अहमदाबाद के सरकारी स्कूलों में 4,817 बच्चों ने छोड़ा प्राइवेट स्कूल, थलतेज शाला-2 बनी मिसाल
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद के थलतेज प्राथमिक शाला-2 में स्मार्ट क्लासरूम, रोबोटिक्स लैब और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी अत्याधुनिक सुविधाएँ देखकर यह स्पष्ट होता है कि गुजरात सरकार सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कितनी गंभीरता से काम कर रही है। शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में अकेले अहमदाबाद जिले में 4,817 छात्र-छात्राओं ने निजी स्कूल छोड़कर नगर निगम के सरकारी स्कूलों में दाखिला लिया है। पिछले 11 वर्षों में यह संख्या 60,000 से अधिक हो चुकी है।
मुख्य सुविधाएँ और बुनियादी ढाँचा
थलतेज प्राथमिक शाला-2 में गूगल-फीचर्ड क्लासरूम, स्मार्ट लाइब्रेरी, गणित लैब, विज्ञान लैब, फ्यूचर लैब और रोबोटिक्स लैब स्थापित की गई हैं। विद्यालय के प्रत्येक कक्ष में स्मार्ट बोर्ड के माध्यम से पठन-पाठन कराया जाता है। इसके अलावा छात्रों को सुबह दूध, नाश्ता और पोषण-युक्त भोजन भी प्रदान किया जाता है।
स्कूल के प्राचार्य चिराग जोशी ने बताया कि 'गूगल फीचर क्लासरूम, स्मार्ट लाइब्रेरी, गणित-विज्ञान की लैब और रोबोटिक्स लैब — ये सभी सुविधाएँ इस विद्यालय में उपलब्ध हैं। सभी कक्षाओं में स्मार्ट बोर्ड के माध्यम से शिक्षण कार्य कराया जाता है।'
छात्रों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया
छात्रा ऐंजल दुबे ने कहा, 'यहाँ साइंस लैब है। साइंस लैब में हमारे लिए कुछ मॉडल्स भी बनाए गए हैं। इनसे हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है।' वहीं छात्र वंश चौहान ने कहा, 'यहाँ बहुत अच्छी पढ़ाई होती है और बहुत अच्छी सुविधाएँ हैं — साइंस लैब, मैथ्स लैब, फ्यूचर लैब और रोबोटिक लैब।'
अभिभावक सुंदराबेन ने बताया, 'इस स्कूल में एक बड़ा मैदान है, स्पोर्ट्स का सामान है, म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स हैं। बच्चों को सुबह दूध दिया जाता है, फिर नाश्ता और खाना भी बहुत अच्छा मिलता है।' यह उत्साह इस बात का प्रमाण है कि अभिभावकों का भरोसा अब सरकारी स्कूलों की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।
मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की भूमिका
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में शुरू की गई 'मिशन स्कूल ऑफ एक्सीलेंस' पहल के तहत राज्य भर के सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा सुनिश्चित की जा रही है। गौरतलब है कि इस मिशन ने न केवल शिक्षा के बुनियादी ढाँचे को मज़बूत किया है, बल्कि पाठ्यक्रम और खेलकूद सुविधाओं में भी उल्लेखनीय सुधार किए हैं।
गुजरात की नई शिक्षा नीति के अनुसार विद्यालयों में खेलकूद की बेहतरीन सुविधाएँ भी विकसित की गई हैं, ताकि शैक्षणिक उत्कर्ष के साथ-साथ बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास भी सुनिश्चित हो सके।
आँकड़ों का संदेश
शिक्षा विभाग के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. एल. डी. देसाई ने बताया कि अभिभावक अहमदाबाद के प्रतिष्ठित निजी स्कूलों से लीविंग सर्टिफिकेट लेकर नगर निगम के सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों का दाखिला करा रहे हैं। पिछले 11 वर्षों में 60,000 से अधिक बच्चों ने बड़े निजी स्कूल छोड़कर नगर निगम के स्कूलों को अपनाया है। यह रुझान यह दिखाता है कि अहमदाबाद के सरकारी स्कूल अब केवल निम्न-आय वर्ग का विकल्प नहीं रहे।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में सरकारी और निजी स्कूलों के बीच गुणवत्ता की खाई को पाटने की माँग बढ़ रही है। अहमदाबाद का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक संभावित उदाहरण बन सकता है। आने वाले वर्षों में यदि यह रुझान बरकरार रहा, तो यह भारत में सार्वजनिक शिक्षा की प्रासंगिकता पर व्यापक बहस को नया मोड़ दे सकता है।