24 सितंबर 2026
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तमिलनाडु: वीरमणि पॉक्सो केस बंद करने पर CCB ने तीन पुलिस अधिकारियों को समन भेजा

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तमिलनाडु: वीरमणि पॉक्सो केस बंद करने पर CCB ने तीन पुलिस अधिकारियों को समन भेजा

सारांश

चेन्नई में ग्रेनाइट कारोबारी वीरमणि के पॉक्सो केस को बंद करने वाले तीन पुलिस अधिकारियों को CCB ने समन भेजा है। अदालत के हस्तक्षेप और नई जाँच के बाद हुई गिरफ्तारियों के बाद अब जाँच की दिशा उन अधिकारियों की ओर मुड़ गई है जिन्होंने मूल शिकायत पर कार्रवाई की थी।

मुख्य बातें

CCB ने 24 सितंबर 2026 को ग्रेनाइट कारोबारी आर.
वीरमणि के पॉक्सो केस बंद करने के मामले में तीन पुलिस अधिकारियों को समन भेजा।
समन पाने वालों में असिस्टेंट कमिश्नर यास्मीन , इंस्पेक्टर महेश कुमार और इंस्पेक्टर राजलक्ष्मी शामिल हैं।
शिकायत अक्टूबर 2025 में दर्ज हुई थी; पुलिस के केस बंद करने के प्रयास को अदालत ने खारिज कर नई जाँच के आदेश दिए।
नई जाँच में वीरमणि , शांति , महेंद्र सिम्हन और पूर्व सहयोगी गणेशन को गिरफ्तार किया गया।
यह दावा कि कथित शोषण 2003 से 23 वर्षों तक चला, अभी भी जाँच के अधीन है; अदालत ने इसकी पुष्टि नहीं की।
तीनों अधिकारियों को समन पूछताछ के लिए है — उनके खिलाफ अभी कोई निष्कर्ष घोषित नहीं हुआ।

चेन्नई में सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने 24 सितंबर 2026 को ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरमणि के पॉक्सो मामले को बंद करने वाले तीन पुलिस अधिकारियों को पूछताछ के लिए समन भेजा है। इन अधिकारियों ने अक्टूबर 2025 में दर्ज शिकायत के बाद बच्चों के यौन शोषण के इस संगीन मामले की प्रारंभिक जाँच की थी, और बाद में केस बंद करने की सिफारिश की थी।

मुख्य घटनाक्रम

CCB ने एंटी-वाइस यूनिट में कार्यरत असिस्टेंट कमिश्नर यास्मीन, इंस्पेक्टर महेश कुमार और इंस्पेक्टर राजलक्ष्मी को समन जारी किया है। इन अधिकारियों से यह सफाई माँगी गई है कि जब शिकायत दर्ज हो चुकी थी, तो मामला बंद करने की रिपोर्ट क्यों सौंपी गई। उल्लेखनीय है कि यह समन किसी दोषसिद्धि या आरोप का संकेत नहीं है — यह एक जाँच प्रक्रिया का हिस्सा है।

जाँच अधिकारी यह देखेंगे कि शिकायत का आकलन किस आधार पर किया गया, क्या साक्ष्य एकत्र किए गए और केस बंद करने की रिपोर्ट किन कारणों से दाखिल की गई। इन सवालों के जवाब से यह संकेत मिल सकता है कि क्या प्रारंभिक जाँच में कोई चूक हुई थी।

अदालती हस्तक्षेप और पुनः जाँच

कथित तौर पर जब पुलिस ने मामले को बंद करने का प्रयास किया, तो अदालत ने उस निष्कर्ष को मानने से इनकार कर दिया और नए सिरे से जाँच के निर्देश दिए। न्यायिक समीक्षा के बाद पुनः शुरू हुई जाँच में गिरफ्तारियाँ हुईं। ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरमणि को पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार कर पुझल जेल भेजा गया।

पुलिस ने शांति और उनके पति महेंद्र सिम्हन को भी गिरफ्तार किया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने कथित शोषण में सहयोग किया। वीरमणि के पूर्व सहयोगी गणेशन को भी हिरासत में लिया गया है।

आरोपों की व्यापकता और अदालती सावधानी

यह दावा कि कथित शोषण 2003 में शुरू हुआ और लगभग 23 वर्षों तक जारी रहा, अभी भी जाँच के दायरे में है। अदालत ने इस अवधि या इसके विवरण की अब तक पुष्टि नहीं की है। पुलिस ने सार्वजनिक रूप से यह भी नहीं बताया है कि इन दावों में कथित तौर पर कितने पीड़ित या घटनाएँ शामिल हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पॉक्सो मामलों की जाँच की निष्पक्षता और त्वरित कार्यवाही पर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि अदालत के हस्तक्षेप ने इस मामले को एक अलग दिशा दी और तब जाकर गिरफ्तारियाँ संभव हो सकीं।

आम जनता और न्यायिक प्रक्रिया पर असर

तीन अधिकारियों को समन भेजने का अर्थ यह नहीं है कि उन्होंने कोई गलत काम किया है — उनके खिलाफ अभी तक कोई निष्कर्ष घोषित नहीं हुआ है। CCB इस पूछताछ के ज़रिए यह समझने की कोशिश करेगी कि क्या महत्त्वपूर्ण साक्ष्यों को नज़रअंदाज़ किया गया, ज़रूरी सुरागों पर कार्रवाई नहीं की गई, या केस बंद करने की सिफारिश के पीछे कोई ठोस आधार था।

यह मामला इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि न्यायिक निगरानी किस तरह पुलिस की प्रारंभिक जाँच की दिशा बदल सकती है।

आगे क्या होगा

CCB को वीरमणि के खिलाफ लगाए गए आरोपों की तथ्यात्मक पड़ताल के साथ-साथ यह भी स्पष्ट करना होगा कि मूल जाँच किस तरह समाप्त हुई। सभी गिरफ्तार व्यक्तियों पर इस चरण में आरोप हैं और मामला जाँच एवं अदालती कार्यवाही के अधीन जारी है। आने वाले हफ्तों में CCB की पूछताछ के नतीजे इस जटिल मामले की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसे उजागर करने के लिए अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा। यह सवाल उठता है कि क्या जाँच एजेंसियों पर पर्याप्त निगरानी तंत्र है या केवल न्यायिक दखल ही एकमात्र जवाबदेही का ज़रिया बचा है। अब CCB के सामने दोहरी जिम्मेदारी है — वीरमणि के खिलाफ आरोपों की पड़ताल और उन अधिकारियों की भूमिका की जाँच जिन्होंने मामला दबाने का प्रयास किया। बिना पारदर्शी निष्कर्षों के यह मामला पुलिस की विश्वसनीयता पर एक और सवालिया निशान बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीरमणि पॉक्सो केस में CCB ने तीन अधिकारियों को समन क्यों भेजा?
CCB ने इन तीन अधिकारियों से यह सफाई माँगी है कि अक्टूबर 2025 में शिकायत दर्ज होने के बावजूद मामले को बंद करने की रिपोर्ट क्यों सौंपी गई। जाँच अधिकारी यह देखेंगे कि शिकायत का आकलन कैसे हुआ, कौन-से सबूत इकट्ठा किए गए और केस बंद करने का आधार क्या था।
ग्रेनाइट कारोबारी आर. वीरमणि पर क्या आरोप हैं?
वीरमणि पर नाबालिगों के यौन शोषण के आरोप हैं और उन्हें पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार कर पुझल जेल में रखा गया है। यह दावा कि कथित शोषण 2003 से लगभग 23 वर्षों तक चला, अभी जाँच के दायरे में है और अदालत ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
इस मामले में और कौन गिरफ्तार हुए हैं?
पुलिस ने शांति और उनके पति महेंद्र सिम्हन को कथित शोषण में सहयोग करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। वीरमणि के पूर्व सहयोगी गणेशन को भी हिरासत में लिया गया है।
अदालत ने इस मामले में क्या भूमिका निभाई?
जब पुलिस ने मामला बंद करने का प्रयास किया, तो अदालत ने उस निष्कर्ष को मानने से इनकार कर दिया और नए सिरे से जाँच के निर्देश दिए। न्यायिक समीक्षा के बाद पुनः शुरू हुई जाँच में गिरफ्तारियाँ संभव हो सकीं।
क्या समन पाने वाले तीनों अधिकारियों पर कोई आरोप तय हुए हैं?
नहीं, तीनों अधिकारियों को अभी केवल पूछताछ के लिए बुलाया गया है। उनके खिलाफ कोई निष्कर्ष घोषित नहीं हुआ है और यह समन किसी दोषसिद्धि का संकेत नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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