होलिका दहन के अवसर पर पहला चंद्र ग्रहण: सूतक काल में रखने वाली विशेष सावधानियां
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को होली से एक दिन पहले आ रहा है। इस अवसर पर यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है कि ग्रहण की सूतक अवधि कब से शुरू होगी और इस समय किन विशेष सावधानियों का पालन करना आवश्यक है।
फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि पर, होलिका दहन के दिन चंद्र ग्रहण का यह अद्वितीय अवसर होगा। चंद्र ग्रहण की शुरुआत मंगलवार को दोपहर 3:20 बजे होगी और यह 6:46 बजे समाप्त होगी। ग्रहण का प्रभाव कुल 3 घंटे और 27 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कुछ खास बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।
ग्रहण का सूतक काल लगभग 9 घंटे पहले आरंभ होता है। 3 मार्च को सुबह 6:20 बजे सूतक काल की शुरुआत होगी। इस समय सभी शुभ कार्यों को वर्जित किया जाता है और मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
सूतक काल में खाना बनाना, भोजन करना, पूजा-पाठ, हवन, यज्ञ, या नए कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए। इस दौरान नुकीली वस्तुओं जैसे चाकू, कैंची का उपयोग भी नहीं करना चाहिए। ग्रहण के समय तेल का प्रयोग नहीं करना चाहिए और बाल एवं नाखून काटने से भी दूर रहना चाहिए।
मान्यता है कि चंद्र या सूर्य ग्रहण के दौरान आसमान की ओर देखने से बचना चाहिए, खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए, क्योंकि इस समय नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय हो जाती है और इससे गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भस्थ शिशु पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
ग्रहण के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा करें। इस दिन भगवान शिव और सूर्यदेव को जल चढ़ाना शुभ माना जाता है। लोगों को सूतक काल शुरू होने से पहले भोजन कर लेना चाहिए। ग्रहण के दौरान मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। सबसे शुभ मंत्रों में ओम नमः शिवाय, महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र, और सूर्य मंत्र शामिल हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं।
ग्रहण समाप्त होने के बाद घर को गंगाजल से शुद्ध करना चाहिए और खुद भी स्नान करना चाहिए। इसके बाद दान करना चाहिए। माना जाता है कि चंद्र ग्रहण के बाद दूध, चावल, चीनी, सफेद वस्त्र आदि का दान करने से विशेष लाभ होता है।