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अदाणी ग्रुप का 2030 तक 50 GW नवीकरणीय और 2035 तक 10 GW परमाणु ऊर्जा का महालक्ष्य: सागर अदाणी

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अदाणी ग्रुप का 2030 तक 50 GW नवीकरणीय और 2035 तक 10 GW परमाणु ऊर्जा का महालक्ष्य: सागर अदाणी

सारांश

अदाणी ग्रुप ने लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक में बड़ा ऐलान किया — 2030 तक 50 GW नवीकरणीय और 2035 तक 10 GW परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य। सागर अदाणी ने भारत की 2,000 GW नई क्षमता की ज़रूरत को रेखांकित करते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा अब अस्तित्व का सवाल बन चुकी है।

मुख्य बातें

अदाणी ग्रुप ने 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।
2035 तक 10 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता भी समूह की योजना में शामिल है।
भारत को अगले दो दशकों में लगभग 2,000 गीगावाट नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़नी होगी।
वर्ष 2024 में भारत की कुल ऊर्जा खपत करीब 10,000 टेरावाट-घंटे रही।
समूह पंप्ड हाइड्रो, यूटिलिटी-स्केल बैटरी, ट्रांसमिशन नेटवर्क विस्तार और हरित हाइड्रोजन इकोसिस्टम में भी निवेश कर रहा है।
यह घोषणा लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक के दौरान AGEL और ETC की साझेदारी में आयोजित पहले अदाणी ग्रीन एनर्जी डायलॉग में की गई।

अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी ने 27 जून 2026 को लंदन के साइंस म्यूजियम में घोषणा की कि अदाणी ग्रुप वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और 2035 तक 10 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस पैमाने और गति से काम करने का उद्देश्य दुनिया के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो में से एक तैयार करना है।

मुख्य घोषणाएँ और लक्ष्य

सागर अदाणी लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक के दौरान आयोजित पहले अदाणी ग्रीन एनर्जी डायलॉग में बोल रहे थे, जिसे AGEL और एनर्जी ट्रांजिशन्स कमीशन (ETC) की साझेदारी में आयोजित किया गया था। उन्होंने बताया कि समूह पंप्ड हाइड्रो और यूटिलिटी-स्केल बैटरी सहित बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में निवेश कर रहा है। साथ ही देश भर में ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार और हरित हाइड्रोजन इकोसिस्टम का विकास भी इस योजना का हिस्सा है।

उन्होंने कहा, 'हम यह सब ऐसे पैमाने और गति से कर रहे हैं, जैसा दुनिया ने शायद ही कभी देखा हो। क्योंकि छोटे-छोटे बदलाव अब पर्याप्त नहीं होंगे।'

भारत की ऊर्जा चुनौती

सागर अदाणी ने भारत की ऊर्जा ज़रूरतों को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 2024 में भारत ने कोयला, तेल, गैस, परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा सहित सभी स्रोतों से मिलाकर करीब 10,000 टेरावाट-घंटे ऊर्जा की खपत की। उनके अनुसार अगले दो दशकों में देश को लगभग 2,000 गीगावाट नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़नी होगी — एक ऐसी चुनौती जो सस्ती, सर्वसुलभ और स्वच्छ ऊर्जा पर आधारित हो।

यह ऐसे समय में आया है जब विकासशील देशों में करोड़ों लोग मध्यम वर्ग में शामिल हो रहे हैं और उनकी ऊर्जा माँग तेज़ी से बढ़ रही है। सागर अदाणी ने कहा, 'ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा की किफायती उपलब्धता और टिकाऊ ऊर्जा — यही आज दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती है।'

भू-राजनीतिक संकट और ऊर्जा सुरक्षा

उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों की वैश्विक घटनाओं ने हर देश को ऊर्जा सुरक्षा पर पुनर्विचार करने पर मजबूर किया है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने ऊर्जा की ज़रूरत को 'अस्तित्व की लड़ाई' बना दिया है। उनके अनुसार भारत को आयातित ऊर्जा पर निर्भरता घटाने के लिए हर क्षेत्र में तेज़ी से विद्युतीकरण करना होगा और घरेलू संसाधनों पर आधारित ऊर्जा व्यवस्था तैयार करनी होगी।

सागर अदाणी ने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य के लिए नवीकरणीय ऊर्जा, जलविद्युत, आधुनिक तापीय ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा — सभी उपलब्ध स्रोतों का व्यावहारिक उपयोग अनिवार्य है। उन्होंने कहा, 'मजबूत और बड़े पैमाने पर उपलब्ध बेसलोड बिजली के बिना यह लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है।'

सरकारी नीतियों की भूमिका

सागर अदाणी ने पिछले एक दशक में भारत सरकार द्वारा नियामकीय सुधारों, सार्वजनिक उपक्रमों को मजबूत करने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने की सराहना की। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढाँचे के विकास, नवीकरणीय क्षमता विस्तार, ट्रांसमिशन नेटवर्क को सुदृढ़ करने और दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देने जैसी पहलों ने उद्योग के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। उनके शब्दों में, 'सरकार की नीतियों में स्पष्टता और निरंतरता ने भारत की ऊर्जा व्यवस्था को अधिक मजबूत और लचीला बनाने में अहम भूमिका निभाई है।'

गौरतलब है कि अदाणी ग्रुप की यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के अपने वैश्विक प्रतिबद्धता लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और निजी क्षेत्र की भूमिका इस यात्रा में निर्णायक मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इन्हें उस व्यापक संदर्भ में देखना ज़रूरी है जिसमें भारत का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र नीतिगत समर्थन के बावजूद भूमि अधिग्रहण, ग्रिड एकीकरण और वित्तपोषण की चुनौतियों से जूझता रहा है। 50 GW का नवीकरणीय लक्ष्य भारत की कुल 500 GW की 2030 महत्वाकांक्षा का दसवाँ हिस्सा है — यानी एक निजी समूह की हिस्सेदारी असाधारण रूप से बड़ी होगी। परमाणु ऊर्जा के मोर्चे पर 10 GW का लक्ष्य और भी जटिल है, क्योंकि भारत में परमाणु संयंत्रों की स्थापना परंपरागत रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकार-क्षेत्र में रही है और नियामकीय ढाँचा अभी भी विकसित हो रहा है। बिना समयबद्ध निष्पादन रोडमैप और स्वतंत्र सत्यापन के, ये घोषणाएँ दृष्टिकोण से अधिक आकांक्षा की श्रेणी में रह सकती हैं।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अदाणी ग्रुप का 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य क्या है?
अदाणी ग्रुप ने वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। यह घोषणा AGEL के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी ने 27 जून 2026 को लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक में की।
अदाणी ग्रुप की परमाणु ऊर्जा योजना क्या है?
अदाणी ग्रुप ने 2035 तक 10 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। यह नवीकरणीय ऊर्जा के साथ-साथ बेसलोड बिजली सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
भारत को अगले दो दशकों में कितनी नई बिजली क्षमता चाहिए?
सागर अदाणी के अनुसार भारत को अगले दो दशकों में लगभग 2,000 गीगावाट नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़नी होगी। यह क्षमता सस्ती, सर्वसुलभ और अधिकतम स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर आधारित होनी चाहिए।
अदाणी ग्रीन एनर्जी डायलॉग क्या है और यह कहाँ हुआ?
पहला अदाणी ग्रीन एनर्जी डायलॉग लंदन के साइंस म्यूजियम में लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक के दौरान आयोजित हुआ। यह AGEL और एनर्जी ट्रांजिशन्स कमीशन (ETC) की साझेदारी में आयोजित किया गया था।
अदाणी ग्रुप ऊर्जा भंडारण और हरित हाइड्रोजन में क्या कर रहा है?
समूह पंप्ड हाइड्रो और यूटिलिटी-स्केल बैटरी सहित बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में निवेश कर रहा है। साथ ही देश भर में ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार और हरित हाइड्रोजन इकोसिस्टम का विकास भी इस योजना का अभिन्न हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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