अदाणी ग्रुप का 2030 तक 50 GW नवीकरणीय और 2035 तक 10 GW परमाणु ऊर्जा का महालक्ष्य: सागर अदाणी
सारांश
मुख्य बातें
अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी ने 27 जून 2026 को लंदन के साइंस म्यूजियम में घोषणा की कि अदाणी ग्रुप वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और 2035 तक 10 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस पैमाने और गति से काम करने का उद्देश्य दुनिया के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो में से एक तैयार करना है।
मुख्य घोषणाएँ और लक्ष्य
सागर अदाणी लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक के दौरान आयोजित पहले अदाणी ग्रीन एनर्जी डायलॉग में बोल रहे थे, जिसे AGEL और एनर्जी ट्रांजिशन्स कमीशन (ETC) की साझेदारी में आयोजित किया गया था। उन्होंने बताया कि समूह पंप्ड हाइड्रो और यूटिलिटी-स्केल बैटरी सहित बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में निवेश कर रहा है। साथ ही देश भर में ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार और हरित हाइड्रोजन इकोसिस्टम का विकास भी इस योजना का हिस्सा है।
उन्होंने कहा, 'हम यह सब ऐसे पैमाने और गति से कर रहे हैं, जैसा दुनिया ने शायद ही कभी देखा हो। क्योंकि छोटे-छोटे बदलाव अब पर्याप्त नहीं होंगे।'
भारत की ऊर्जा चुनौती
सागर अदाणी ने भारत की ऊर्जा ज़रूरतों को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 2024 में भारत ने कोयला, तेल, गैस, परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा सहित सभी स्रोतों से मिलाकर करीब 10,000 टेरावाट-घंटे ऊर्जा की खपत की। उनके अनुसार अगले दो दशकों में देश को लगभग 2,000 गीगावाट नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़नी होगी — एक ऐसी चुनौती जो सस्ती, सर्वसुलभ और स्वच्छ ऊर्जा पर आधारित हो।
यह ऐसे समय में आया है जब विकासशील देशों में करोड़ों लोग मध्यम वर्ग में शामिल हो रहे हैं और उनकी ऊर्जा माँग तेज़ी से बढ़ रही है। सागर अदाणी ने कहा, 'ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा की किफायती उपलब्धता और टिकाऊ ऊर्जा — यही आज दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती है।'
भू-राजनीतिक संकट और ऊर्जा सुरक्षा
उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों की वैश्विक घटनाओं ने हर देश को ऊर्जा सुरक्षा पर पुनर्विचार करने पर मजबूर किया है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने ऊर्जा की ज़रूरत को 'अस्तित्व की लड़ाई' बना दिया है। उनके अनुसार भारत को आयातित ऊर्जा पर निर्भरता घटाने के लिए हर क्षेत्र में तेज़ी से विद्युतीकरण करना होगा और घरेलू संसाधनों पर आधारित ऊर्जा व्यवस्था तैयार करनी होगी।
सागर अदाणी ने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य के लिए नवीकरणीय ऊर्जा, जलविद्युत, आधुनिक तापीय ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा — सभी उपलब्ध स्रोतों का व्यावहारिक उपयोग अनिवार्य है। उन्होंने कहा, 'मजबूत और बड़े पैमाने पर उपलब्ध बेसलोड बिजली के बिना यह लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है।'
सरकारी नीतियों की भूमिका
सागर अदाणी ने पिछले एक दशक में भारत सरकार द्वारा नियामकीय सुधारों, सार्वजनिक उपक्रमों को मजबूत करने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने की सराहना की। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढाँचे के विकास, नवीकरणीय क्षमता विस्तार, ट्रांसमिशन नेटवर्क को सुदृढ़ करने और दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देने जैसी पहलों ने उद्योग के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। उनके शब्दों में, 'सरकार की नीतियों में स्पष्टता और निरंतरता ने भारत की ऊर्जा व्यवस्था को अधिक मजबूत और लचीला बनाने में अहम भूमिका निभाई है।'
गौरतलब है कि अदाणी ग्रुप की यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के अपने वैश्विक प्रतिबद्धता लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और निजी क्षेत्र की भूमिका इस यात्रा में निर्णायक मानी जा रही है।