अभिषेक बनर्जी के करीबी मैदुल इस्लाम गिरफ्तार, 2022 पंचायत उप-प्रमुख की संदिग्ध मौत से जुड़ा मामला
सारांश
मुख्य बातें
डायमंड हार्बर पुलिस ने मंगलवार, 16 जून 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शिक्षक विंग के प्रमुख नेता मैदुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया। मैदुल TMC महासचिव और डायमंड हार्बर लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी माने जाते हैं। दक्षिण 24 परगना जिले के नेत्रा इलाके में उनके घर से पहले हिरासत में लिया गया और बाद में औपचारिक रूप से गिरफ्तारी दर्ज की गई।
गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
सूत्रों के अनुसार, मैदुल इस्लाम की गिरफ्तारी 2022 में दक्षिण 24 परगना जिले की बोलसिद्धि कालीनगर ग्राम पंचायत के उप-प्रमुख देबब्रत भट्टाचार्य (उर्फ निमाई) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले से जुड़ी है। जाँच के दौरान पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला था, जिसमें मैदुल का नाम उल्लिखित था।
जाँच टीम के एक सदस्य ने कहा, 'हम मैदुल से पूछताछ करके मौत के रहस्य को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।' पुलिस का कहना है कि इस सुसाइड नोट के आधार पर ही मैदुल से पूछताछ ज़रूरी हो गई थी।
अभिषेक बनर्जी के ईडी दफ्तर दौरे से कनेक्शन
गौरतलब है कि सोमवार को जब अभिषेक बनर्जी कोलकाता के साल्टलेक स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर में स्कूल नौकरी घोटाले के संबंध में पूछताछ के लिए पहुँचे, तब मैदुल इस्लाम उनके साथ दफ्तर के गेट तक गए थे। इसके अगले ही दिन उनकी गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।
मैदुल की राजनीतिक पृष्ठभूमि
मैदुल इस्लाम पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — CPI(M) — के कार्यकर्ता थे। बाद में वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए और अल्प समय में ही अभिषेक बनर्जी के विश्वस्त सहयोगी के रूप में उभरे। वह TMC के शिक्षक विंग में अहम पद पर थे।
सोशल मीडिया पोस्ट और पुलिस कार्रवाई
गिरफ्तारी से एक दिन पहले सोमवार को मैदुल इस्लाम ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर दावा किया था कि स्पेशल टास्क फोर्स (STF) उन्हें परेशान कर रही है और उन्हें कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी लिखा कि वह हमेशा अभिषेक बनर्जी और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ खड़े रहेंगे।
अदालत में पेशी और आगे की कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद मैदुल इस्लाम को मंगलवार शाम दक्षिण 24 परगना की जिला अदालत में पेश किया जाना था। सरकारी वकील इस मामले में पुलिस कस्टडी की माँग करने वाले थे। यह मामला पश्चिम बंगाल में TMC के भीतरी राजनीतिक समीकरणों और पंचायत स्तर पर हिंसा की जाँच के व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।