29 सितंबर 2026
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वीरमणि पॉक्सो मामला: DMK ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की, CM विजय और दो मंत्रियों से SIT पूछताछ की मांग

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वीरमणि पॉक्सो मामला: DMK ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की, CM विजय और दो मंत्रियों से SIT पूछताछ की मांग

सारांश

वीरमणि पॉक्सो मामले में DMK ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर कर SIT से मांग की है कि CM जोसेफ विजय और दो मंत्रियों के सार्वजनिक आरोपों के पीछे क्या साक्ष्य हैं, यह जांचा जाए। पार्टी कोषाध्यक्ष टी.आर. बालू ने हलफनामे में कहा कि जांच-संबंधी जानकारी छिपाना अपराध को छिपाने के बराबर हो सकता है।

मुख्य बातें

DMK ने 29 सितंबर 2026 को मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर SIT को निर्देश देने की मांग की।
याचिका में मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय और मंत्रियों आधव अर्जुन व सीटीआर निर्मल कुमार से पूछताछ की मांग की गई है।
DMK पार्टी कोषाध्यक्ष टी.आर.
बालू ने हलफनामे में कहा कि जांच-संबंधी जानकारी छिपाना अपराध छिपाने के बराबर हो सकता है।
जेम ग्रेनाइट्स के संस्थापक आर.
वीरमणि POCSO अधिनियम के तहत दर्ज मामले में मुख्य अभियुक्त हैं।
ज्ञापन की एक प्रति पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी भेजी गई।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने मद्रास उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर विशेष जांच दल (SIT) को निर्देश देने की मांग की है कि वह आर. वीरमणि बाल यौन शोषण (पॉक्सो) मामले की जांच के दौरान यह भी सुनिश्चित करे कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और दो मंत्रियों के पास उन सार्वजनिक दावों के समर्थन में ठोस साक्ष्य हैं या नहीं, जिनमें उन्होंने पिछली DMK सरकार पर आरोपी को संरक्षण देने का आरोप लगाया था। यह याचिका 29 सितंबर 2026 को चेन्नई में दायर की गई।

याचिका की पृष्ठभूमि

यह याचिका DMK के पार्टी कोषाध्यक्ष टी.आर. बालू की ओर से दाखिल की गई है। DMK ने इससे पहले 27 सितंबर 2026 को SIT को एक अर्जी दी थी, जिसमें मुख्यमंत्री विजय और मंत्रियों आधव अर्जुन एवं सीटीआर निर्मल कुमार को पूछताछ के लिए बुलाने की मांग की गई थी। अब पार्टी ने उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाते हुए कोर्ट से आग्रह किया है कि SIT को उस अर्जी पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए।

मुख्य घटनाक्रम

अपने हलफनामे में बालू ने कहा कि मुख्यमंत्री और दोनों मंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से पिछली DMK सरकार पर वीरमणि को बचाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार यदि इन नेताओं के पास उन आरोपों को प्रमाणित करने वाली कोई जानकारी थी, तो उनका दायित्व था कि वे उसे जांच एजेंसी के साथ साझा करते।

बालू ने यह भी तर्क दिया कि पॉक्सो मामले से जुड़ी जानकारी रखने वाले किसी भी व्यक्ति को वह जानकारी जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत करनी चाहिए। उनके अनुसार, ऐसी जानकारी छिपाना अपराध को छिपाने के समान हो सकता है।

याचिका में क्या माँगा गया है

याचिका में अदालत से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है कि SIT DMK की अर्जी पर विचार करे और यह तय करे कि क्या संबंधित नेताओं के सार्वजनिक बयान उनके पास उपलब्ध किसी ठोस साक्ष्य पर आधारित थे। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि इसमें अदालत से पिछली सरकार पर लगे आरोपों की सत्यता को स्वयं निर्धारित करने का अनुरोध नहीं है, बल्कि केवल नेताओं के पास उपलब्ध सामग्री और सूचना के स्रोत की जांच का अनुरोध है।

बालू ने यह भी बताया कि इस ज्ञापन की एक प्रति पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी भेजी गई थी।

वीरमणि मामला: पृष्ठभूमि

जेम ग्रेनाइट्स के संस्थापक आर. वीरमणि 'प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज' (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में मुख्य अभियुक्त हैं। इस मामले की जांच के लिए विशेष तौर पर एक महिला-बहुल SIT का गठन किया गया है, जो अभी भी सक्रिय रूप से जांच जारी रखे हुए है। यह मामला तमिलनाडु में बड़े विवाद का केंद्र बना हुआ है, जहाँ सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

राजनीतिक आयाम और आगे की राह

गौरतलब है कि DMK की यह याचिका न केवल एक जांच की दिशा तय करने का प्रयास है, बल्कि यह एक राजनीतिक पलटवार भी है। सत्तारूढ़ दल की ओर से विपक्ष पर लगाए गए आरोपों को अब DMK ने न्यायालय के समक्ष उजागर करने की कोशिश की है। यह मामला मद्रास उच्च न्यायालय में लंबित है और आगामी सुनवाई में न्यायालय की दिशा-निर्देश निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

DMK ने मद्रास हाईकोर्ट में क्या याचिका दायर की है?
DMK ने मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर SIT को यह निर्देश देने की मांग की है कि वह मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और मंत्रियों आधव अर्जुन व सीटीआर निर्मल कुमार से पूछताछ करे। पार्टी चाहती है कि SIT यह जाँचे कि इन नेताओं के पास पिछली DMK सरकार पर वीरमणि को संरक्षण देने के अपने दावों को साबित करने वाला कोई साक्ष्य है या नहीं।
आर. वीरमणि कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
आर. वीरमणि जेम ग्रेनाइट्स के संस्थापक हैं और POCSO (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज) अधिनियम के तहत दर्ज बाल यौन शोषण मामले में मुख्य अभियुक्त हैं। इस मामले की जांच के लिए विशेष रूप से एक महिला-बहुल SIT गठित की गई है।
टी.आर. बालू ने हलफनामे में क्या कहा?
DMK पार्टी कोषाध्यक्ष टी.आर. बालू ने हलफनामे में कहा कि पॉक्सो मामले से जुड़ी जानकारी रखने वाले किसी भी व्यक्ति को वह जानकारी जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी जानकारी छिपाना अपराध को छिपाने के बराबर हो सकता है।
DMK ने SIT को पहले कब अर्जी दी थी?
DMK ने 27 सितंबर 2026 को SIT को एक अर्जी दी थी, जिसमें मुख्यमंत्री विजय और मंत्रियों आधव अर्जुन व सीटीआर निर्मल कुमार को पूछताछ के लिए बुलाने की मांग की गई थी। SIT द्वारा उस अर्जी पर कार्रवाई न होने पर पार्टी ने मद्रास हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।
इस याचिका से SIT की जांच पर क्या असर पड़ेगा?
याचिका में न्यायालय से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है कि SIT नेताओं की जानकारी और उनके पास उपलब्ध किसी भी सहायक सामग्री की जांच करे। आगामी सुनवाई में न्यायालय के निर्देश यह तय करेंगे कि SIT इस दिशा में कदम उठाएगी या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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