वीरमणि पॉक्सो केस: एसआईटी ने माँगे DSP रैंक के अतिरिक्त अधिकारी, 29 सितंबर को जमानत सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
चेन्नई में जेम ग्रुप के चेयरमैन आर. वीरमणि के विरुद्ध चल रही पॉक्सो जाँच को और मज़बूत करने की तैयारी है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) रैंक के अतिरिक्त अधिकारियों की माँग की है, जिससे आने वाले दिनों में जाँच दल का विस्तार होने की प्रबल संभावना है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अदालत में दो आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर 29 सितंबर 2026 को सुनवाई होनी है।
एसआईटी की संरचना और विस्तार की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी के चारों सदस्यों ने एक-एक या दो-दो अधिकारियों के नाम सुझाए हैं। नियुक्तियाँ अंतिम रूप देने से पहले प्रत्येक सुझाए गए नाम की समीक्षा की जाएगी और अगले कुछ दिनों में आदेश जारी होने की उम्मीद है।
फ़िलहाल सेंट्रल क्राइम ब्रांच की असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस पीसी थेनमोझी महिला अधिकारियों वाली इस टीम का नेतृत्व कर रही हैं। जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (लॉ एंड ऑर्डर वेस्ट) दिशा मित्तल, सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस एवं मीडिया रिलेशंस ऑफिसर जे. मुथारासी और डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस वीवी गीतांजलि भी टीम में शामिल हैं।
मामले का पृष्ठभूमि और अब तक की गिरफ्तारियाँ
यह मामला अक्टूबर 2025 में दर्ज हुआ था। प्राथमिकी दर्ज होने के करीब 11 महीने बाद, 29 अगस्त 2026 को वीरमणि और उनके दो साथियों को गिरफ्तार किया गया। चौथे आरोपी, 45 वर्षीय गणेशन, को 22 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, गणेशन के पास कथित तौर पर एक ऐसा वीडियो था जिसमें वीरमणि को एक नाबालिग का यौन उत्पीड़न करते हुए दिखाया गया था, फिर भी उसने इसकी सूचना अधिकारियों को नहीं दी। इस प्रकार अब तक इस मामले में कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
वीरमणि पर एक नाबालिग के यौन उत्पीड़न का आरोप है और जाँच 'बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम' (पॉक्सो एक्ट) के तहत की जा रही है।
जमानत याचिकाओं पर पुलिस का कड़ा विरोध
चेन्नई पुलिस ने एक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट को बताया कि यदि वीरमणि के दो साथियों को जमानत दी गई, तो वे सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं, गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं अथवा देश छोड़कर भाग सकते हैं। इन दोनों साथियों की पुलिस हिरासत रविवार को समाप्त हो रही है, जिसके बाद उन्हें आगे के आदेश के लिए अदालत में पेश किया जाएगा।
उनकी जमानत याचिकाओं पर 29 सितंबर 2026 को सुनवाई निर्धारित है। जाँचकर्ताओं ने सबूतों और गवाहों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है, जिसे अदालत अपनी सुनवाई में ध्यान में रखेगी।
आगे क्या होगा
पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि जाँच कब पूरी होगी या कौन-से अधिकारी नए सिरे से टीम में जोड़े जाएँगे। गौरतलब है कि यह अनुरोध ऐसे समय पर आया है जब एसआईटी मामले के अगले चरण की तैयारी में है और अदालती कार्यवाही निर्णायक मोड़ पर है। 29 सितंबर की सुनवाई के नतीजे इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगे।