JNU में अभाविप का प्रदर्शन: कांग्रेस सांसद अकोइजम की तत्काल गिरफ्तारी की माँग, पुतला दहन
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) इकाई ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर कांग्रेस सांसद एवं पूर्व जेएनयू प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम के विरुद्ध यौन उत्पीड़न के आरोपों के संबंध में उनकी तत्काल गिरफ्तारी की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और पुतला दहन किया। संगठन ने दिल्ली पुलिस से बिना किसी राजनीतिक दबाव के त्वरित एवं निष्पक्ष कार्रवाई की अपील की है।
मामले का पृष्ठभूमि
जेएनयू की आंतरिक समिति द्वारा छात्राओं की शिकायतों की जाँच के बाद अंगोमचा बिमोल अकोइजम को विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पद से बर्खास्त किया जा चुका है। इसके अलावा इस मामले में पुलिस में एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है। इसके बावजूद, अभाविप का आरोप है कि अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है, जो छात्राओं को न्याय मिलने में बाधा बन रहा है।
अभाविप की माँगें
अभाविप ने स्पष्ट माँग रखी है कि दिल्ली पुलिस किसी भी राजनीतिक दबाव की परवाह किए बिना कानून के अनुसार अकोइजम को तत्काल गिरफ्तार करे और मामले की निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करे। संगठन का यह भी कहना है कि किसी व्यक्ति का राजनीतिक पद, प्रभाव या संगठनात्मक निकटता उसे कानूनी जवाबदेही से नहीं बचा सकती।
कांग्रेस पर सवाल
अभाविप ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर कटाक्ष करते हुए कहा कि एक ओर पार्टी 'लड़की हूं लड़ सकती हूं' जैसे नारों के ज़रिये महिला अधिकारों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर अपने जनप्रतिनिधि से जुड़े इस गंभीर मामले में पार्टी की चुप्पी उसकी राजनीतिक मानसिकता पर सवाल खड़े करती है। संगठन के अनुसार, जब शैक्षणिक संस्थान कार्रवाई कर चुका हो और एफआईआर भी दर्ज हो, तब इस मामले को 'राजनीतिक विवाद' बताकर टालना उचित नहीं है।
नेताओं के वक्तव्य
जेएनयू अभाविप इकाई अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा, 'महिला सुरक्षा केवल नारों और भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कांग्रेस को महिला अधिकारों पर अपने सार्वजनिक रुख के अनुरूप अपने जनप्रतिनिधियों से जुड़े गंभीर मामलों पर भी स्पष्ट और जवाबदेह रुख अपनाना चाहिए। छात्राओं को न्याय मिलना चाहिए और किसी भी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण कानून के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए।'
जेएनयू अभाविप इकाई मंत्री प्रवीण कुमार पीयूष ने कहा, 'कांग्रेस को महिला अधिकारों पर अपने सार्वजनिक रुख के अनुरूप अपने जनप्रतिनिधियों से जुड़े गंभीर मामलों में भी जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय किसी राजनीतिक दल की छवि से बड़ा प्रश्न है।'
आगे क्या होगा
अभाविप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अकोइजम की गिरफ्तारी नहीं होती, संगठन अपना विरोध जारी रखेगा। गौरतलब है कि यह मामला केवल एक विश्वविद्यालय की आंतरिक समस्या नहीं रही — इसने राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक परिसरों में महिला सुरक्षा और राजनीतिक जवाबदेही पर बहस को पुनः जीवित कर दिया है। अब सबकी निगाहें दिल्ली पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।