5 अगस्त: अनुच्छेद 370 हटाए 7 साल और राम मंदिर भूमि पूजन के 6 साल — दो ऐतिहासिक पलों की गाथा
सारांश
मुख्य बातें
आधुनिक भारत के इतिहास में 5 अगस्त एक ऐसी तारीख है जो दो अलग-अलग वर्षों में दो अलग-अलग कारणों से देश की सामूहिक स्मृति में दर्ज हो गई। 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया और ठीक एक वर्ष बाद, 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर का भूमि पूजन हुआ। आज इन दोनों घटनाओं को क्रमशः 7 वर्ष और 6 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
अनुच्छेद 370 का अंत: एक संवैधानिक पुनर्संरचना
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने संसद में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित कराया और जम्मू-कश्मीर को उसके विशेष दर्जे से मुक्त कर दिया। इसके साथ ही राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख — में विभाजित कर दिया गया। इस निर्णय के परिणामस्वरूप कानून व्यवस्था सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आ गई।
इससे पहले वहाँ भारत के संविधान की जगह एक पृथक व्यवस्था और रणबीर दंड संहिता लागू थी। अनुच्छेद 35ए के खात्मे के बाद उन महिलाओं के संपत्ति और निवास अधिकार बहाल हुए जिन्होंने गैर-कश्मीरी से विवाह किया था। घरेलू हिंसा और बाल शोषण-विरोधी राष्ट्रीय कानून भी अब पूरी तरह इस क्षेत्र में लागू हैं।
सुरक्षा परिदृश्य में बदलाव
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को मिली विस्तारित कार्यक्षेत्र के बाद इन एजेंसियों की जाँच में पाकिस्तान से आने वाले वित्त पोषण के नेटवर्क उजागर हुए। स्थानीय पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय से ओवर-ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) नेटवर्क को काफी हद तक कमज़ोर किया गया। हिज़बुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों की क्षेत्रीय प्रासंगिकता पहले की तुलना में काफी घटी है।
हालाँकि, चुनौतियाँ पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। लश्कर-ए-तैयबा और उसके छद्म संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' की सक्रियता अब भी सुरक्षा बलों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में स्थित लॉन्च पैड से घुसपैठ की कोशिशें जारी हैं।
लोकतंत्र और विकास की राह
2024 में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनावों ने क्षेत्र में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पुनर्जीवित किया। शैक्षिक संस्थाएँ अब बंद होने की बजाय नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत संचालित हो रही हैं। पर्यटन क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे स्थानीय रोज़गार और निवेश के नए अवसर उत्पन्न हुए हैं।
अयोध्या: भूमि पूजन से प्राण प्रतिष्ठा तक
5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर का भूमि पूजन संपन्न कराया — देश की सबसे लंबी कानूनी लड़ाइयों में से एक के समाधान के बाद। इस अनुष्ठान से आरंभ हुए निर्माण कार्य का परिणाम 22 जनवरी 2024 को सामने आया, जब पूरे विधि-विधान के साथ रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गई और मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
अयोध्या को हिंदू धर्म की सात मोक्षदायिनी नगरियों (सप्तपुरी) में प्रथम स्थान प्राप्त है। मंदिर के उद्घाटन के बाद से देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु और पर्यटक यहाँ आ रहे हैं, जिससे स्थानीय व्यापार, होटल और परिवहन क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिला है।
आगे की राह
5 अगस्त की यह दोहरी विरासत भारत की नीतिगत और सांस्कृतिक दिशा के दो महत्त्वपूर्ण मोड़ों को रेखांकित करती है। जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया और अयोध्या के समग्र विकास की योजनाएँ आने वाले वर्षों में इन निर्णयों की दीर्घकालिक सफलता की कसौटी बनेंगी।