25 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

वायु प्रदूषण से सांस की सेहत को खतरा: आयुष मंत्रालय ने बताए बचाव के आसान उपाय

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
वायु प्रदूषण से सांस की सेहत को खतरा: आयुष मंत्रालय ने बताए बचाव के आसान उपाय

सारांश

आयुष मंत्रालय ने बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच सांस की सेहत को लेकर अलर्ट जारी किया है। बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों के लिए गुनगुना पानी, भाप, तुलसी-शहद जैसे घरेलू नुस्खे और योग-प्राणायाम की सलाह दी गई है — साथ ही गंभीर लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलने की हिदायत भी।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 19 अगस्त 2026 को एक्स पर पोस्ट कर वायु प्रदूषण से सांस की सेहत पर पड़ने वाले असर की जानकारी साझा की।
बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों को प्रदूषित हवा में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई।
ENSO से जुड़ी सूखे की स्थिति से जंगल की आग और धूल भरी आंधियों का खतरा बढ़ सकता है, जिससे वायु गुणवत्ता और बिगड़ती है।
गुनगुना पानी, सोंठ-गुड़, हल्दी दूध, तुलसी-शहद और भाप लेना लक्षणों में राहत दे सकते हैं — ये गंभीर बीमारी का इलाज नहीं हैं।
भुजंगासन, गोमुखासन, नाड़ी शोधन और भ्रामरी प्राणायाम श्वसन तंत्र को सक्रिय रखने में सहायक हो सकते हैं।
सीने में दर्द, तेज घरघराहट या सांस फूलने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।

आयुष मंत्रालय ने 19 अगस्त 2026 को चेतावनी दी कि हवा में बढ़ते धूल, धुएं और पार्टिकुलेट प्रदूषण से सांस संबंधी समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं — विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से अस्थमा या अन्य श्वसन रोगों से पीड़ित लोगों के लिए। मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कुछ सरल दैनिक उपायों की जानकारी साझा की, जो सांस की सेहत को सुरक्षित रखने में सहायक हो सकते हैं।

प्रदूषित हवा से क्या-क्या खतरे हैं

मंत्रालय के अनुसार, हवा में मौजूद बारीक कण सांस के साथ शरीर के भीतर पहुँच सकते हैं। इससे खांसी, गले में खराश, नाक बंद होना, सांस लेने में कठिनाई और घरघराहट जैसे लक्षण उभर सकते हैं। इसके अलावा, ENSO से जुड़ी सूखे की परिस्थितियाँ कुछ क्षेत्रों में जंगलों में आग और धूल भरी आंधियों का जोखिम बढ़ा सकती हैं, जिससे वायु गुणवत्ता और अधिक बिगड़ सकती है।

जलयोजन और पारंपरिक घरेलू उपाय

मंत्रालय ने सुझाव दिया कि सांस और गले को राहत देने के लिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना आवश्यक है। बहुत ठंडे पानी की जगह गुनगुना पानी या हर्बल इन्फ्यूजन लेना अधिक लाभकारी हो सकता है। हल्की सर्दी-खांसी में सोंठ को गुड़ के साथ, हल्दी वाला दूध अथवा तुलसी के रस में शहद मिलाकर लेना पारंपरिक रूप से राहतदायक माना जाता है। हालाँकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये उपाय लक्षणों से अस्थायी राहत के लिए हैं — किसी गंभीर बीमारी का उपचार नहीं।

भाप और गरारे से राहत

नाक बंद होने या गले में खराश की स्थिति में भाप लेना कुछ लोगों को आराम दे सकता है। इसी प्रकार गुनगुने नमक या हल्दी वाले पानी से गरारे करने से गले की परेशानी में राहत मिल सकती है। मंत्रालय ने विशेष रूप से सावधान किया कि भाप लेते समय अत्यधिक गर्म पानी से जलने का खतरा हो सकता है — बच्चों के मामले में विशेष सतर्कता बरतें।

योग और प्राणायाम की भूमिका

श्वसन तंत्र को सक्रिय और स्वस्थ रखने के लिए मंत्रालय ने भुजंगासन और गोमुखासन जैसे आसनों के अभ्यास की सलाह दी। इनके साथ नाड़ी शोधन और भ्रामरी प्राणायाम भी किए जा सकते हैं। इन्हें व्यक्ति की शारीरिक क्षमता के अनुसार ही अपनाना उचित है।

डॉक्टर से कब लें सलाह

यदि सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई, लगातार खांसी, सीने में दर्द, तेज घरघराहट या सांस फूलने जैसे लक्षण दिखें, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना अनिवार्य है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर संवेदनशील वर्ग को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि घरेलू नुस्खों की अनुशंसा करना और वायु प्रदूषण के मूल कारणों पर नीतिगत कार्रवाई करना — दोनों में कितना अंतर है। जब दिल्ली और अन्य शहरों में AQI 'गंभीर' श्रेणी में पहुँचता है, तो तुलसी-शहद की सलाह पर्याप्त नहीं है। संवेदनशील वर्ग — बच्चे, बुजुर्ग, अस्थमा रोगी — को दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए स्वच्छ वायु नीति चाहिए, न केवल प्राणायाम। घरेलू उपाय लक्षण प्रबंधन के लिए उपयोगी हैं, परंतु इन्हें प्रणालीगत समाधान का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वायु प्रदूषण से सांस की कौन-सी समस्याएं हो सकती हैं?
हवा में मौजूद बारीक धूल कण और धुआं सांस के साथ शरीर के भीतर पहुँचकर खांसी, गले में खराश, नाक बंद होना, घरघराहट और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, बच्चे, बुजुर्ग और अस्थमा रोगी इन प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
धूल और धुएं से सांस की सेहत बचाने के घरेलू उपाय क्या हैं?
आयुष मंत्रालय ने गुनगुना पानी या हर्बल इन्फ्यूजन पीने, सोंठ को गुड़ के साथ लेने, हल्दी वाला दूध और तुलसी के रस में शहद मिलाकर लेने की सलाह दी है। गले की खराश में गुनगुने नमक या हल्दी वाले पानी से गरारे करना भी राहतदायक हो सकता है।
प्रदूषण के दौरान कौन-से योग और प्राणायाम सांस के लिए फायदेमंद हैं?
आयुष मंत्रालय ने भुजंगासन और गोमुखासन जैसे आसनों के साथ-साथ नाड़ी शोधन और भ्रामरी प्राणायाम की अनुशंसा की है। इन्हें व्यक्ति की शारीरिक क्षमता के अनुसार ही अभ्यास में शामिल करना चाहिए।
सांस की समस्या में डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
यदि सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई, लगातार खांसी, सीने में दर्द, तेज घरघराहट या सांस फूलने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है। ऐसी स्थिति में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना उचित नहीं है।
ENSO और जंगल की आग का सांस की सेहत से क्या संबंध है?
ENSO से जुड़ी सूखे की परिस्थितियाँ कुछ क्षेत्रों में जंगलों में आग और धूल भरी आंधियों का खतरा बढ़ा सकती हैं, जिससे हवा में धुआं और पार्टिकुलेट प्रदूषण और अधिक बढ़ जाता है। इससे श्वसन संबंधी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं, खासकर संवेदनशील वर्ग के लिए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले