21 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अहमदाबाद के सरकारी स्कूलों में 4,817 बच्चों ने छोड़ा प्राइवेट स्कूल, थलतेज शाला-2 बनी मिसाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अहमदाबाद के सरकारी स्कूलों में 4,817 बच्चों ने छोड़ा प्राइवेट स्कूल, थलतेज शाला-2 बनी मिसाल

सारांश

अहमदाबाद में सरकारी स्कूल अब प्राइवेट स्कूलों से बेहतर माने जाने लगे हैं। 11 वर्षों में 60,000 से अधिक बच्चों का निजी से सरकारी स्कूलों की ओर रुख — रोबोटिक्स लैब, स्मार्ट बोर्ड और मुफ्त भोजन इस बदलाव की वजह बन रहे हैं।

मुख्य बातें

अहमदाबाद जिले में शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में 4,817 छात्रों ने निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया।
पिछले 11 वर्षों में 60,000 से अधिक बच्चों ने अहमदाबाद के बड़े प्राइवेट स्कूल छोड़कर नगर निगम के सरकारी स्कूलों को चुना।
थलतेज प्राथमिक शाला-2 में स्मार्ट क्लासरूम, रोबोटिक्स लैब, साइंस लैब, गणित लैब, फ्यूचर लैब और स्मार्ट लाइब्रेरी उपलब्ध हैं।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में 'मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस' के तहत राज्य में सरकारी स्कूलों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।
बच्चों को स्कूल में सुबह दूध, नाश्ता और भोजन के साथ-साथ खेलकूद की सुविधाएँ और संगीत उपकरण भी मुहैया कराए जाते हैं।

अहमदाबाद के थलतेज प्राथमिक शाला-2 में स्मार्ट क्लासरूम, रोबोटिक्स लैब और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ देखकर यह स्पष्ट होता है कि गुजरात सरकार सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कितनी गंभीरता से काम कर रही है। शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में अकेले अहमदाबाद जिले में 4,817 छात्र-छात्राओं ने निजी स्कूल छोड़कर नगर निगम के सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है। पिछले 11 वर्षों में यह संख्या 60,000 से अधिक हो चुकी है।

मुख्य सुविधाएँ और बुनियादी ढाँचा

थलतेज प्राथमिक शाला-2 में गूगल-फीचर्ड क्लासरूम, स्मार्ट लाइब्रेरी, गणित लैब, विज्ञान लैब, फ्यूचर लैब और रोबोटिक्स लैब स्थापित की गई हैं। विद्यालय के प्रत्येक कक्ष में स्मार्ट बोर्ड के माध्यम से पठन-पाठन कराया जाता है। इसके अलावा छात्रों को सुबह दूध, नाश्ता और पोषण-युक्त भोजन भी प्रदान किया जाता है।

स्कूल के प्राचार्य चिराग जोशी ने बताया कि 'गूगल फीचर क्लासरूम, स्मार्ट लाइब्रेरी, गणित-विज्ञान की लैब और रोबोटिक्स लैब — ये सभी सुविधाएँ इस विद्यालय में उपलब्ध हैं। सभी कक्षाओं में स्मार्ट बोर्ड के माध्यम से शिक्षण कार्य कराया जाता है।'

छात्रों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया

छात्रा ऐंजल दुबे ने कहा, 'यहाँ साइंस लैब है। साइंस लैब में हमारे लिए कुछ मॉडल्स भी बनाए गए हैं। इनसे हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है।' वहीं छात्र वंश चौहान ने कहा, 'यहाँ बहुत अच्छी पढ़ाई होती है और बहुत अच्छी सुविधाएँ हैं — साइंस लैब, मैथ्स लैब, फ्यूचर लैब और रोबोटिक लैब।'

अभिभावक सुंदराबेन ने बताया, 'इस स्कूल में एक बड़ा मैदान है, स्पोर्ट्स का सामान है, म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स हैं। बच्चों को सुबह दूध दिया जाता है, फिर नाश्ता और खाना भी बहुत अच्छा मिलता है।' यह उत्साह इस बात का प्रमाण है कि अभिभावकों का भरोसा अब सरकारी स्कूलों की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की भूमिका

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में शुरू की गई 'मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस' पहल के तहत राज्य भर के सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा सुनिश्चित की जा रही है। गौरतलब है कि इस मिशन ने न केवल शिक्षा के बुनियादी ढाँचे को मज़बूत किया है, बल्कि पाठ्यक्रम और खेलकूद सुविधाओं में भी उल्लेखनीय सुधार किए हैं।

गुजरात की नई शिक्षा नीति के अनुसार विद्यालयों में खेलकूद की बेहतरीन सुविधाएँ भी विकसित की गई हैं, ताकि शैक्षणिक उत्कर्ष के साथ-साथ बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास भी सुनिश्चित हो सके।

आँकड़ों का संदेश

शिक्षा विभाग के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. एल. डी. देसाई ने बताया कि अभिभावक अहमदाबाद के प्रतिष्ठित निजी स्कूलों से लीविंग सर्टिफिकेट लेकर नगर निगम के सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों का दाखिला करा रहे हैं। पिछले 11 वर्षों में 60,000 से अधिक बच्चों ने बड़े निजी स्कूल छोड़कर नगर निगम के स्कूलों को अपनाया है। यह रुझान यह दिखाता है कि अहमदाबाद के सरकारी स्कूल अब केवल निम्न-आय वर्ग का विकल्प नहीं रहे।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में सरकारी और निजी स्कूलों के बीच गुणवत्ता की खाई को पाटने की माँग बढ़ रही है। अहमदाबाद का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक संभावित उदाहरण बन सकता है। आने वाले वर्षों में यदि यह रुझान बरकरार रहा, तो यह भारत में सार्वजनिक शिक्षा की प्रासंगिकता पर व्यापक बहस को नया मोड़ दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी पूछा जाना चाहिए कि क्या यह बदलाव राज्य के सभी जिलों में समान रूप से दिखता है या केवल शहरी-अर्ध शहरी पॉकेट तक सीमित है। 'मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस' जैसी पहलें तभी टिकाऊ होती हैं जब प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता और बुनियादी ढाँचे का रखरखाव सुनिश्चित हो — जो भारत के सरकारी स्कूल तंत्र की ऐतिहासिक कमज़ोरी रही है। 11 वर्षों में 60,000 का ट्रांसफर प्रभावशाली है, मगर अहमदाबाद की कुल छात्र संख्या के सापेक्ष यह प्रतिशत और संदर्भ भी उतना ही ज़रूरी है। इस मॉडल की असली कसौटी यह होगी कि ग्रामीण गुजरात और अन्य राज्य इसे किस हद तक दोहरा पाते हैं।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद में कितने बच्चों ने प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में एडमिशन लिया?
शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में अहमदाबाद जिले में 4,817 छात्रों ने निजी स्कूल छोड़कर नगर निगम के सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया। पिछले 11 वर्षों में यह संख्या 60,000 से अधिक हो चुकी है।
थलतेज प्राथमिक शाला-2 में क्या-क्या सुविधाएँ हैं?
थलतेज प्राथमिक शाला-2 में गूगल-फीचर्ड स्मार्ट क्लासरूम, स्मार्ट लाइब्रेरी, साइंस लैब, मैथ्स लैब, फ्यूचर लैब और रोबोटिक्स लैब मौजूद हैं। सभी कक्षाओं में स्मार्ट बोर्ड के ज़रिए पढ़ाई होती है और बच्चों को सुबह दूध, नाश्ता व भोजन भी दिया जाता है।
गुजरात में 'मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस' क्या है?
यह मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में शुरू की गई एक सरकारी पहल है, जिसके तहत राज्य के सरकारी स्कूलों में आधुनिक शिक्षा बुनियादी ढाँचा — स्मार्ट क्लासरूम, लैब और खेलकूद सुविधाएँ — विकसित की जा रही हैं। इसका लक्ष्य सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के बराबर गुणवत्ता का बनाना है।
अभिभावक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल से सरकारी स्कूल में क्यों भेज रहे हैं?
सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, रोबोटिक्स लैब, खेलकूद सुविधाएँ, संगीत उपकरण और मुफ्त भोजन की व्यवस्था अभिभावकों को आकर्षित कर रही है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के चलते अभिभावक महँगे निजी स्कूलों के बजाय सरकारी स्कूलों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
क्या यह बदलाव केवल अहमदाबाद तक सीमित है?
आँकड़े मुख्य रूप से अहमदाबाद जिले से संबंधित हैं, जहाँ 2025-26 में 4,817 और पिछले 11 वर्षों में 60,000 से अधिक छात्रों का ट्रांसफर दर्ज किया गया है। गुजरात सरकार के अनुसार 'मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस' पूरे राज्य में लागू है, हालाँकि अन्य जिलों के विस्तृत आँकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 4 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले