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6 अगस्त 2026 पंचांग: श्रावण कृष्ण अष्टमी पर भरणी नक्षत्र का संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल

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6 अगस्त 2026 पंचांग: श्रावण कृष्ण अष्टमी पर भरणी नक्षत्र का संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल

सारांश

6 अगस्त 2026 को श्रावण कृष्ण अष्टमी, भरणी नक्षत्र और गंड योग का त्रिवेणी संयोग बन रहा है। गुरुवार का दिन विष्णु-बृहस्पति पूजा के लिए श्रेष्ठ है, जबकि अभिजीत मुहूर्त (11:39–12:31) शुभ कार्यों के लिए सर्वोत्तम समय है।

मुख्य बातें

अष्टमी तिथि (श्रावण कृष्ण पक्ष) शाम 6:53 बजे तक, इसके बाद नवमी प्रारंभ।
भरणी नक्षत्र रात 8:14 बजे तक; गंड योग दोपहर 3:01 बजे तक प्रभावी।
शुभ अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:39 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक।
राहुकाल दोपहर 1:44–3:23 , गुलिक काल सुबह 8:46–10:25 , यमगंड काल सुबह 5:28–7:07 — इन अवधियों में महत्वपूर्ण कार्य न करने की परंपरागत सलाह।
दिशाशूल दक्षिण दिशा में; उचित उपाय के बाद ही दक्षिण यात्रा शुभ।
सूर्य कर्क राशि में, चंद्रमा मेष राशि में; सूर्योदय 5:28 व सूर्यास्त 6:41 बजे ।

श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर 6 अगस्त 2026, गुरुवार का दिन कई विशेष ज्योतिषीय संयोगों से भरा है। इस दिन भरणी नक्षत्र और गंड योग का प्रभाव रहेगा, जिससे दिन के अलग-अलग पहरों में शुभ-अशुभ समय का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि शाम 6:53 बजे तक रहेगी, जिसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी।

तिथि, नक्षत्र और ग्रह स्थिति

इस दिन सूर्य कर्क राशि में और चंद्रमा मेष राशि में स्थित रहेंगे। भरणी नक्षत्र रात 8:14 बजे तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में भरणी नक्षत्र को साहस, जिम्मेदारी और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। गंड योग दोपहर 3:01 बजे तक और बालव करण सुबह 7:49 बजे तक रहेगा।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र समय

पंचांग के अनुसार सूर्योदय सुबह 5:28 बजे और सूर्यास्त शाम 6:41 बजे होगा। चंद्रोदय रात 11:27 बजे और चंद्रास्त दोपहर 12:31 बजे रहेगा।

शुभ मुहूर्त — अभिजीत

यदि आप कोई नया और महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करना चाहते हैं, तो अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:39 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक का समय सर्वाधिक शुभ माना जाता है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में किए गए कार्य सफल होते हैं।

अशुभ काल — राहुकाल, गुलिक और यमगंड

परंपरागत मान्यताओं के अनुसार इन तीन कालों में नए या महत्वपूर्ण कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए:

राहुकाल: दोपहर 1:44 बजे से 3:23 बजे तक।
गुलिक काल: सुबह 8:46 बजे से 10:25 बजे तक।
यमगंड काल: सुबह 5:28 बजे से 7:07 बजे तक।

धार्मिक महत्व और दिशाशूल

गुरुवार होने के कारण यह दिन ज्ञान, शिक्षा, गुरु सम्मान और धार्मिक कार्यों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है। श्रद्धालु भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा करते हैं तथा पीले वस्त्र, चने की दाल और केले का दान शुभ फलदायी माना जाता है। श्रावण मास होने के कारण भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व है — शिवालयों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र जाप का विशेष आयोजन देखने को मिल सकता है। इस दिन दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेगा; यदि दक्षिण दिशा की यात्रा अनिवार्य हो, तो परंपरागत मान्यताओं के अनुसार उचित उपाय करके यात्रा करना शुभ माना जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि केवल धार्मिक औपचारिकता। श्रावण मास में ऐसी सामग्री की माँग कई गुना बढ़ जाती है, क्योंकि करोड़ों श्रद्धालु प्रतिदिन पूजा, व्रत और यात्रा की योजना पंचांग के आधार पर बनाते हैं। हालाँकि ज्योतिषीय मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार विवादित है, परंपरागत ज्ञान के रूप में इनका सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व निर्विवाद है। पाठकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि भौगोलिक स्थिति के अनुसार सूर्योदय-सूर्यास्त के समय में मामूली अंतर हो सकता है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

6 अगस्त 2026 को कौन-सी तिथि है?
6 अगस्त 2026 को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है, जो शाम 6:53 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
6 अगस्त 2026 का शुभ मुहूर्त कब है?
इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:39 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा, जिसे किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत के लिए सर्वाधिक शुभ माना जाता है।
6 अगस्त 2026 को राहुकाल किस समय है?
6 अगस्त 2026 को राहुकाल दोपहर 1:44 बजे से 3:23 बजे तक रहेगा। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में नए कार्य आरंभ नहीं करने चाहिए।
इस दिन कौन-सा नक्षत्र है और उसका क्या महत्व है?
6 अगस्त 2026 को भरणी नक्षत्र रात 8:14 बजे तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में भरणी नक्षत्र को साहस, जिम्मेदारी और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है।
श्रावण मास के गुरुवार को कौन-सी पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है?
श्रावण मास के गुरुवार को भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। इसके साथ ही श्रावण होने के कारण भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र जाप भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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