23 सितंबर 2026
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आर. वीरमणि पॉक्सो केस: खुशबू सुंदर बोलीं — 'ताकतवर को यह कभी न लगे कि वह कानून से ऊपर है'

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आर. वीरमणि पॉक्सो केस: खुशबू सुंदर बोलीं — 'ताकतवर को यह कभी न लगे कि वह कानून से ऊपर है'

सारांश

खुशबू सुंदर ने आर. वीरमणि पॉक्सो केस में बेबाक आवाज़ उठाई — ₹70 करोड़ के रसूख और राजनीतिक संबंधों से न्याय न रोके जाने की माँग की। CCB ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, तीनों न्यायिक हिरासत में भेजे गए। जाँच का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

मुख्य बातें

खुशबू सुंदर ने 23 सितंबर 2026 को इंस्टाग्राम पोस्ट के ज़रिये आर.
वीरमणि पॉक्सो केस में कड़ी कार्रवाई की माँग की।
उन्होंने कहा कि ₹70 करोड़ की संपत्ति या रसूख का इस्तेमाल न्याय रोकने के लिए किया जाना 'बिल्कुल अस्वीकार्य' है।
ग्रेटर चेन्नई पुलिस की CCB ने गणेशन (पूर्व जेम ग्रेनाइट्स कर्मचारी) और दंपति शांति व महेंद्र सिम्हन को गिरफ्तार किया।
अदालत ने तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा।
वीरमणि — जेम ग्रुप के चेयरमैन — पर कई नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के आरोप हैं और वे पहले से गिरफ्तार हैं।

अभिनेत्री, फिल्म निर्माता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता खुशबू सुंदर ने 23 सितंबर 2026 को ग्रेनाइट उद्योगपति आर. वीरमणि के खिलाफ दर्ज पॉक्सो केस में कड़ी और बिना किसी समझौते वाली कार्रवाई की माँग की। अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के ज़रिये उन्होंने कहा कि ताकतवर और रसूखदार लोगों को कभी यह नहीं मानने देना चाहिए कि वे कानून की पहुँच से बाहर हैं। यह मामला तमिलनाडु और पूरे देश में गहरी हलचल मचा चुका है।

खुशबू सुंदर के इंस्टाग्राम पोस्ट में क्या कहा

खुशबू सुंदर ने इंस्टाग्राम पर लिखा, 'एक बच्चे के दर्द को खरीदा नहीं जा सकता। उसकी आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। न्याय पर सौदा नहीं किया जा सकता। ताकतवर को कभी यह नहीं मानने देना चाहिए कि उसे कोई छू नहीं सकता।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'बच्चे के शोषण से ज़्यादा भयानक, कायरतापूर्ण और अक्षम्य कुछ भी नहीं है।'

उन्होंने पोस्ट में आरोपी के कथित रसूख को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने लिखा, 'अगर इस मामले में ₹70 करोड़ की संपत्ति, रसूख या राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंधों का इस्तेमाल सच्चाई को दबाने, पीड़िता को चुप कराने या न्याय में बाधा डालने के लिए किया जाता है, तो यह मुझे और ज़्यादा गुस्सा दिलाता है और यह बिल्कुल अस्वीकार्य है।' उन्होंने माँग की कि इसे उजागर किया जाए और स्वतंत्र जाँच हो।

पोस्ट के अंत में खुशबू ने लिखा, 'अगर दोष साबित होता है, तो कोई बचाव नहीं होना चाहिए। कानून को अपनी पूरी ताकत से अपराधी और इस अपराध में शामिल सभी लोगों को बिना देरी के सजा देनी चाहिए।'

जाँच का दायरा बढ़ा, तीन और गिरफ्तारियाँ

ग्रेटर चेन्नई पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने इस पॉक्सो केस में जाँच का दायरा बढ़ा दिया है। पुलिस ने गणेशन को गिरफ्तार किया है, जो पहले जेम ग्रेनाइट्स के लिए काम करता था। यह गिरफ्तारी तब हुई जब कथित तौर पर गणेशन के मोबाइल फोन पर वीरमणि और एक नाबालिग लड़की से जुड़ा आपत्तिजनक वीडियो मिलने का दावा किया गया।

इसके अलावा, शांति और महेंद्र सिम्हन नामक दंपति को भी गिरफ्तार किया गया है, जिनके वीरमणि से संबंध होने की बात सामने आई है। शुरुआती औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद तीनों — गणेशन, शांति और महेंद्र सिम्हन — को अदालत में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

आर. वीरमणि केस की पृष्ठभूमि

आर. वीरमणि 'जेम ग्रुप' के चेयरमैन हैं, जो भारत के सबसे बड़े ग्रेनाइट निर्यात व्यवसायों में से एक माना जाता है। उन पर कई वर्षों तक नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और उत्पीड़न के आरोप हैं। वीरमणि को पहले ही कई नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है।

यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में यौन शोषण के मामलों में रसूखदार आरोपियों को लेकर जनता का गुस्सा चरम पर है। गौरतलब है कि खुशबू ने सीधे तौर पर पूछा, 'वह इतने सालों तक कैसे बचता रहा?' — यह सवाल जाँच एजेंसियों और न्यायपालिका दोनों की ज़िम्मेदारी पर उँगली उठाता है।

आम जनता और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

इस मामले ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। बाल सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पॉक्सो कानून के तहत त्वरित और निर्बाध जाँच सुनिश्चित होनी चाहिए, विशेष रूप से तब जब आरोपी के पास आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव होने की बात सामने आई हो। आलोचकों का कहना है कि इस केस में यह भी देखना होगा कि क्या सिस्टम के भीतर किसी स्तर पर मामले को दबाने की कोशिश हुई।

CCB की जाँच अभी जारी है और आगे और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि एक बड़ा उद्योगपति कथित तौर पर वर्षों तक कानून की पकड़ से बाहर कैसे रहा। CCB की बढ़ती गिरफ्तारियाँ बताती हैं कि यह नेटवर्क केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था। इस केस की असली परीक्षा यह होगी कि आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव के बावजूद क्या पॉक्सो कानून का निर्बाध क्रियान्वयन हो पाता है — और जाँच एजेंसियाँ पारदर्शिता के साथ यह बता पाती हैं कि इतने सालों तक मामला दबा क्यों रहा।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आर. वीरमणि पॉक्सो केस क्या है?
यह तमिलनाडु के ग्रेनाइट उद्योगपति और 'जेम ग्रुप' के चेयरमैन आर. वीरमणि के खिलाफ दर्ज मामला है, जिसमें उन पर कई नाबालिग लड़कियों के वर्षों तक यौन शोषण के आरोप हैं। वीरमणि को इन आरोपों में गिरफ्तार किया जा चुका है और ग्रेटर चेन्नई पुलिस की CCB जाँच कर रही है।
खुशबू सुंदर ने इस केस पर क्या कहा?
खुशबू सुंदर ने 23 सितंबर 2026 को इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर माँग की कि ₹70 करोड़ की संपत्ति या राजनीतिक रसूख से न्याय में बाधा नहीं आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोष साबित होने पर कोई बचाव नहीं होना चाहिए और कानून को पूरी ताकत से सजा देनी चाहिए।
CCB ने इस केस में अब तक किसे गिरफ्तार किया है?
CCB ने गणेशन (पूर्व जेम ग्रेनाइट्स कर्मचारी) और दंपति शांति व महेंद्र सिम्हन को गिरफ्तार किया है। गणेशन के मोबाइल फोन पर वीरमणि और एक नाबालिग लड़की से जुड़ा कथित आपत्तिजनक वीडियो मिलने का दावा किया गया। अदालत ने तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
पॉक्सो कानून के तहत इस मामले में क्या प्रावधान लागू होते हैं?
पॉक्सो (Protection of Children from Sexual Offences) अधिनियम के तहत नाबालिगों के यौन शोषण पर कठोर दंड का प्रावधान है और विशेष अदालत में त्वरित सुनवाई होती है। इस मामले में CCB जाँच कर रही है और गिरफ्तार आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।
आर. वीरमणि केस का तमिलनाडु में क्या प्रभाव पड़ा है?
इस केस ने तमिलनाडु और पूरे देश में व्यापक सामाजिक चर्चा छेड़ दी है। यह सवाल उठ रहे हैं कि कथित तौर पर इतने सालों तक इस तरह का शोषण कैसे चलता रहा। खुशबू सुंदर जैसी著名 हस्तियों की आवाज़ के साथ जनदबाव बढ़ रहा है कि जाँच निष्पक्ष और पारदर्शी हो।
राष्ट्र प्रेस
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