भरूच का श्री सरदार नगर प्राथमिक स्कूल बना 'ग्रीन लैबोरेटरी', 1,000 से अधिक पेड़ों से मिल रही पर्यावरण शिक्षा
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के भरूच जिले की वालिया तालुका का श्री सरदार नगर प्राथमिक स्कूल आज पूरे क्षेत्र में एक अनूठी 'ग्रीन लैबोरेटरी' के रूप में पहचाना जाता है। इस विद्यालय के परिसर में 1,000 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधे लहलहाते हैं, जो न केवल परिसर की हवा को शुद्ध रखते हैं, बल्कि बच्चों को पर्यावरण संरक्षण का व्यावहारिक पाठ भी पढ़ाते हैं। 26 अगस्त 2026 को सामने आई यह तस्वीर दिखाती है कि एक समर्पित शिक्षक की दीर्घकालिक मेहनत किस तरह किसी स्कूल की पहचान बदल सकती है।
कैसे बना यह स्कूल हरा-भरा
इस विद्यालय को 'ग्रीन स्कूल' में रूपांतरित करने का श्रेय मुख्य रूप से रिटायर्ड शिक्षक कमलेश कोसामिया को जाता है। उन्होंने अपनी 22 वर्षों की सेवा के दौरान एक-एक पौधा लगाया और उसकी देखभाल की। उनके इस अथक परिश्रम ने स्कूल परिसर को एक जीवंत हरित उद्यान में बदल दिया, जो आज पूरे इलाके के लिए प्रेरणास्रोत है।
वर्तमान शिक्षिका धर्मेशाबेन अरोलिया ने बताया कि उनका सपना हमेशा से एक सुंदर और इको-फ्रेंडली विद्यालय बनाने का था। उन्होंने कहा, 'हमने बड़ी संख्या में पौधे लाकर लगाए और उनकी नियमित देखभाल की। यह स्कूल हमारे इको क्लब में एक अग्रणी विद्यालय है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह उपलब्धि पूर्व प्रिंसिपल कमलेश कुमार कोसामिया के अथक प्रयासों की देन है, और मौजूदा प्रिंसिपल उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
पूर्व विद्यार्थियों की यादें
इस स्कूल से पढ़कर निकले छात्र आज भी रिटायर्ड शिक्षक कमलेश कोसामिया के पर्यावरण के प्रति समर्पण को गर्व के साथ याद करते हैं। पूर्व विद्यार्थी गंगा वसावा ने कहा, 'मैंने यहाँ कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाई की है। यहाँ का वातावरण बेहद सुंदर है और शिक्षक भी उत्कृष्ट हैं। यहाँ के विद्यार्थी हमेशा सक्रिय रहते हैं।' यह भावनात्मक जुड़ाव इस बात का प्रमाण है कि हरित परिवेश बच्चों की स्मृतियों पर गहरी छाप छोड़ता है।
शिक्षा विभाग और प्रशासन की भूमिका
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सरकार स्कूलों में स्वच्छता और हरियाली को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, क्योंकि इससे बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम विकसित होता है और वे भविष्य में पर्यावरण-जागरूक नागरिक बनते हैं। वालिया तालुका के टीपीईओ दिग्विजय सिंह राणा ने बताया कि बच्चों को प्राथमिक स्तर से ही पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में आने वाली पीढ़ी को तैयार करने के उद्देश्य से विद्यालयों को ग्रीन स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है।'
आम जनता और अन्य स्कूलों पर असर
जलवायु परिवर्तन के बढ़ते दुष्प्रभावों और गहराते प्रदूषण संकट के बीच, वालिया तालुका का श्री सरदार नगर प्राथमिक स्कूल अन्य विद्यालयों के लिए एक व्यावहारिक मॉडल बनकर उभरा है। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में स्कूली पाठ्यक्रम में पर्यावरण शिक्षा को मज़बूत करने की माँग उठ रही है। यहाँ बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ प्रकृति के साथ जीने का व्यावहारिक अनुभव भी मिल रहा है, जो उन्हें एक ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करता है।