अनुच्छेद 370 हटने के बाद 'उम्मीद' SHG से जम्मू सीमावर्ती महिलाओं को मिली आर्थिक आज़ादी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने के बाद भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकटवर्ती गाँवों में 'उम्मीद' स्वयं-सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाओं के जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिले हैं। 5 अगस्त 2019 के संवैधानिक बदलाव के बाद से ये महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं और मसाले, मिर्च-आधारित उत्पाद तथा अन्य स्थानीय वस्तुएँ बड़े पैमाने पर तैयार कर रही हैं।
'उम्मीद' समूह और उसकी आर्थिक भूमिका
वर्तमान में इस समूह से लगभग दस महिलाएँ जुड़ी हुई हैं। समूह की प्रत्येक सदस्य महीने में लगभग ₹20,000 की कमाई कर रही है, और समूह की सालाना आय कई लाख रुपए तक पहुँच गई है। महिलाओं के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में उनका उत्पादन कार्य लगातार विस्तृत हुआ है। वे न केवल स्थानीय बाज़ारों में, बल्कि विभिन्न प्रदर्शनियों में भी अपने उत्पाद प्रस्तुत कर इलाके का नाम रोशन कर रही हैं।
सुषमा की कहानी: बदलाव की जीती-जागती मिसाल
समूह से जुड़ी महिला सुषमा ने बताया कि उनके जीवन में असली बदलाव 5 अगस्त 2019 के बाद आया। उन्होंने याद किया कि अनुच्छेद 370 और 35ए हटने से पहले वह अपनी बेटी के भविष्य के लिए 'लाडली योजना' का लाभ उठाना चाहती थीं, लेकिन तत्कालीन व्यवस्था में यह संभव नहीं हो पाया था। संवैधानिक बदलावों के बाद उन्हें यह लाभ मिल सका, जिसे उन्होंने एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
सुषमा ने यह भी कहा कि सीमा के निकट रहने वाले लोग अब पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और स्वतंत्र महसूस करते हैं। उनके अनुसार, 'उम्मीद' से और भी महिलाएँ जुड़ रही हैं और कई अन्य महिलाएँ इसका हिस्सा बनने के लिए उत्सुक हैं।
वोकल फॉर लोकल से जुड़ाव
महिलाओं ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'वोकल फॉर लोकल' पहल उन्हें निरंतर प्रेरित करती है। उनके अनुसार, 'उम्मीद' के माध्यम से वे स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की इस सोच में सक्रिय योगदान दे रही हैं। अन्य महिलाओं ने भी कहा कि समूह से जुड़कर वे अपने परिवारों की आर्थिक मदद कर पा रही हैं और उनके जीवनस्तर में सुधार आया है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में बदलता परिदृश्य
यह ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब सीमावर्ती इलाकों में विकास की रफ्तार को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 हटाने को 5 अगस्त 2024 को पाँच वर्ष पूरे हो चुके हैं, और इस अवधि में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का विस्तार जम्मू-कश्मीर तक हुआ है। 'उम्मीद' जैसे SHG कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें बाज़ार से जोड़ने का माध्यम बन रहे हैं।
आने वाले समय में समूह का विस्तार और अधिक महिलाओं को जोड़ने की योजना है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में महिला सशक्तीकरण की यह मुहिम और व्यापक रूप ले सके।