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कश्मीर घाटी में स्वास्थ्य विभाग के 3,190 पद खाली, 2,744 पैरामेडिक पदों पर संकट गहरा

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कश्मीर घाटी में स्वास्थ्य विभाग के 3,190 पद खाली, 2,744 पैरामेडिक पदों पर संकट गहरा

सारांश

कश्मीर घाटी में स्वास्थ्य विभाग के 3,190 पद खाली हैं — इनमें 2,744 पैरामेडिक पद शामिल हैं। विधानसभा में यह खुलासा तब हुआ जब मेडिकल इंटर्न की हड़ताल पहले ही व्यवस्था की कमज़ोरी उजागर कर चुकी थी। सरकार के पास अभी कोई ठोस भर्ती योजना नहीं है।

मुख्य बातें

कश्मीर घाटी में स्वास्थ्य विभाग के कुल 3,190 पद रिक्त हैं — 30 सितंबर 2026 को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में खुलासा।
रिक्त पदों में 2,744 पैरामेडिक , 276 चिकित्सा अधिकारी , 152 सलाहकार और 18 वरिष्ठ सलाहकार शामिल हैं।
कश्मीर स्वास्थ्य सेवा निदेशालय में 11,649 स्वीकृत पदों के विरुद्ध केवल 8,459 कर्मी कार्यरत हैं।
समूचे जम्मू-कश्मीर में कुल 12,614 चिकित्सा एवं पैरामेडिकल पद रिक्त हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विकास कोष के ज़रिये भर्ती की कोई योजना फ़िलहाल विचाराधीन नहीं।
मेडिकल इंटर्न की हड़ताल के बाद सरकार ने माँगें मानीं; इंटर्न का वेतन 2019 से अपरिवर्तित था।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा को बुधवार, 30 सितंबर 2026 को सूचित किया गया कि कश्मीर घाटी में स्वास्थ्य विभाग के कुल 3,190 पद रिक्त हैं — जिनमें सबसे बड़ी संख्या पैरामेडिकल श्रेणी की है। यह खुलासा विधायक हसनैन मसूदी के एक प्रश्न के जवाब में सरकार की ओर से किया गया, जो कश्मीर की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बिगड़ती स्थिति को उजागर करता है।

रिक्त पदों का विवरण

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आँकड़ों के अनुसार, कश्मीर स्वास्थ्य सेवा निदेशालय में कुल 11,649 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से केवल 8,459 कर्मी ही वर्तमान में कार्यरत हैं। इस प्रकार 3,190 पद रिक्त पड़े हैं।

रिक्त पदों में 2,744 पैरामेडिक पद शामिल हैं, जो कुल रिक्तियों का बड़ा हिस्सा है। इसके अतिरिक्त 276 चिकित्सा अधिकारी, 152 सलाहकार और 18 वरिष्ठ सलाहकार के पद भी खाली हैं। गौरतलब है कि यह आँकड़ा समूचे जम्मू-कश्मीर में रिक्त 12,614 चिकित्सा एवं पैरामेडिकल पदों के व्यापक आँकड़े का हिस्सा है, जो दर्शाता है कि कश्मीर घाटी में पैरामेडिकल और सहायक कर्मचारियों की कमी विशेष रूप से गंभीर है।

सरकार की प्रतिक्रिया

सरकार ने विधानसभा को स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विकास कोष के माध्यम से इस कमी को दूर करने के लिए फ़िलहाल कोई भर्ती व्यवस्था विचाराधीन नहीं है। सरकार ने कहा कि यदि भविष्य में ऐसा कोई प्रस्ताव आता है, तो उसकी योग्यता का मूल्यांकन किया जाएगा — जो एक अस्पष्ट और गैर-प्रतिबद्ध उत्तर माना जा रहा है।

इसके बजाय सरकार का ध्यान वर्तमान में भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों (IPHS) के अनुसार मौजूदा सुविधाओं को सुदृढ़ करने, उपलब्ध मानव संसाधन को युक्तिसंगत बनाने और ई-संजीवनी हब-एंड-स्पोक मॉडल के ज़रिये टेलीमेडिसिन सेवाओं के विस्तार पर केंद्रित है। जम्मू-कश्मीर में लगभग 4,000 स्वास्थ्य संस्थान हैं।

मेडिकल इंटर्न की हड़ताल और उसका असर

यह खुलासा ऐसे समय में आया है जब हाल ही में मेडिकल इंटर्न की हड़ताल ने कश्मीर की स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित किया था। इंटर्न ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर और अस्पताल के वार्डों में आपातकालीन मामलों की देखभाल की रीढ़ हैं — और उनके काम बंद करने से व्यवस्था चरमरा गई थी।

मेडिकल इंटर्न का कहना था कि उनका मासिक वेतन 2019 से अपरिवर्तित है और बढ़ती महंगाई के बावजूद सरकार ने इसमें कोई संशोधन नहीं किया। अंततः सरकार ने उनकी माँगें स्वीकार कर लीं और इंटर्न काम पर लौट आए, जिससे स्वास्थ्य सेवाएँ सामान्य हो सकीं।

आम जनता पर असर

पैरामेडिकल कर्मचारियों की भारी कमी का सीधा असर आम मरीज़ों पर पड़ता है — विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज़ के इलाकों में, जहाँ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहले से ही सीमित संसाधनों पर निर्भर हैं। 2,744 पैरामेडिक पदों की रिक्तता का अर्थ है कि नर्सिंग, लैब तकनीशियन और अन्य सहायक सेवाओं में भारी दबाव बना रहता है।

आलोचकों का कहना है कि टेलीमेडिसिन जैसे डिजिटल समाधान ज़मीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों की कमी की भरपाई नहीं कर सकते, और बिना नियमित भर्ती के यह संकट और गहरा होता जाएगा।

क्या होगा आगे

विधानसभा में इस खुलासे के बाद विपक्ष और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की ओर से माँग उठ रही है कि सरकार रिक्त पदों को भरने के लिए एक ठोस समयसीमा और भर्ती कैलेंडर जारी करे। यह देखना होगा कि सरकार का 'भविष्य में मूल्यांकन' का रुख कब और कैसे ठोस कार्रवाई में बदलता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

190 रिक्त पदों का यह आँकड़ा अकेले नहीं बोलता — यह उस व्यापक संकट की एक झलक है जहाँ जम्मू-कश्मीर में 12,614 चिकित्सा पद खाली पड़े हैं और सरकार के पास कोई ठोस भर्ती रोडमैप नहीं है। विधानसभा में 'भविष्य में मूल्यांकन' जैसे अस्पष्ट जवाब यह संकेत देते हैं कि नीतिगत इच्छाशक्ति की कमी उतनी ही बड़ी समस्या है जितनी बजट की। मेडिकल इंटर्न का 2019 से अपरिवर्तित वेतन और उनकी हड़ताल दर्शाती है कि ज़मीनी स्वास्थ्यकर्मी व्यवस्था का बोझ उठाते हुए खुद उपेक्षित हैं। टेलीमेडिसिन और युक्तिसंगतता जैसे उपाय तब तक पर्याप्त नहीं हैं जब तक नियमित भर्ती से रिक्तियाँ नहीं भरी जातीं।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कश्मीर घाटी में स्वास्थ्य विभाग के कितने पद रिक्त हैं?
कश्मीर घाटी में स्वास्थ्य विभाग के कुल 3,190 पद रिक्त हैं, जिनमें 2,744 पैरामेडिक, 276 चिकित्सा अधिकारी, 152 सलाहकार और 18 वरिष्ठ सलाहकार शामिल हैं। यह जानकारी 30 सितंबर 2026 को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में दी गई।
कश्मीर स्वास्थ्य सेवा निदेशालय में कुल कितने पद स्वीकृत हैं?
कश्मीर स्वास्थ्य सेवा निदेशालय में कुल 11,649 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से वर्तमान में केवल 8,459 कर्मी कार्यरत हैं। शेष 3,190 पद रिक्त हैं।
सरकार इन रिक्तियों को भरने के लिए क्या कर रही है?
सरकार ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विकास कोष के माध्यम से भर्ती की फ़िलहाल कोई योजना विचाराधीन नहीं है। सरकार का ध्यान टेलीमेडिसिन विस्तार, मौजूदा सुविधाओं को मज़बूत करने और मानव संसाधन को युक्तिसंगत बनाने पर है।
मेडिकल इंटर्न की हड़ताल का कश्मीर की स्वास्थ्य सेवाओं पर क्या असर पड़ा?
मेडिकल इंटर्न की हड़ताल से ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर और अस्पताल वार्डों की सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हुईं। इंटर्न का कहना था कि उनका मासिक वेतन 2019 से नहीं बढ़ा है। अंततः सरकार ने माँगें मान लीं और इंटर्न काम पर लौट आए।
समूचे जम्मू-कश्मीर में कितने चिकित्सा पद रिक्त हैं?
समूचे जम्मू-कश्मीर में कुल 12,614 चिकित्सा एवं पैरामेडिकल पद रिक्त हैं। इनमें से 3,190 रिक्तियाँ अकेले कश्मीर घाटी में हैं, जो दर्शाता है कि घाटी में पैरामेडिकल और सहायक कर्मचारियों की कमी विशेष रूप से गंभीर है।
राष्ट्र प्रेस
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