गर्मी में स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए आयुष मंत्रालय के सरल उपाय
सारांश
Key Takeaways
- गर्मी में ठंडे पेय का सेवन करें
- तेज धूप से बचें
- हल्का भोजन करें
- सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करें
- तनाव को कम करने के लिए ध्यान करें
नई दिल्ली, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत में गर्मी का मौसम आ चुका है और तापमान तेज़ी से बढ़ रहा है। इस दौरान शरीर को ठंडा और संतुलित रखने के साथ-साथ डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और थकान से बचना अत्यंत आवश्यक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा दिए गए कुछ सरल और प्रभावी सुझावों को अपनाकर इस भीषण गर्मी में भी आप स्वस्थ, तरोताजा और ऊर्जा से भरपूर रह सकते हैं।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, आयुर्वेद कहता है कि गर्मियों में शरीर को ठंडा रखना ही असली स्वास्थ्य की कुंजी है।
आयुर्वेद में गर्मियों के लिए विशेष देखभाल के तरीके बताए गए हैं, जो पित्त दोष को नियंत्रित करते हैं और मन को शांति प्रदान करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, गर्मियों में शरीर को अंदर से ठंडक और बाहर से सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। यहां 7 साधारण और प्रभावी वेलनेस टिप्स दिए जा रहे हैं, जो इस गर्मी में आपको स्वस्थ और तरोताजा बनाए रखेंगे।
ठंडक देने वाले प्राकृतिक पेय का सेवन करें: गर्मियों में भरपूर तरल पदार्थ लें। खीरे का रस, बेल का शरबत, नारियल पानी, पुदीने का शरबत, नींबू पानी और छाछ जैसे पेय आपको ठंडक देते हैं और डिहाइड्रेशन से बचाते हैं।
तेज धूप से बचें: दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक धूप में बाहर जाने से बचें। यदि जाना आवश्यक हो, तो सिर को छाता, टोपी या गमछे से ढकें और पानी की बोतल साथ रखें।
भारी और तला-भुना खाना न खाएं: गर्मी में पित्त दोष बढ़ता है। इसलिए मसालेदार, मिर्चदार और तले हुए खाद्य पदार्थों से दूर रहें। हल्का, सात्विक और ताजा भोजन करें।
गुलाब जल और चंदन का उपयोग करें: गुलाब जल से चेहरे और आंखों को धोएं, इससे त्वचा को ठंडक मिलती है और जलन कम होती है। चंदन का लेप या पाउडर आपको गर्मी और पसीने से राहत देता है।
सुबह जल्दी उठें और हल्का व्यायाम करें: सुबह सूरज निकलने से पहले उठकर योग, प्राणायाम या हल्की सैर करें। इससे आपका शरीर दिनभर ऊर्जा से भरा और ठंडा रहता है।
दोपहर का भोजन हल्का रखें: गर्मी के दौरान भारी भोजन न करें। दाल-चावल, सब्जी, रोटी या खिचड़ी जैसा हल्का और पचने में आसान भोजन करें, ताकि पाचन पर बोझ न पड़े।
मन को ठंडा रखें: गर्मियों में चिड़चिड़ापन और तनाव बढ़ जाता है। ध्यान, गहरी सांस लेने के व्यायाम जैसे अनुलोम-विलोम, शीतली प्राणायाम और संगीत सुनने से मन शांत रहता है।