23 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ADB ने भारत की GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 7% किया, सरकारी निवेश और निर्यात बने आधार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ADB ने भारत की GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 7% किया, सरकारी निवेश और निर्यात बने आधार

सारांश

ADB ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 7% किया — मजबूत सरकारी निवेश और AI-प्रेरित तकनीकी निर्यात इसकी बुनियाद हैं। लेकिन अल नीनो और भू-राजनीतिक तनाव दो बड़े जोखिम हैं जो इस तेज़ी पर पानी फेर सकते हैं।

मुख्य बातें

ADB ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 7.0% किया — संशोधन 40 आधार अंकों का।
दक्षिण एशिया की समग्र वृद्धि का अनुमान 6.0% से बढ़ाकर 6.4% किया गया, जिसमें भारत की भूमिका केंद्रीय।
विकासशील एशिया-प्रशांत क्षेत्र की वृद्धि 2025 के 5.5% से घटकर 2026 में 5.0% रहने का अनुमान।
क्षेत्रीय महंगाई का अनुमान 4.3% से घटाकर 4.2% किया गया।
ADB अध्यक्ष मासातो कांडा ने अल नीनो और मध्य पूर्व संघर्ष को प्रमुख जोखिम बताया।
AI कंपनियों के शेयर मूल्यांकन में गिरावट और व्यापार नीति की अनिश्चितता को वृद्धि के लिए नकारात्मक जोखिम बताया गया।

एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने 23 सितंबर 2026 को जारी अपनी रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान संशोधित कर 7.0 प्रतिशत कर दिया है — जो बैंक के पहले के 6.6 प्रतिशत के अनुमान से 40 आधार अंक अधिक है। इस उर्ध्वगामी संशोधन के पीछे मजबूत सरकारी पूंजीगत व्यय और वैश्विक एआई निवेश चक्र से प्रेरित तकनीकी निर्यात में ठोस बढ़ोतरी को प्रमुख कारण बताया गया है।

संशोधित अनुमान: मुख्य आँकड़े

एशियन डेवलपमेंट आउटलुक (ADO) सितंबर 2026 के अनुसार, दक्षिण एशिया के लिए समग्र आर्थिक वृद्धि का अनुमान भी जुलाई के 6.0 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत किया गया है, जिसमें भारत की भूमिका निर्णायक बताई गई है। वहीं, व्यापक विकासशील एशिया और प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि 2025 के 5.5 प्रतिशत से घटकर 2026 में 5.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो 2027 में मामूली बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो सकती है।

क्षेत्रीय महंगाई का अनुमान भी 2026 के लिए जुलाई के 4.3 प्रतिशत से घटाकर 4.2 प्रतिशत किया गया है। ADB के अनुसार, कीमतों को स्थिर रखने के सरकारी उपायों ने ऊर्जा की ऊंची कीमतों के प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित किया है।

वृद्धि को समर्थन देने वाले कारक

ADB ने रेखांकित किया कि भारत में मजबूत सार्वजनिक निवेश, सरकार के राजकोषीय प्रोत्साहन और वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) निवेश लहर से उपजी तकनीकी निर्यात माँग आर्थिक गति को बनाए रख रही है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बीच अनेक उभरती अर्थव्यवस्थाएँ धीमी पड़ रही हैं।

गौरतलब है कि ADB की यह रिपोर्ट विश्व बैंक और आईएमएफ जैसी संस्थाओं की हालिया भारत-केंद्रित सकारात्मक समीक्षाओं के अनुरूप है, जो भारत को वैश्विक विकास के एक स्थिर स्तंभ के रूप में देखती हैं।

प्रमुख जोखिम और चेतावनियाँ

ADB अध्यक्ष मासातो कांडा ने कहा, 'क्षेत्र लचीला बना हुआ है, लेकिन जोखिम बढ़ रहे हैं।' रिपोर्ट में दो प्रमुख जोखिमों की पहचान की गई है। पहला, मध्य पूर्व में संघर्ष का विस्तार और रूस-यूक्रेन युद्ध का तीव्र होना, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतें ऊंची और अस्थिर बनी रह सकती हैं। दूसरा, प्रबल होता अल नीनो, जिसके 2027 की पहली तिमाही तक बने रहने का अनुमान है।

अल नीनो के चलते कृषि उत्पादन घट सकता है, जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हो सकता है और खाद्य तथा ऊर्जा की कीमतों में उछाल आ सकता है। कांडा के अनुसार, इसका सबसे अधिक असर समाज के सबसे कमजोर तबकों पर पड़ने की आशंका है, इसलिए सरकारों को इन वर्गों की सुरक्षा और तैयारी को प्राथमिकता देनी होगी।

वित्तीय बाज़ार और व्यापार नीति के जोखिम

रिपोर्ट में यह भी चेताया गया है कि AI से जुड़ी कंपनियों के शेयर मूल्यांकन में तेज सुधार, वित्तीय बाजारों में सख्त होती परिस्थितियाँ और व्यापार नीति को लेकर फिर से बढ़ती अनिश्चितता भी आर्थिक वृद्धि के लिए नकारात्मक जोखिम पैदा कर सकती है। ADB ने कहा कि वह इन चुनौतियों से निपटने के सरकारी प्रयासों का पूरा समर्थन करता रहेगा।

आने वाले महीनों में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर, निर्यात के आँकड़े और मानसून की स्थिति यह तय करेगी कि ADB का यह आशावादी अनुमान ज़मीन पर कितना सटीक उतरता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे सतर्कता से पढ़ना ज़रूरी है — क्योंकि 7% का अनुमान काफी हद तक सरकारी पूंजीगत व्यय पर टिका है, जो एक चक्रीय चालक है, न कि संरचनात्मक सुधार। निजी निवेश और रोज़गार-सृजन के आँकड़े अभी भी उस गति से नहीं बढ़ रहे जो दीर्घकालिक 7%+ वृद्धि के लिए ज़रूरी है। अल नीनो की चेतावनी को महज़ एक परिशिष्ट नहीं समझना चाहिए — कृषि क्षेत्र और ग्रामीण माँग पर इसका असर उन करोड़ों भारतीयों को प्रभावित करेगा जो जीडीपी के आँकड़ों की चमक से बाहर हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह वृद्धि समावेशी है — और इसका जवाब अभी अधूरा है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ADB ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान क्यों बढ़ाया?
ADB ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 7.0% किया है, जिसके पीछे मजबूत सरकारी पूंजीगत निवेश और वैश्विक AI निवेश चक्र से उपजी तकनीकी निर्यात वृद्धि प्रमुख कारण हैं। यह संशोधन 23 सितंबर 2026 को जारी एशियन डेवलपमेंट आउटलुक रिपोर्ट में किया गया।
ADB के अनुसार भारत की GDP ग्रोथ 2026 में कितनी रहेगी?
ADB के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP वृद्धि दर 7.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पहले के 6.6 प्रतिशत के अनुमान से 40 आधार अंक अधिक है।
ADB रिपोर्ट में भारत के लिए क्या जोखिम बताए गए हैं?
ADB ने दो प्रमुख जोखिमों की पहचान की है — पहला, मध्य पूर्व और रूस-यूक्रेन संघर्ष के चलते ऊंची वैश्विक ऊर्जा कीमतें; और दूसरा, प्रबल होता अल नीनो जो 2027 की पहली तिमाही तक बने रहने का अनुमान है। इससे कृषि उत्पादन और जलविद्युत पर दबाव पड़ सकता है।
दक्षिण एशिया और विकासशील एशिया के लिए ADB का क्या अनुमान है?
दक्षिण एशिया की वृद्धि का अनुमान जुलाई के 6.0% से बढ़ाकर 6.4% किया गया है। वहीं, व्यापक विकासशील एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए 2026 में 5.0% और 2027 में 5.1% वृद्धि का अनुमान है, जो 2025 के 5.5% से कम है।
ADB ने क्षेत्रीय महंगाई के बारे में क्या कहा?
ADB ने 2026 के लिए क्षेत्रीय महंगाई का अनुमान जुलाई के 4.3% से घटाकर 4.2% किया है। बैंक का कहना है कि कीमतों को स्थिर करने के सरकारी उपायों ने लगातार ऊंची ऊर्जा कीमतों के प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित किया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले