आर्टिकल 370 हटने की 6वीं वर्षगांठ: सांबा में पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों ने 5 अगस्त को बताया 'दूसरा स्वतंत्रता दिवस'
सारांश
मुख्य बातें
सांबा जिले में पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी समुदाय ने 5 अगस्त 2025 को आर्टिकल 370 और 35ए हटने की वर्षगांठ को अपने अधिकारों की बहाली के उत्सव के रूप में मनाने की तैयारी पूरी कर ली है। समुदाय के प्रतिनिधियों ने 4 अगस्त को कहा कि 5 अगस्त 2019 का दिन उनके लिए उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना पूरे देश के लिए 15 अगस्त का स्वतंत्रता दिवस।
समुदाय के लिए क्यों खास है यह दिन
वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी एक्शन कमेटी के अध्यक्ष लांबा राम गांधी ने कहा कि 5 अगस्त 2019 का दिन पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी परिवारों के लिए 'सोने पर सुहागा' साबित हुआ। उन्होंने बताया कि पिछले 75 वर्षों से यह समुदाय जम्मू-कश्मीर की नागरिकता और समान अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहा था, जो आर्टिकल 370 और 35ए हटने के बाद ही संभव हो पाया।
लांबा राम गांधी ने यह भी कहा, "जब तक हम जीवित रहेंगे, 5 अगस्त को उसी तरह मनाएंगे, जैसे पूरा देश 15 अगस्त मनाता है।" उनके अनुसार इस वर्ष भी कार्यक्रम की सभी तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं और उत्सव पहले की भाँति धूमधाम से आयोजित किया जाएगा।
रोज़गार और अधिकारों में बदलाव का दावा
समुदाय के सदस्य रोमेश सिंह ने कहा कि 5 अगस्त 2019 से पहले उनके समुदाय को कई बुनियादी अधिकारों से वंचित रहना पड़ता था। उनके अनुसार आर्टिकल 370 हटने के बाद समुदाय में नई ऊर्जा आई और रोज़गार के अवसर मिलने शुरू हुए। रोमेश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन दोनों नेताओं के कारण उनके समुदाय को अधिकार प्राप्त हुए।
'काला दिवस' की राजनीति पर समुदाय की प्रतिक्रिया
लांबा राम गांधी ने उन राजनीतिक दलों पर टिप्पणी की जो 5 अगस्त को 'काला दिवस' के रूप में मनाने की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत सोच हो सकती है, लेकिन उनका समुदाय इससे सहमत नहीं है। उनके अनुसार कुछ राजनीतिक दल वोट बैंक की राजनीति के तहत लोगों को यह कहकर गुमराह कर रहे हैं कि आर्टिकल 370 और 35ए को दोबारा लागू कराया जाएगा, जबकि ऐसा संभव नहीं है।
समुदाय के एक अन्य सदस्य रोमेश कुमार ने भी स्पष्ट किया कि 'काला दिवस' जैसे बयानों से उनके समुदाय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि उनके समुदाय के लोग इस अवसर को ढोल-नगाड़ों और उत्सव के माहौल में मनाएंगे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 और 35ए को निरस्त किया था, जिससे राज्य का विशेष दर्जा समाप्त हो गया और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख — में विभाजित किया गया। यह ऐसे समय में आया था जब पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी समुदाय दशकों से नागरिकता और संपत्ति अधिकारों की माँग करता आ रहा था। इस निर्णय के बाद से हर वर्ष 5 अगस्त को सांबा सहित जम्मू क्षेत्र के कई हिस्सों में यह समुदाय उत्सव आयोजित करता है।
आगे की राह
समुदाय के प्रतिनिधियों ने संकेत दिया कि यह परंपरा आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगी। यह ऐसे समय में और अधिक प्रासंगिक हो जाता है जब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक दल आर्टिकल 370 की बहाली के मुद्दे को चुनावी एजेंडे में रखते आए हैं।