अहमदाबाद पुलिस ने 276 बच्चों को भिक्षावृत्ति से निकाला, शाला प्रवेश उत्सव में हर्ष संघवी ने की सराहना
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने 24 जून 2025 को अहमदाबाद के अनुपम प्राथमिक विद्यालय में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव में भाग लिया, जहाँ अहमदाबाद पुलिस द्वारा भिक्षावृत्ति से मुक्त कराए गए 276 से अधिक बच्चों का विभिन्न विद्यालयों में औपचारिक दाखिला कराया गया। यह पहल अहमदाबाद पुलिस, अहमदाबाद महानगरपालिका और गुजरात सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
मुख्य घटनाक्रम
उपमुख्यमंत्री संघवी ने कार्यक्रम में कहा कि इन बच्चों के लिए यह केवल स्कूल में दाखिला नहीं, बल्कि उनके जीवन का 'दूसरा जन्म' है। उन्होंने बताया कि दाखिला पाने वाले बच्चों में 33 से अधिक ऐसे बच्चे भी हैं जिन्होंने पहली बार किसी विद्यालय का प्रवेश द्वार देखा है।
संघवी ने कहा, 'ये वे बच्चे हैं जिन्होंने कभी स्कूल की घंटी की आवाज नहीं सुनी थी। उनकी दुनिया ट्रैफिक सिग्नलों, वाहनों के शोर और पुलिसकर्मियों की सीटी तक सीमित थी। आज वही बच्चे स्कूल में बैठकर पढ़ाई करने का अवसर पा रहे हैं।'
पुलिस की भूमिका और निगरानी व्यवस्था
उपमुख्यमंत्री ने अहमदाबाद पुलिस की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों ने केवल बच्चों को सड़कों से विद्यालयों तक पहुँचाने का कार्य नहीं किया, बल्कि उनके अभिभावकों की तरह जिम्मेदारी भी निभाई। इसके अतिरिक्त, पुलिसकर्मी हर महीने विद्यालयों का दौरा करेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं और उन्हें किसी प्रकार की समस्या नहीं है।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बाल भिक्षावृत्ति उन्मूलन को लेकर विभिन्न राज्य सरकारें सक्रिय हैं, परंतु पुलिस द्वारा दीर्घकालिक निगरानी की यह व्यवस्था इस पहल को अन्य अभियानों से अलग करती है।
सरकार की प्रतिक्रिया
संघवी ने कहा कि 'जिन बच्चों के हाथों में बचपन से कटोरे थे, अब उनके हाथों में किताबें होंगी।' उन्होंने इस बदलाव को अहमदाबाद पुलिस, अहमदाबाद महानगरपालिका और गुजरात सरकार के समन्वित प्रयासों का प्रतिफल बताया और सभी संबंधित अधिकारियों को बधाई दी।
गौरतलब है कि शाला प्रवेश उत्सव गुजरात सरकार का एक वार्षिक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक बच्चों को प्राथमिक शिक्षा से जोड़ना है। इस वर्ष इसे भिक्षावृत्ति से मुक्त बच्चों के पुनर्वास से भी जोड़ा गया।
आम जनता और बच्चों पर असर
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों की आँखों में अब नए सपने और आत्मविश्वास दिखाई दे रहा है। उनका सफर ट्रैफिक सिग्नल से निकलकर कक्षा तक पहुँचा है और आने वाले दिनों में शिक्षा ही उनके सपनों को साकार करने का माध्यम बनेगी।
क्या होगा आगे
मासिक निगरानी तंत्र के तहत पुलिसकर्मी इन बच्चों की उपस्थिति और प्रगति पर नज़र रखेंगे। यह पहल समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है और भविष्य में इसे अन्य ज़िलों तक विस्तारित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।