अडानी पोर्ट्स का मुंद्रा में डेडिकेटेड एम्प्टी कंटेनर यार्ड, 5 साल में 60 लाख TEU क्षमता जोड़ने का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) ने 4 सितंबर 2026 को घोषणा की कि वह मुंद्रा पोर्ट पर एक समर्पित एम्प्टी कंटेनर यार्ड (ECY) और एकीकृत वेयरहाउसिंग सुविधा का संचालन शुरू कर रहा है, जो खाली कंटेनरों के पूरे जीवनचक्र — भंडारण, रखरखाव, निरीक्षण और निर्यातकों तक आवाजाही — के लिए एंड-टू-एंड सेवाएँ देगी। यह पहल कंपनी की 'एंबिशन 2031' रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत अगले पाँच वर्षों में नेटवर्क में 60 लाख TEU से अधिक कंटेनर हैंडलिंग क्षमता जोड़ने की योजना है।
मुख्य घटनाक्रम
APSEZ के अनुसार, मुंद्रा पोर्ट पर प्रतिवर्ष लगभग 16 लाख TEU खाली कंटेनरों का प्रबंधन किया जाता है। नया ECY इन कंटेनरों की टर्नअराउंड टाइम घटाएगा, अनावश्यक आवाजाही कम करेगा और लॉजिस्टिक्स लागत का अनुकूलन करेगा। यार्ड का संचालन APSEZ और/या उसके साझेदार — जिनमें कंटेनर फ्रेट स्टेशन (CFS) और शिपिंग लाइनें शामिल हैं — मिलकर करेंगे।
APSEZ के CEO का बयान
APSEZ के पूर्णकालिक निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अश्विनी गुप्ता ने कहा, 'मुंद्रा में स्थापित किया जा रहा समर्पित एम्प्टी कंटेनर यार्ड कंटेनर इकोसिस्टम में दक्षता बढ़ाएगा। इससे कंटेनरों की टर्नअराउंड टाइम कम होगी, अनावश्यक आवाजाही घटेगी और लॉजिस्टिक्स लागत का बेहतर अनुकूलन हो सकेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार सुगमता से जुड़ा बुनियादी ढाँचा मज़बूत करना APSEZ की प्राथमिकता है, जो 'विकसित भारत' के लक्ष्य को समर्थन देने की कंपनी की प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
बाज़ार में APSEZ की स्थिति
वित्त वर्ष 2025-26 तक भारत के कंटेनर बाज़ार में APSEZ की हिस्सेदारी 45.5% है। इनमें अकेले मुंद्रा पोर्ट देश के लगभग 35% कंटेनर व्यापार को संभालता है, जिससे यह भारत का सबसे बड़ा कंटेनर-हैंडलिंग बंदरगाह बना हुआ है। कंपनी वर्तमान में 16 रणनीतिक बंदरगाहों और टर्मिनलों का संचालन करती है और उसके पास 136 जहाज़ों का विविध समुद्री बेड़ा है।
आम जनता और उद्योग पर असर
यह पहल भारत की आयात-निर्यात आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक सुचारु बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। गौरतलब है कि APSEZ की कार्गो हैंडलिंग क्षमता वर्तमान में 653 मिलियन टन प्रतिवर्ष है और भारत के कुल बंदरगाह कार्गो वॉल्यूम में इसकी हिस्सेदारी करीब 27% है। कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 1 बिलियन टन थ्रूपुट हासिल करना है। यह विस्तार सरकार की प्रौद्योगिकी-सक्षम लॉजिस्टिक्स नीति और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस के एजेंडे के अनुरूप बताया जा रहा है।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी भूमिका विस्तारित करने की कोशिश कर रहा है। ECY के पूर्ण संचालन से मुंद्रा के निर्यातकों और CFS ऑपरेटरों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। APSEZ की 'एंबिशन 2031' रणनीति के तहत आने वाले वर्षों में और भी बड़े बुनियादी ढाँचे निवेश की संभावना है।