5 अगस्त 2026
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अनुच्छेद 370 हटने के 7 साल: सांबा में पश्चिम पाकिस्तानी शरणार्थियों ने 5 अगस्त को मनाया 'आज़ादी का पर्व'

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अनुच्छेद 370 हटने के 7 साल: सांबा में पश्चिम पाकिस्तानी शरणार्थियों ने 5 अगस्त को मनाया 'आज़ादी का पर्व'

सारांश

सात साल पहले जो संवैधानिक बदलाव हुआ, वह सांबा के पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों के लिए महज़ राजनीतिक घटना नहीं — 75 वर्षों की प्रतीक्षा का अंत था। 5 अगस्त उनके लिए 15 अगस्त जितना ही पवित्र है, और इस बार भी ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया जा रहा है।

मुख्य बातें

5 अगस्त 2026 को अनुच्छेद 370 हटने की सातवीं वर्षगाँठ पर सांबा में पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों ने 'आज़ादी का पर्व' मनाया।
पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी कार्य समिति के अध्यक्ष लांबा राम गांधी ने कहा कि समुदाय 75 वर्षों से नागरिकता और समान अधिकारों का इंतज़ार कर रहा था।
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 और 35ए निष्प्रभावी कर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया था।
समुदाय के सदस्य रमेश सिंह ने कहा कि बदलावों के बाद रोज़गार के अवसर बढ़े और समुदाय में नई ऊर्जा आई।
5 अगस्त को 'काला दिवस' बताने वाले राजनीतिक दलों को समुदाय ने वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित बताया।

सांबा में पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी समुदाय ने 5 अगस्त 2026 को अनुच्छेद 370 की समाप्ति की सातवीं वर्षगाँठ को 'आज़ादी के पर्व' के रूप में मनाया। समुदाय के सदस्यों ने कहा कि 5 अगस्त 2019 को हुए संवैधानिक बदलावों ने उन्हें वे अधिकार और पहचान दिलाई, जिनका वे 75 वर्षों से इंतज़ार कर रहे थे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिया था और राष्ट्रपति के आदेश के ज़रिए जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किया था। इसके साथ ही राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख — में पुनर्गठित किया गया। गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 1950 में भारतीय संविधान का हिस्सा बना था और सात दशकों तक लागू रहा।

शरणार्थी समुदाय की प्रतिक्रिया

पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी कार्य समिति के अध्यक्ष लांबा राम गांधी ने कहा कि 5 अगस्त 2019 उनके जीवन की एक ऐतिहासिक तारीख बन गई है। उन्होंने कहा, "पिछले 75 सालों से यह समुदाय जम्मू-कश्मीर में नागरिकता और समान अधिकारों का इंतज़ार कर रहा था, जो अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने के बाद संभव हो पाया। पूरे देश के लिए 5 अगस्त का महत्व उतना ही है जितना 15 अगस्त का।"

समिति के एक अन्य सदस्य रमेश सिंह ने बताया कि संवैधानिक बदलावों से पहले उनके समुदाय के लोग कई अधिकारों और अवसरों से वंचित थे। उन्होंने कहा, "अनुच्छेद 370 हटने के बाद समुदाय में नया उत्साह आया और रोज़गार के मौके मिलने लगे। हमारे लिए 5 अगस्त किसी राष्ट्रीय त्योहार से कम नहीं है।"

राजनीतिक विरोध पर समुदाय का रुख

5 अगस्त को 'काला दिवस' बताने वाले राजनीतिक दलों पर लांबा राम गांधी ने कहा कि ऐसी बातें शरणार्थी समुदाय की भावनाओं को नहीं दर्शातीं। उनके अनुसार, "वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित कुछ राजनीतिक दल लोगों को यह कहकर गुमराह कर रहे हैं कि अनुच्छेद 370 और 35ए को बहाल किया जाएगा, जबकि वे जानते हैं कि यह असंभव है।"

रमेश सिंह ने भी इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा, "कोई इसे काला दिवस कहे या कुछ और, 5 अगस्त हमारे लिए सम्मान और खुशी का दिन है। समुदाय के सदस्य ढोल-नगाड़ों और जश्न के साथ इस मौके को मनाएंगे।"

उत्सव की तैयारियाँ

लांबा राम गांधी ने बताया कि इस वर्ष के जश्न की सभी तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं और समुदाय इस अवसर को पिछले वर्षों की तरह ही उत्साह, भव्यता और उल्लास के साथ मनाएगा। समुदाय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी समुदाय के अधिकार बहाल करने के लिए धन्यवाद दिया।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक बहसें जारी हैं और कुछ दल अनुच्छेद की बहाली को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। शरणार्थी समुदाय का कहना है कि वे इन प्रयासों को राजनीति से प्रेरित मानते हैं और अपनी नई संवैधानिक स्थिति को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ना चाहते। समुदाय के नेताओं ने संकेत दिया है कि 5 अगस्त का यह उत्सव आने वाले वर्षों में और व्यापक रूप धारण करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

सरकारी नौकरी और ज़मीन खरीदने जैसे बुनियादी अधिकारों से महरूम रहे लोगों के लिए 5 अगस्त महज़ राजनीतिक तारीख नहीं है। लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को लेकर राय बँटी हुई है — कश्मीर घाटी में इसे लेकर गहरी असहमति है जिसे नज़रअंदाज़ करना पूरी तस्वीर नहीं देता। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर या तो शरणार्थियों के उत्सव को या घाटी की आपत्तियों को — दोनों में से एक को — हाशिये पर रख देती है। संतुलित पत्रकारिता की माँग है कि दोनों आवाज़ें एक साथ दर्ज हों।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनुच्छेद 370 कब और कैसे हटाया गया?
5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति के आदेश के ज़रिए अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किया। इसके साथ ही राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख — में पुनर्गठित किया गया।
पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों को अनुच्छेद 370 से क्या समस्या थी?
अनुच्छेद 370 और 35ए के कारण पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को जम्मू-कश्मीर में नागरिकता, मतदान अधिकार, सरकारी नौकरी और ज़मीन खरीदने जैसे मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा गया था। 75 वर्षों की इस वंचना का अंत 2019 के संवैधानिक बदलावों से हुआ।
सांबा में 5 अगस्त को किस तरह मनाया जाता है?
पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी कार्य समिति के नेतृत्व में सांबा में हर वर्ष 5 अगस्त को ढोल-नगाड़ों और सामूहिक जश्न के साथ 'आज़ादी का पर्व' मनाया जाता है। समुदाय इसे 15 अगस्त के समान महत्व देता है।
5 अगस्त को 'काला दिवस' कहने वाले दलों पर शरणार्थी समुदाय का क्या कहना है?
पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी कार्य समिति के अध्यक्ष लांबा राम गांधी ने ऐसे बयानों को वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित बताया। उनका कहना है कि अनुच्छेद 370 की बहाली असंभव है और ऐसे दावे लोगों को गुमराह करने के लिए किए जा रहे हैं।
अनुच्छेद 370 हटने के बाद शरणार्थी समुदाय की स्थिति में क्या बदलाव आया?
समुदाय के सदस्य रमेश सिंह के अनुसार, संवैधानिक बदलावों के बाद रोज़गार के अवसर बढ़े और समुदाय को नई पहचान मिली। पहले जिन अधिकारों से वे वंचित थे, जैसे नागरिकता और सरकारी सेवाओं में भागीदारी, वे अब सुलभ हो गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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