AAP विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना की प्राथमिक सदस्यता निलंबित, स्कूल मुद्दा उठाने के कुछ घंटे बाद कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) ने 3 अक्टूबर 2026 को मौर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना की पार्टी की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी। यह अनुशासनात्मक कार्रवाई उस दिन हुई जब मैसरखाना ने फेसबुक लाइव के ज़रिए अपने क्षेत्र के सरकारी स्कूलों की दशा और शिक्षकों की कमी का मुद्दा सार्वजनिक रूप से उठाया था।
निलंबन का आधार क्या है
पार्टी की ओर से जारी आधिकारिक निलंबन पत्र में मैसरखाना पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता में लिप्त होने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा, पार्टी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने संगठन के खिलाफ गलत जानकारी फैलाई और उसकी छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की। निलंबन आदेश तत्काल प्रभाव से लागू बताया गया है।
फेसबुक लाइव से शुरू हुआ विवाद
निलंबन से कुछ घंटे पहले ही विधायक मैसरखाना ने फेसबुक लाइव के ज़रिए अपने विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं को लेकर खुलकर बात की थी। उन्होंने दावा किया कि उनके क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता की स्थिति चिंताजनक है। मैसरखाना ने यह भी कहा कि क्षेत्र की शिकायतों का समाधान नहीं हो रहा और उन्हें मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात का समय तक नहीं मिल पाया।
फेसबुक लाइव के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे भविष्य में भी अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़े मुद्दे उठाते रहेंगे।
पार्टी का पलटवार
AAP ने मैसरखाना के स्कूल संबंधी दावों को खारिज करते हुए कहा कि जिस स्कूल का विधायक ने उल्लेख किया था, वहाँ पहले से ही 25 शिक्षक कार्यरत हैं। पार्टी का तर्क है कि विधायक ने तथ्यों की जाँच किए बिना भ्रामक जानकारी जनता के बीच फैलाई, जिससे संगठन की साख को नुकसान हुआ।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विधायक के बयानों के बाद पंजाब की राजनीति में तत्काल प्रतिक्रिया देखी गई। विपक्षी नेताओं ने सरकारी स्कूलों की स्थिति और पार्टी नेतृत्व पर लगाए गए आरोपों को आधार बनाते हुए AAP सरकार को घेरना शुरू कर दिया। आलोचकों का कहना है कि यदि एक निर्वाचित विधायक ही मुख्यमंत्री से मिलने में असमर्थ है, तो आम नागरिक की बात कौन सुनेगा।
पृष्ठभूमि और आगे की राह
गौरतलब है कि सुखवीर सिंह मैसरखाना 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में AAP के टिकट पर मौर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे। यह ऐसे समय में आया है जब AAP पंजाब में अपनी सरकार की उपलब्धियों को लेकर लगातार प्रचार में जुटी है। पार्टी के भीतर से इस तरह की असहमति की आवाज़ें नेतृत्व के लिए असहज स्थिति पैदा करती हैं। अब यह देखना होगा कि मैसरखाना इस निलंबन को चुनौती देते हैं या पार्टी से अलग रास्ता अपनाते हैं।