम जैसी जीवनशैली संबंधी समस्याओं से उपजती हैं। उनके अनुसार, आयुर्वेद में वर्णित आहार-विहार और दिनचर्या अपनाने से 50% बीमारियाँ बिना दवा के दूर हो सकती हैं।
निकारागुआ और भारत के बीच आयुर्वेद MoU क्या है?
निकारागुआ की राजदूत नादेस्का कुथबर्ट ने AIIA का दौरा किया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच आयुर्वेद ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही एक MoU पर हस्ताक्षर होने की योजना है।
आयुर्वेद दिवस 2026 की थीम क्या है?
इस वर्ष आयुर्वेद दिवस की थीम 'आयुर्वेद फॉर ए हेल्थियर टुमारो' यानी 'स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद' रखी गई है, जो रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली पर केंद्रित है।
AIIA डायरेक्टर ने स्क्रीन टाइम को लेकर क्या चेतावनी दी?
प्रो. प्रजापति ने कहा कि आज लोग रोज़ाना 6 से 7 घंटे स्क्रीन टाइम में बिताते हैं, जिससे आँखों की समस्या, नींद में गड़बड़ी और मानसिक तनाव जैसी कई परेशानियाँ बढ़ रही हैं।
विटामिन-डी की कमी दूर करने के लिए AIIA ने क्या सुझाव दिया?
AIIA डायरेक्टर ने सुझाव दिया कि सुबह जल्दी उठकर सूर्योदय के समय टहलना और व्यायाम करना विटामिन-डी की कमी को स्वाभाविक रूप से ठीक कर सकता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोपीनिया का ख़तरा कम होता है।
राष्ट्र प्रेस
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