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भारत में सस्ते पॉइंट-ऑफ-केयर HPV टेस्ट से सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग को मिलेगी नई रफ्तार

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भारत में सस्ते पॉइंट-ऑफ-केयर HPV टेस्ट से सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग को मिलेगी नई रफ्तार

सारांश

भारत में हर साल 1,27,000 सर्वाइकल कैंसर के मामले और 80,000 मौतें — फिर भी स्क्रीनिंग की पहुँच सीमित। अब ICMR और WHO-IARC के सहयोग से हुए शोध में सस्ते पॉइंट-ऑफ-केयर HPV टेस्ट को राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए उपयुक्त पाया गया है, जो ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुँच को बदल सकता है।

मुख्य बातें

भारत में हर साल लगभग 1,27,000 नए सर्वाइकल कैंसर के मामले और करीब 80,000 महिलाओं की मृत्यु दर्ज होती है।
नए शोध में चार पॉइंट-ऑफ-केयर HPV टेस्टों में से दो को राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए उपयुक्त पाया गया।
WHO की सिफारिश के अनुसार 35 और 45 वर्ष की उम्र में दो बार HPV जाँच पर्याप्त हो सकती है।
यह अध्ययन एम्स दिल्ली , आईसीएमआर-एनआईसीपीआर , आईसीएमआर-एनआईआरआरसीएच और WHO-IARC फ्रांस के सहयोग से किया गया।
नई तकनीक जिला और ब्लॉक स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों में एक ही दिन में जाँच और उपचार संभव बनाती है।
भविष्य में सेल्फ-सैंपलिंग तकनीक से स्क्रीनिंग को और सुलभ बनाने की संभावना है।

भारत में सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग को व्यापक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शोध सामने आया है, जिसमें सस्ते और सुलभ पॉइंट-ऑफ-केयर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) टेस्ट की उपयोगिता को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर परखा गया है। देश में हर साल लगभग 1,27,000 नए सर्वाइकल कैंसर के मामले दर्ज होते हैं और करीब 80,000 महिलाओं की इस बीमारी से मृत्यु हो जाती है — यह आँकड़ा इस शोध की तात्कालिकता को रेखांकित करता है। अध्ययन में चार नए पॉइंट-ऑफ-केयर HPV टेस्टों में से दो को राष्ट्रीय कार्यक्रम में उपयोग के लिए उपयुक्त पाया गया है।

शोध का दायरा और भागीदार संस्थान

यह अध्ययन भारत के कई प्रमुख संस्थानों के सहयोग से किया गया, जिनमें ईएमएस दिल्ली, आईसीएमआर-एनआईसीपीआर नोएडा, आईसीएमआर-एनआईआरआरसीएच मुंबई और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की अंतरराष्ट्रीय एजेंसी आईएआरसी (IARC), फ्रांस शामिल हैं। इस शोध का मुख्य उद्देश्य भारत में निर्मित HPV टेस्टों की गुणवत्ता और व्यावहारिक उपयोगिता को WHO के मानकों के अनुसार जाँचना था।

गौरतलब है कि अब तक भारत में कई HPV टेस्ट विकसित हुए थे, परंतु उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार व्यापक रूप से परखा नहीं गया था। यह पहली बार है जब ऐसा व्यवस्थित मूल्यांकन किया गया।

सर्वाइकल कैंसर और HPV स्क्रीनिंग की ज़रूरत

सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) का लगातार संक्रमण है। WHO की सिफारिश के अनुसार, यदि सही HPV परीक्षण उपलब्ध हों, तो 35 और 45 वर्ष की उम्र में केवल दो बार स्क्रीनिंग पर्याप्त हो सकती है। फिलहाल राष्ट्रीय कार्यक्रम में 'विजुअल इंस्पेक्शन विद एसीटिक एसिड' (VIA) जाँच शामिल है, लेकिन इसकी पहुँच सीमित बनी हुई है।

यह ऐसे समय में आया है जब 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए 3–5 साल के अंतराल पर नियमित जाँच को ज़रूरी माना जाता है, फिर भी देश में स्क्रीनिंग का दायरा बेहद कम है।

विशेषज्ञों की राय

एम्स की प्रोफेसर डॉ. नीरजा भाटला ने कहा कि यह पहली बार है जब WHO के मानकों के अनुसार भारत में निर्मित HPV टेस्टों का मूल्यांकन किया गया है। उन्होंने ज़ोर दिया कि ऐसे टेस्ट विकसित किए जाने चाहिए जो कम लागत में, कम संसाधनों वाले स्वास्थ्य केंद्रों में भी सुगमता से उपयोग किए जा सकें।

आईसीएमआर-एनआईसीपीआर की निदेशक डॉ. शालिनी सिंह के अनुसार, 35 और 45 वर्ष की उम्र में HPV जाँच WHO की रणनीति का केंद्रीय हिस्सा है, लेकिन महँगे टेस्ट इसे बड़े पैमाने पर लागू करने में बाधा बनते हैं। उन्होंने सस्ते और स्थानीय समाधानों की अनिवार्यता पर बल दिया।

शोधकर्ता डॉ. शोकेत हुसैन ने बताया कि यह नई तकनीक जिला और ब्लॉक स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों में आसानी से इस्तेमाल की जा सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में सेल्फ-सैंपलिंग तकनीक के ज़रिये इसे और सुलभ बनाया जा सकता है।

आम जनता और स्वास्थ्य तंत्र पर असर

पॉइंट-ऑफ-केयर HPV टेस्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनसे एक ही दिन में जाँच और ज़रूरत पड़ने पर प्रारंभिक उपचार भी संभव है। यह दूरदराज के इलाकों में रहने वाली महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जहाँ उन्नत प्रयोगशाला सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं।

HPV वैक्सीन से नई पीढ़ी को सुरक्षा मिलेगी, लेकिन 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए नियमित HPV जाँच अभी भी अपरिहार्य है। यह शोध भारत के सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन लक्ष्य को गति देने के साथ-साथ अन्य विकासशील देशों के लिए भी एक व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन टेस्टों को राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल करने की समयसीमा और वित्त पोषण का खाका कब तैयार होगा। भारत में स्वास्थ्य नवाचार और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई बार-बार देखी गई है — VIA जाँच दशकों से कार्यक्रम में है, फिर भी स्क्रीनिंग दर निराशाजनक बनी हुई है। 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं की विशाल संख्या और सीमित स्वास्थ्य ढाँचे को देखते हुए, सस्ते पॉइंट-ऑफ-केयर टेस्ट केवल तभी परिवर्तनकारी साबित होंगे जब इन्हें सेल्फ-सैंपलिंग और सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मियों के नेटवर्क से जोड़ा जाए — जो अभी तक इस शोध के दायरे से बाहर है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पॉइंट-ऑफ-केयर HPV टेस्ट क्या है और यह सामान्य HPV टेस्ट से कैसे अलग है?
पॉइंट-ऑफ-केयर HPV टेस्ट एक सस्ती और सरल तकनीक है जिसे उन्नत प्रयोगशाला के बिना, जिला या ब्लॉक स्तर के स्वास्थ्य केंद्र में भी किया जा सकता है। सामान्य HPV टेस्टों के विपरीत, इनसे एक ही दिन में जाँच और ज़रूरत पड़ने पर प्रारंभिक उपचार भी संभव है।
भारत में सर्वाइकल कैंसर की स्थिति कितनी गंभीर है?
भारत में हर साल लगभग 1,27,000 नए सर्वाइकल कैंसर के मामले सामने आते हैं और करीब 80,000 महिलाओं की इस बीमारी से मृत्यु होती है। 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में नियमित स्क्रीनिंग की दर बेहद कम होना इस समस्या को और गंभीर बनाता है।
WHO की HPV स्क्रीनिंग रणनीति क्या कहती है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश है कि यदि सही HPV परीक्षण उपलब्ध हों, तो 35 और 45 वर्ष की उम्र में केवल दो बार स्क्रीनिंग पर्याप्त हो सकती है। WHO ने HPV टेस्टिंग को सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन का सबसे प्रभावी तरीका बताया है।
यह शोध किन संस्थानों ने मिलकर किया और इसका निष्कर्ष क्या रहा?
यह अध्ययन एम्स दिल्ली, आईसीएमआर-एनआईसीपीआर नोएडा, आईसीएमआर-एनआईआरआरसीएच मुंबई और WHO की अंतरराष्ट्रीय एजेंसी IARC (फ्रांस) के सहयोग से किया गया। इसमें चार नए पॉइंट-ऑफ-केयर HPV टेस्टों में से दो को राष्ट्रीय कार्यक्रम में उपयोग के लिए उपयुक्त पाया गया।
क्या HPV वैक्सीन के बाद भी स्क्रीनिंग ज़रूरी है?
हाँ, HPV वैक्सीन नई पीढ़ी को सुरक्षा देती है, लेकिन 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए नियमित HPV जाँच अभी भी अनिवार्य है। वैक्सीन उन महिलाओं को पहले से हुए HPV संक्रमण से सुरक्षित नहीं करती, इसलिए स्क्रीनिंग कार्यक्रम समानांतर रूप से चलाना ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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