कारगिल विजय दिवस: सूरत के राम चौक पर 100 फुट तिरंगा फहराया, सरदार पटेल की प्रतिमा का अनावरण
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की अगुवाई में 26 जुलाई 2026 को सूरत के मोटा वराछा इलाके के राम चौक पर कारगिल विजय दिवस के अवसर पर 100 फुट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। इसी कार्यक्रम में सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा का अनावरण कर 1999 के कारगिल युद्ध में प्राण न्यौछावर करने वाले जवानों को श्रद्धांजलि दी गई।
मुख्य घटनाक्रम
सुदामा चौक के निकट राम चौक पर स्थापित यह 100 फुट का तिरंगा अब मोटा वराछा क्षेत्र का एक स्थायी लैंडमार्क बन गया है। ध्वजारोहण समारोह के बाद उपमुख्यमंत्री संघवी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने 'अखंड भारत के निर्माता' कहे जाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा का अनावरण किया। इसके पश्चात शहीद सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की गई।
संघवी का संबोधन
सभा को संबोधित करते हुए हर्ष संघवी ने कहा, 'यह सिर्फ झंडा फहराना नहीं है, बल्कि देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता, वीरता और गौरवशाली भारत में अटूट विश्वास का जीवंत प्रतीक है। यह ऐतिहासिक पहल पूरे इलाके के लिए गर्व का क्षण बन गई है और आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति की भावना से प्रेरित करती रहेगी।' उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज की स्थापना महज एक ढाँचा खड़ा करना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मूल्यों को मूर्त रूप देना है।
आम जनता की भागीदारी
कार्यक्रम में जन-प्रतिनिधि, स्थानीय नेता, छात्र और आम नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया भी इस अवसर पर मौजूद थे। संघवी ने नागरिकों, छात्रों और परिवारों को एक साथ देखकर प्रसन्नता व्यक्त की, जो इस राष्ट्रीय गौरव के क्षण के साक्षी बने।
सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित जनसमूह ने राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा बनाए रखने और देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करने का सामूहिक संकल्प लिया। इस संकल्प के माध्यम से लोगों से राम चौक पर तिरंगे का सम्मान बढ़ाने और राष्ट्रीय गौरव की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया गया।
कारगिल विजय दिवस का महत्व
गौरतलब है कि 26 जुलाई को प्रतिवर्ष कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो 1999 में पाकिस्तान के विरुद्ध हुए कारगिल युद्ध में भारतीय सेना की विजय की स्मृति में समर्पित है। इस युद्ध में सैकड़ों भारतीय जवानों ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। यह दिवस उन वीर सैनिकों के साहस और बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर स्मरण करने का अवसर है।