22 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अजमेर में रोबोटिक तकनीक से हायटस हर्निया का सफल ऑपरेशन, डॉ. शिव कुमार बुनकर ने किया कमाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अजमेर में रोबोटिक तकनीक से हायटस हर्निया का सफल ऑपरेशन, डॉ. शिव कुमार बुनकर ने किया कमाल

सारांश

अजमेर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में डॉ. शिव कुमार बुनकर ने रोबोटिक निसेन फंडोप्लीकेशन तकनीक से 21 वर्षीय मरीज की जटिल हायटस हर्निया सर्जरी सफलतापूर्वक की — यह अजमेर में उन्नत रोबोटिक चिकित्सा सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक उल्लेखनीय पड़ाव है।

मुख्य बातें

शिव कुमार बुनकर ने जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, अजमेर में रोबोटिक तकनीक से जटिल हायटस हर्निया का सफल ऑपरेशन किया।
पीड़ित 21 वर्षीय मरीज दो महीनों से अपच, रिफ्लक्स और सीने में जलन से परेशान था।
रोबोटिक निसेन फंडोप्लीकेशन प्रक्रिया में पेट के ऊपरी हिस्से को भोजन नली के चारों ओर लपेटकर वाल्व बनाया जाता है।
श्याम भट्ट के मार्गदर्शन और प्रिंसिपल डॉ.
अनिल सामरिया की देखरेख में संपन्न हुआ।
रोबोटिक तकनीक से बेहतर दृश्यता, सटीकता और सूक्ष्म नियंत्रण के कारण जटिल सर्जरी के परिणाम बेहतर होते हैं।

जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय, अजमेर में लेप्रोस्कोपिक एवं रोबोटिक सर्जन डॉ. शिव कुमार बुनकर ने रोबोटिक तकनीक की सहायता से जटिल हायटस हर्निया का सफल ऑपरेशन किया है। 22 अक्टूबर 2026 को सामने आई यह उपलब्धि राजस्थान के अजमेर में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह ऑपरेशन 21 वर्षीय एक मरीज पर सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।

मरीज की स्थिति और उपचार की पृष्ठभूमि

पीड़ित 21 वर्षीय मरीज पिछले दो महीनों से अपच, प्रतिवाह (रिफ्लक्स) और छाती में जलन जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा था। विस्तृत जाँच और चिकित्सकीय परामर्श के बाद ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।

डॉ. श्याम भट्ट के मार्गदर्शन में उपचार की योजना तैयार की गई और रोबोटिक प्रणाली के ज़रिए रोबोटिक निसेन फंडोप्लीकेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। गौरतलब है कि यह प्रक्रिया अजमेर के सरकारी चिकित्सा संस्थान में इस श्रेणी की उल्लेखनीय सर्जरियों में मानी जा रही है।

रोबोटिक निसेन फंडोप्लीकेशन — प्रक्रिया क्या है

इस सर्जरी में पेट के ऊपरी हिस्से को भोजन नली के निचले भाग के चारों ओर लपेटकर एक वाल्व जैसी संरचना तैयार की जाती है। इसका उद्देश्य पेट के अम्ल को भोजन नली में वापस आने से रोकना है। आवश्यकता के अनुसार डायफ्राम में मौजूद हायटस की खराबी को भी उसी ऑपरेशन में ठीक किया जाता है।

डॉ. बुनकर के अनुसार, रोबोटिक तकनीक जटिल सर्जरी के दौरान बेहतर दृश्यता, अधिक सटीकता और सूक्ष्म गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि इससे चयनित मरीजों में उपचार के परिणाम बेहतर करने में सहायता मिल सकती है।

चिकित्सा दल की भूमिका

ऑपरेशन के दौरान प्रिंसिपल डॉ. अनिल सामरिया की देखरेख में मरीज की प्री-ऑपरेटिव और पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल की गई। डॉ. अरविंद खरे सहित चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और एनेस्थीसिया टीम ने भी इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई।

हायटस हर्निया — रोग की पहचान

हायटस हर्निया एक ऐसी स्थिति है जिसमें पेट का ऊपरी हिस्सा डायफ्राम में मौजूद छेद से ऊपर खिसककर छाती की ओर आ जाता है। सीने में जलन, खट्टी डकारें, भोजन निगलने में परेशानी, सीने या पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द और बार-बार गैस बनना इसके सामान्य लक्षण हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स से जुड़ी बीमारियों के मामले युवाओं में बढ़ते देखे जा रहे हैं।

अजमेर में उन्नत चिकित्सा का भविष्य

रोबोटिक तकनीक के ज़रिए जटिल शल्य प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक अंजाम देना अजमेर में आधुनिक उपचार की उपलब्धता का संकेत है। यह उपलब्धि स्थानीय स्तर पर महानगरीय दर्जे की स्वास्थ्य सेवाएँ सुलभ कराने के प्रयासों को मज़बूती देती है और भविष्य में ऐसी और जटिल सर्जरियों के लिए रास्ता खोलती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु असली महत्व इसकी भौगोलिक पृष्ठभूमि में है — रोबोटिक सर्जरी अब तक मुख्यतः महानगरों के बड़े निजी अस्पतालों तक सीमित रही है। अजमेर जैसे शहर के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में इस तकनीक का प्रयोग यह सवाल उठाता है कि क्या राजस्थान के अन्य ज़िला अस्पतालों में भी ऐसी सुविधाएँ जल्द पहुँचेंगी। हालाँकि एक सफल केस एक प्रवृत्ति नहीं बनाता, यह निश्चित रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे में रोबोटिक तकनीक के एकीकरण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हायटस हर्निया क्या होता है और इसके लक्षण क्या हैं?
हायटस हर्निया में पेट का ऊपरी हिस्सा डायफ्राम के छेद से खिसककर छाती की ओर आ जाता है। सीने में जलन, खट्टी डकारें, भोजन निगलने में कठिनाई, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द और बार-बार गैस बनना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
रोबोटिक निसेन फंडोप्लीकेशन प्रक्रिया क्या है?
यह एक उन्नत रोबोटिक सर्जरी है जिसमें पेट के ऊपरी हिस्से को भोजन नली के निचले सिरे के चारों ओर लपेटकर एक प्राकृतिक वाल्व बनाया जाता है। इससे पेट का अम्ल भोजन नली में वापस आना रुकता है और डायफ्राम की खराबी को भी ठीक किया जाता है।
रोबोटिक सर्जरी पारंपरिक लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से बेहतर क्यों मानी जाती है?
डॉ. बुनकर के अनुसार, रोबोटिक तकनीक जटिल सर्जरी में बेहतर दृश्यता, अधिक सटीकता और सूक्ष्म गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण प्रदान करती है। इससे चयनित मरीजों में उपचार के परिणाम बेहतर हो सकते हैं।
यह ऑपरेशन किस अस्पताल में और किसने किया?
यह ऑपरेशन अजमेर स्थित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय में लेप्रोस्कोपिक एवं रोबोटिक सर्जन डॉ. शिव कुमार बुनकर ने किया। डॉ. श्याम भट्ट के मार्गदर्शन और प्रिंसिपल डॉ. अनिल सामरिया की देखरेख में यह प्रक्रिया संपन्न हुई।
क्या हायटस हर्निया युवाओं में भी होता है?
हाँ, इस मामले में पीड़ित मरीज केवल 21 वर्ष का था, जो दो महीनों से अपच और सीने में जलन से परेशान था। विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों के कारण यह समस्या युवाओं में भी देखी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले