2 नवंबर 2026
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एम्स राजकोट में ₹39 करोड़ की एडवांस्ड रेडियोथेरेपी सुविधा शुरू, 1.54 करोड़ लोगों को मिलेगा लाभ

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एम्स राजकोट में ₹39 करोड़ की एडवांस्ड रेडियोथेरेपी सुविधा शुरू, 1.54 करोड़ लोगों को मिलेगा लाभ

सारांश

सौराष्ट्र और कच्छ के कैंसर मरीज़ों को अब अहमदाबाद या मुंबई नहीं जाना पड़ेगा। एम्स राजकोट में ₹39 करोड़ की लागत से तैयार एडवांस्ड रेडियोथेरेपी इकाई में मिलीमीटर-सटीकता वाली छह आधुनिक तकनीकें एक साथ उपलब्ध हैं — और आयुष्मान भारत लाभार्थियों के लिए इलाज पूरी तरह मुफ़्त होगा।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 2 नवंबर 2026 को एम्स राजकोट में ₹39 करोड़ की एडवांस्ड रेडियोथेरेपी सुविधा का उद्घाटन किया।
सौराष्ट्र और कच्छ के लगभग 1 करोड़ 54 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद; 11 जिले कवर होंगे।
सुविधा में IMRT, VMAT, IGRT, SRS, SRT, SBRT तकनीकें; प्रतिवर्ष 500-700 मरीज़ों के उपचार की क्षमता।
आयुष्मान भारत PM-JAY के पात्र लाभार्थियों को कैंसर उपचार निःशुल्क ; अन्य को रियायती दरों पर।
2018 से अब तक मुँह, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की 64 करोड़ से अधिक जाँचें की गई हैं।
देश में अब 22 में से 18 एम्स संस्थान सक्रिय; पहले केवल नई दिल्ली में एक एम्स था।

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 2 नवंबर 2026 को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) राजकोट में ₹39 करोड़ की लागत से विकसित एडवांस्ड रेडियोथेरेपी सुविधा का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत तैयार यह सुविधा सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र के लगभग 1 करोड़ 54 लाख लोगों को उनके निकट उन्नत कैंसर उपचार उपलब्ध कराएगी।

सुविधा में क्या-क्या है

एम्स राजकोट की इस अत्याधुनिक इकाई में हाई एनर्जी लीनियर एक्सीलरेटर, वाइड बोर सीटी सिम्युलेटर और हाई डोज़ रेट ब्रैकीथेरेपी यूनिट स्थापित की गई हैं। इनके माध्यम से IMRT, VMAT, IGRT, SRS, SRT और SBRT जैसी आधुनिक तकनीकों से मिलीमीटर-स्तर की सटीकता के साथ उपचार संभव होगा। संस्थान का रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग 29 मई 2026 से कार्यरत है और प्रतिवर्ष 500 से 700 मरीजों के उपचार की क्षमता रखता है।

किसे होगा सीधा फायदा

इस सुविधा के दायरे में राजकोट, जामनगर, जूनागढ़, पोरबंदर, अमरेली, भावनगर, मोरबी, सुरेंद्रनगर, गिर सोमनाथ, देवभूमि द्वारका और बोटाद जिले शामिल हैं। अब तक इन जिलों के मरीजों को विशेष उपचार के लिए अहमदाबाद या मुंबई जैसे दूरदराज़ शहरों की यात्रा करनी पड़ती थी — एक बोझ जो उपचार में देरी और आर्थिक कठिनाई दोनों का कारण बनता था।

सरकार के कैंसर स्क्रीनिंग आँकड़े

उद्घाटन कार्यक्रम में नड्डा ने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के ज़रिए 2018 से अब तक की गई जाँचों का विवरण दिया। उनके अनुसार उच्च रक्तचाप और मधुमेह की लगभग 44-44 करोड़ जाँचें हुई हैं। मुँह के कैंसर के लिए 37 करोड़ 70 लाख लोगों की जाँच में करीब ढाई लाख मरीज़ मिले। स्तन कैंसर की 17 करोड़ 70 लाख जाँचों में लगभग 95 हज़ार मामले सामने आए, जबकि गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की 9 करोड़ 80 लाख जाँचों में करीब एक लाख मरीज़ पाए गए।

आयुष्मान भारत से मुफ़्त उपचार का वादा

नड्डा ने लैंसेट की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि कैंसर के 90 प्रतिशत मरीज़ों का उपचार बीमारी की पुष्टि के 30 दिनों के भीतर शुरू हो जाता है — जिसका एक बड़ा कारण आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना के पात्र लाभार्थियों को एम्स राजकोट में कैंसर का उपचार निःशुल्क मिलेगा, जबकि अन्य मरीज़ों को रियायती दरों पर सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।

एम्स विस्तार और बुनियादी ढाँचे की बड़ी तस्वीर

मंत्री ने याद दिलाया कि एक समय देश में केवल नई दिल्ली में एकमात्र एम्स था; अब 22 में से 18 एम्स संस्थान सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त सरकार ने 1 लाख 80 हज़ार से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, PM-ABHIM (पीएम आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन), अमृत फार्मेसी और जन औषधि केंद्रों के माध्यम से कैंसर की दवाएँ सस्ती करने के प्रयास किए हैं। गुजरात के स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने इस उपलब्धि को विकसित भारत के संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

यह सुविधा ऐसे समय में शुरू हुई है जब भारत में कैंसर के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और द्वितीयक व तृतीयक स्तर की ऑन्कोलॉजी सेवाएँ अभी भी बड़े शहरों तक सीमित हैं। एम्स राजकोट की यह नई इकाई उस असंतुलन को दूर करने की दिशा में एक ठोस प्रयास है — अगला सवाल यह है कि क्या मरीज़ों की संख्या के साथ कदम मिलाने के लिए मानव-संसाधन भी उसी रफ़्तार से तैयार होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और दूरी स्वयं उपचार में देरी का कारण बनती थी। लेकिन उपकरण लगाना और उसे पूरी क्षमता पर चलाना दो अलग चुनौतियाँ हैं — प्रतिवर्ष 500-700 मरीज़ों का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब पर्याप्त रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट और तकनीशियन उपलब्ध हों, जो देशभर में अभी भी दुर्लभ हैं। लैंसेट के आँकड़े आशाजनक हैं, पर वे राष्ट्रीय औसत हैं; ग्रामीण गुजरात में 'बीमारी पकड़ में आने से 30 दिन में इलाज' की दर अलग हो सकती है। असली कसौटी यह होगी कि अगले दो वर्षों में यह केंद्र अपनी घोषित क्षमता का कितना प्रतिशत वास्तव में उपयोग कर पाता है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एम्स राजकोट की एडवांस्ड रेडियोथेरेपी सुविधा क्या है?
यह ₹39 करोड़ की लागत से प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत विकसित एक उन्नत कैंसर उपचार केंद्र है, जिसमें हाई एनर्जी लीनियर एक्सीलरेटर, वाइड बोर सीटी सिम्युलेटर और हाई डोज़ रेट ब्रैकीथेरेपी यूनिट शामिल हैं। इसके माध्यम से IMRT, VMAT, IGRT जैसी आधुनिक तकनीकों से मिलीमीटर-सटीकता के साथ उपचार किया जा सकेगा।
इस सुविधा से किन जिलों के लोगों को फायदा होगा?
सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र के राजकोट, जामनगर, जूनागढ़, पोरबंदर, अमरेली, भावनगर, मोरबी, सुरेंद्रनगर, गिर सोमनाथ, देवभूमि द्वारका और बोटाद — कुल 11 जिलों के लगभग 1 करोड़ 54 लाख लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे पहले इन क्षेत्रों के मरीज़ों को विशेष उपचार के लिए अहमदाबाद या मुंबई जाना पड़ता था।
क्या आयुष्मान भारत के लाभार्थियों को यहाँ मुफ़्त इलाज मिलेगा?
हाँ, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के पात्र लाभार्थियों को एम्स राजकोट में कैंसर का उपचार पूरी तरह निःशुल्क मिलेगा। अन्य मरीज़ों को रियायती दरों पर सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।
भारत में अब कितने एम्स संस्थान काम कर रहे हैं?
स्वास्थ्य मंत्री नड्डा के अनुसार देश में कुल 22 एम्स स्वीकृत हैं, जिनमें से 18 संस्थान अभी सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। पहले केवल नई दिल्ली में एकमात्र एम्स था।
एम्स राजकोट का रेडियोथेरेपी विभाग कब से शुरू हुआ और इसकी क्षमता क्या है?
रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग 29 मई 2026 से कार्यरत है। इस नई एडवांस्ड सुविधा के साथ विभाग अब प्रतिवर्ष 500 से 700 मरीज़ों के उपचार की क्षमता रखता है।
राष्ट्र प्रेस
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