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2008 बेंगलुरु मडीवाला बम धमाका: फैसले से पहले संदिग्ध आरोपी अब्दुल खादर की दिल का दौरा पड़ने से मौत

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2008 बेंगलुरु मडीवाला बम धमाका: फैसले से पहले संदिग्ध आरोपी अब्दुल खादर की दिल का दौरा पड़ने से मौत

सारांश

2008 बेंगलुरु सिलसिलेवार बम धमाकों के संदिग्ध आरोपी अब्दुल खादर की फैसले से ठीक पहले जेल में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। 16 साल की न्यायिक हिरासत के बाद यह मामला अधूरा रह गया — न्याय प्रक्रिया पर एक बड़ा सवाल।

मुख्य बातें

अब्दुल खादर (60), 2008 मडीवाला बम धमाका मामले के संदिग्ध आरोपी, की 12 जून 2026 को दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई।
खादर 2010 से परप्पना अग्रहारा केंद्रीय जेल , बेंगलुरु में न्यायिक हिरासत में थे — करीब 16 वर्ष ।
मुकदमा अंतिम चरण में था और अदालत का फैसला अगले कुछ दिनों में अपेक्षित था।
शव पोस्टमार्टम के लिए विक्टोरिया अस्पताल भेजा गया; परिवार को सूचित किया गया।
25 जुलाई 2008 के धमाकों में मडीवाला सहित कई स्थानों पर विस्फोट हुए थे, जिनमें 2 लोगों की मौत हुई थी।
जाँच में SIMI और लश्कर-ए-तैबा की कथित संलिप्तता पाई गई थी।

बेंगलुरु के 2008 मडीवाला बम धमाका मामले में संदिग्ध आतंकी आरोपी अब्दुल खादर (60 वर्ष) की शुक्रवार, 12 जून 2026 को दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई — और यह तब हुआ जब अदालत अगले कुछ दिनों में इस बहुचर्चित मामले में फैसला सुनाने वाली थी। खादर 2010 से बेंगलुरु के परप्पना अग्रहारा केंद्रीय जेल में न्यायिक हिरासत में थे।

घटनाक्रम: कैसे हुई मौत

जेल अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार को खादर की तबीयत अचानक बिगड़ी। उन्हें तत्काल जयदेव अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा और अस्पताल पहुँचने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई। अधिकारियों ने बताया कि खादर पहले से स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत कर रहे थे, जिसके चलते उन्हें तुरंत अस्पताल भेजा गया था।

मृत्यु के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए विक्टोरिया अस्पताल भेजा गया। उनके परिवार को घटना की सूचना दे दी गई है। खादर मडिकेरी जिले के विराजपेट के निवासी थे।

मुकदमे की स्थिति और कानूनी पेचीदगी

खादर के खिलाफ मुकदमा अपने अंतिम चरण में था और अदालत से शीघ्र फैसला अपेक्षित था। उनकी मृत्यु के साथ ही यह मुकदमा अब स्वतः समाप्त हो जाएगा, क्योंकि भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में आरोपी की मृत्यु के बाद उसके विरुद्ध कार्यवाही जारी नहीं रह सकती। गौरतलब है कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने खादर को 2008 के बेंगलुरु सिलसिलेवार बम धमाकों की जाँच के तहत गिरफ्तार किया था।

2008 बेंगलुरु बम धमाके: पृष्ठभूमि

25 जुलाई 2008 को बेंगलुरु में 30 मिनट के अंतराल में कई देसी टाइमर डिवाइस फटे। इनमें होसुर रोड स्थित मडीवाला पुलिस चेकपोस्ट बस स्टैंड पर हुआ विस्फोट सबसे घातक रहा, जिसमें एक महिला समेत दो लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए। घायलों का इलाज पास के सेंट जॉन अस्पताल में किया गया।

जाँचकर्ताओं ने पाया कि ये धमाके कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठनों स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) और लश्कर-ए-तैबा (LeT) द्वारा रचे गए थे। पाकिस्तान में कथित संचालकों सहित कई प्रमुख व्यक्तियों की पहचान की गई।

जाँच और गिरफ्तारियाँ

कर्नाटक पुलिस और NIA ने कई एफआईआर दर्ज कीं और वर्षों के दौरान दर्जनों संदिग्धों को गिरफ्तार किया। खादर की गिरफ्तारी 2010 में हुई थी और तब से वे परप्पना अग्रहारा केंद्रीय जेल में न्यायिक हिरासत में थे — यानी करीब 16 वर्षों तक मुकदमे का सामना करते रहे।

आगे क्या होगा

खादर की मृत्यु के बाद इस मामले में उनसे संबंधित कार्यवाही समाप्त होगी, हालाँकि अन्य आरोपियों के विरुद्ध मुकदमे की स्थिति पर अदालत अपना रुख स्पष्ट करेगी। यह मामला भारत में लंबे समय से चल रहे आतंकवाद-संबंधी मुकदमों की जटिलता को एक बार फिर उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अक्सर किसी निर्णायक नतीजे तक पहुँचने से पहले ही किसी न किसी कारण से अधूरे रह जाते हैं। खादर 16 वर्षों तक विचाराधीन कैदी रहे, बिना किसी अंतिम फैसले के। यह सवाल उठता है कि क्या NIA और अदालती तंत्र इतने जटिल मामलों को समयबद्ध तरीके से निपटाने में सक्षम हैं। पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की राह और लंबी हो गई है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अब्दुल खादर कौन थे और उन पर क्या आरोप थे?
अब्दुल खादर मडिकेरी जिले के विराजपेट के 60 वर्षीय निवासी थे, जिन पर 25 जुलाई 2008 को बेंगलुरु में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में संलिप्तता का आरोप था। उन्हें NIA ने गिरफ्तार किया था और वे 2010 से परप्पना अग्रहारा केंद्रीय जेल में न्यायिक हिरासत में थे।
अब्दुल खादर की मौत कैसे हुई?
जेल अधिकारियों के अनुसार 12 जून 2026 को खादर की तबीयत अचानक बिगड़ी। उन्हें जयदेव अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए विक्टोरिया अस्पताल भेजा गया।
2008 मडीवाला बम धमाका क्या था?
25 जुलाई 2008 को बेंगलुरु में 30 मिनट के अंतराल में कई स्थानों पर देसी टाइमर डिवाइस फटे। मडीवाला पुलिस चेकपोस्ट बस स्टैंड पर हुए विस्फोट में एक महिला समेत दो लोगों की जान गई और कई घायल हुए। जाँचकर्ताओं ने SIMI और लश्कर-ए-तैबा की कथित संलिप्तता पाई।
खादर की मृत्यु के बाद उनके मुकदमे का क्या होगा?
भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में आरोपी की मृत्यु के बाद उसके विरुद्ध कार्यवाही स्वतः समाप्त हो जाती है। खादर का मुकदमा अंतिम चरण में था और फैसला अगले कुछ दिनों में अपेक्षित था, लेकिन अब उनसे संबंधित कार्यवाही बंद हो जाएगी।
इस मामले में NIA की क्या भूमिका रही?
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने 2008 बेंगलुरु सिलसिलेवार बम धमाकों की जाँच अपने हाथ में ली थी। NIA ने खादर सहित दर्जनों संदिग्धों को गिरफ्तार किया और कर्नाटक पुलिस के साथ मिलकर कई एफआईआर दर्ज कीं। पाकिस्तान में कथित संचालकों सहित कई प्रमुख व्यक्तियों की भी पहचान की गई।
राष्ट्र प्रेस
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