5 अगस्त 2026
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आर्टिकल 370 हटने की छठी वर्षगांठ: सांबा में पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों ने 5 अगस्त को बताया 'दूसरा स्वतंत्रता दिवस'

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आर्टिकल 370 हटने की छठी वर्षगांठ: सांबा में पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों ने 5 अगस्त को बताया 'दूसरा स्वतंत्रता दिवस'

सारांश

75 साल के इंतज़ार के बाद अधिकार पाने वाले पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी समुदाय के लिए 5 अगस्त महज़ एक तारीख नहीं — यह उनका अपना स्वतंत्रता दिवस है। सांबा में इस बार फिर ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न की तैयारी है, और समुदाय के नेताओं का कहना है कि यह सिलसिला जीवनभर जारी रहेगा।

मुख्य बातें

वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में सांबा जिले का पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी समुदाय 5 अगस्त 2025 को आर्टिकल 370 हटने की छठी वर्षगांठ पर उत्सव मनाएगा।
समिति अध्यक्ष लांबा राम गांधी ने कहा कि 5 अगस्त उनके लिए 15 अगस्त जितना ही महत्वपूर्ण है।
समुदाय 1947 के विभाजन के बाद से जम्मू-कश्मीर में बसा था, लेकिन 75 वर्षों तक नागरिक अधिकारों से वंचित रहा।
सदस्य रोमेश सिंह ने कहा कि आर्टिकल 370 हटने के बाद रोज़गार के अवसर मिलने शुरू हुए।
समुदाय के नेताओं ने 5 अगस्त को 'काला दिवस' बताने वाले राजनीतिक दलों पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाया।

सांबा जिले में पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी समुदाय ने 5 अगस्त 2025 को आर्टिकल 370 और 35ए के निरस्तीकरण की छठी वर्षगांठ को एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में मनाने की पूरी तैयारी कर ली है। समुदाय के नेताओं का कहना है कि 5 अगस्त 2019 वह दिन था जब दशकों से लंबित उनके नागरिक अधिकारों का रास्ता खुला, और इसीलिए यह तारीख उनके लिए 15 अगस्त जितनी ही महत्वपूर्ण है।

समुदाय का नज़रिया: 'सोने पर सुहागा' वाला दिन

वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी एक्शन कमेटी के अध्यक्ष लांबा राम गांधी ने कहा कि 5 अगस्त 2019 का दिन उनके समुदाय के लिए 'सोने पर सुहागा' साबित हुआ। उन्होंने बताया कि पिछले 75 वर्षों से यह समुदाय जम्मू-कश्मीर की नागरिकता और समान अधिकारों की प्रतीक्षा में था, जो आर्टिकल 370 और 35ए हटने के बाद ही संभव हो सका।

गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'जब तक हम जीवित रहेंगे, 5 अगस्त को उसी तरह मनाएंगे, जैसे पूरा देश 15 अगस्त मनाता है।' उनके अनुसार इस वर्ष भी उत्सव की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं और कार्यक्रम पूरे धूमधाम के साथ आयोजित होगा।

रोज़गार और अधिकार: ज़मीनी बदलाव की बात

समुदाय के सदस्य रोमेश सिंह ने बताया कि 5 अगस्त 2019 से पहले उनके समुदाय को कई बुनियादी अधिकारों से वंचित रहना पड़ता था। उनके अनुसार, आर्टिकल 370 हटने के बाद समुदाय में नया उत्साह आया और लोगों को रोज़गार के अवसर मिलने शुरू हुए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन दोनों नेताओं के कारण समुदाय को उसके अधिकार मिले।

'काला दिवस' बनाम 'सम्मान का दिन': राजनीतिक विवाद

कुछ राजनीतिक दलों द्वारा 5 अगस्त को 'काला दिवस' के रूप में मनाए जाने के सवाल पर लांबा राम गांधी ने कहा कि यह उन दलों की व्यक्तिगत सोच हो सकती है, लेकिन उनका समुदाय इससे सहमत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल वोट बैंक की राजनीति के तहत लोगों को यह कहकर गुमराह कर रहे हैं कि आर्टिकल 370 और 35ए को दोबारा लागू कराया जाएगा, जबकि उन्हें स्वयं भी पता है कि ऐसा संभव नहीं है।

समुदाय के एक अन्य सदस्य रोमेश कुमार ने कहा कि ऐसे बयानों से उनके समुदाय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। उनके लिए 5 अगस्त सम्मान और खुशी का दिन है, और समुदाय इसे ढोल-नगाड़ों और उत्सव के माहौल में मनाएगा।

75 साल का इंतज़ार: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब 5 अगस्त 2019 को भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने को छह वर्ष पूरे हो रहे हैं। गौरतलब है कि पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी समुदाय 1947 के विभाजन के बाद से जम्मू-कश्मीर में बसा हुआ था, लेकिन तत्कालीन राज्य के विशेष दर्जे के कारण उन्हें स्थायी निवासी प्रमाण-पत्र, मताधिकार और सरकारी नौकरियों जैसे अधिकारों से वंचित रखा गया था। आर्टिकल 370 और 35ए के निरस्त होने के बाद इस समुदाय को ये अधिकार मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

आगे क्या

5 अगस्त 2025 को सांबा जिले में वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी एक्शन कमेटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में समुदाय के बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। समुदाय के नेताओं ने संकेत दिया है कि यह परंपरा आने वाले वर्षों में भी जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह भी ध्यान देने योग्य है कि अधिकारों की घोषणा और उनके ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच का अंतर अभी भी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है। रोज़गार और नागरिकता लाभों के दावों की पुष्टि के लिए सरकारी आँकड़े सार्वजनिक नहीं हैं, जो इस उत्सव की भावनात्मक सच्चाई के साथ-साथ एक खुला सवाल भी छोड़ता है।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी 5 अगस्त क्यों मनाते हैं?
5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 और 35ए हटाए गए थे, जिसके बाद पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी समुदाय को नागरिक अधिकार मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह समुदाय 1947 के विभाजन के बाद से जम्मू-कश्मीर में बसा था, लेकिन 35ए के कारण स्थायी निवासी प्रमाण-पत्र और अन्य अधिकारों से वंचित था।
वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी एक्शन कमेटी क्या है?
यह सांबा जिले में पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली एक संस्था है। इसके अध्यक्ष लांबा राम गांधी हैं, जो समुदाय के अधिकारों और हितों के लिए आवाज़ उठाते रहे हैं।
आर्टिकल 370 हटने से पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों को क्या फ़ायदा हुआ?
समुदाय के सदस्यों के अनुसार, आर्टिकल 370 और 35ए हटने के बाद उन्हें नागरिकता, मताधिकार और रोज़गार के अवसरों का रास्ता मिला, जो पहले बंद था। हालाँकि, इन लाभों के विस्तृत सरकारी आँकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
5 अगस्त को 'काला दिवस' कौन मनाता है और समुदाय की क्या प्रतिक्रिया है?
कुछ राजनीतिक दल 5 अगस्त को 'काला दिवस' के रूप में मनाते हैं। पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी समुदाय के नेताओं ने इसे वोट बैंक की राजनीति बताया है और कहा है कि ऐसे बयानों से उनके समुदाय पर कोई असर नहीं पड़ता।
इस वर्ष 5 अगस्त के उत्सव में क्या होगा?
वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजी एक्शन कमेटी ने सांबा जिले में 5 अगस्त 2025 के आयोजन की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। समुदाय ढोल-नगाड़ों और उत्सव के माहौल में यह दिन मनाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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