असम के कई जिलों में आबादी से ज़्यादा आधार नामांकन, CM हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया 'जनसांख्यिकीय साजिश'
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार, 17 जून को दावा किया कि राज्य के कुछ जिलों में आधार नामांकन की संख्या वहाँ की अनुमानित जनसंख्या से अधिक हो चुकी है। उन्होंने इसे एक सीमावर्ती राज्य के लिए 'बड़ी जनसांख्यिकीय साजिश' का संकेत बताते हुए तत्काल सतर्कता बरतने की ज़रूरत पर बल दिया।
मुख्यमंत्री का बयान और आरोप
मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, 'असम के कुछ जिलों में आधार नामांकन कुल आबादी से आगे निकल गया है, जो हमारे जैसे सीमावर्ती राज्य में एक बड़ी जनसांख्यिकीय साजिश की आशंका पैदा करता है।' उन्होंने एक ग्राफिक भी साझा किया जिसमें कुछ जिलों की आधार सैचुरेशन दर 100 प्रतिशत से अधिक दिखाई गई और इसे 'रेड फ्लैग' करार दिया गया।
कथित तौर पर इसका अर्थ यह है कि उन जिलों में अनुमानित जनसंख्या से अधिक आधार नंबर जारी किए जा चुके हैं — एक ऐसी स्थिति जिसे सरमा ने पहचान-सत्यापन व्यवस्था की गंभीर चूक बताया।
राज्य सरकार के उठाए गए कदम
मुख्यमंत्री ने बताया कि असम सरकार ने अयोग्य व्यक्तियों को आधार मिलने से रोकने के लिए पहले ही कई उपाय लागू किए हैं। उनके अनुसार, 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए आधार जारी करने की प्रक्रिया पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।
उन्होंने कहा, 'यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी अयोग्य व्यक्ति आधार प्राप्त न कर सके, हमने 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए आधार जारी करने की प्रक्रिया पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं।' सरकारी अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया है कि आधार नामांकन निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार ही किया जाना चाहिए, ताकि केवल पात्र निवासियों को ही यह पहचान-पत्र जारी हो।
सीमावर्ती ज़िलों में जनसांख्यिकीय चिंता का पृष्ठभूमि
यह बयान ऐसे समय आया है जब असम सरकार पहचान-संबंधी दस्तावेज़ों की जाँच प्रक्रिया को और सख्त बनाने तथा विशेष रूप से बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में सत्यापन तंत्र को मज़बूत करने की दिशा में काम कर रही है। राज्य सरकार लंबे समय से अवैध घुसपैठ और सीमावर्ती इलाकों में जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर चिंता जताती रही है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने सरकारी दस्तावेज़ों और कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के सत्यापन की प्रक्रिया को मज़बूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। यह पहली बार नहीं है जब असम में आधार नामांकन के आँकड़ों पर सवाल उठे हों — राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) प्रक्रिया के दौरान भी दस्तावेज़ सत्यापन को लेकर गंभीर विवाद सामने आए थे।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद असम में जनसंख्या आँकड़ों, आधार नामांकन के पैटर्न और पहचान-सत्यापन व्यवस्था को लेकर नई बहस छिड़ने की संभावना है। विशेष रूप से उन जिलों में, जहाँ आधार नामांकन कथित तौर पर अनुमानित आबादी के आँकड़े से अधिक हो चुका है, केंद्र और राज्य स्तर पर जाँच की माँग तेज़ हो सकती है।