यूपी चुनाव 2027 में धांधली के अखिलेश यादव के आरोप पर भाजपा का पलटवार: 'पहले ही हार मान ली'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में धांधली की आशंका जताते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पर BJP नेताओं ने तीखा पलटवार करते हुए इसे चुनाव से पहले ही विपक्ष की 'हार स्वीकार करने की मुद्रा' करार दिया है। 13 जून को सामने आई इस राजनीतिक बयानबाजी ने उत्तर प्रदेश की चुनावी सरगर्मी को और तेज़ कर दिया है।
अखिलेश यादव के आरोप
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि BJP ने बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों में चुनाव आयोग की कथित मिलीभगत से धांधली की थी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उत्तर प्रदेश में भी ऐसी 'लूट और बेईमानी' हुई, तो भविष्य में स्वतंत्र चुनाव संभव नहीं होंगे। सपा प्रमुख ने BJP पर 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' जैसे अभियानों के ज़रिये मतदाता सूचियों में हेरफेर करने और महिला आरक्षण विधेयक के नाम पर महिला मतदाताओं को गुमराह करने का भी आरोप लगाया।
भाजपा की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पत्रकारों से बात करते हुए अखिलेश यादव के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, 'समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेता, खासकर अखिलेश यादव, ऐसे बयान अपनी साख बचाने के लिए दे रहे हैं क्योंकि उन्हें चुनाव से पहले ही अपनी हार का अहसास हो रहा है।'
पाठक ने इंडिया गठबंधन के रवैये पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष जीतता है तो वह चुनाव आयोग की तारीफ करता है, लेकिन जब हार नज़र आती है तो धांधली के आरोप लगाए जाने लगते हैं। उन्होंने सपा के शासनकाल का ज़िक्र करते हुए कहा कि उस दौर में उत्तर प्रदेश में माफिया और बाहुबली नेताओं का बोलबाला था।
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री का पलटवार
यूपी के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश अंसारी ने भी सपा प्रमुख पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने सपा शासन को 'अंधेरे का दौर' बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के विकास कार्यों से उसकी तुलना की। अंसारी ने कहा, 'समाजवादी पार्टी का एकमात्र एजेंडा सीएम योगी के नेतृत्व वाली यूपी सरकार के विकास कार्यों में बाधा डालना और उत्तर प्रदेश की तरक्की व खुशहाली को रोकना है।'
उन्होंने यह भी कहा कि BJP की डबल-इंजन सरकार ने भ्रष्टाचार-मुक्त और अपराध-मुक्त राज्य देने का संकल्प लिया है, इसीलिए वह विपक्ष जो 'हमेशा गैंगस्टरों और गुंडों को बचाता रहा है' बौखलाया हुआ है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 अभी लगभग डेढ़ साल दूर हैं, लेकिन सभी प्रमुख दल अभी से अपनी-अपनी ज़मीन तैयार करने में जुट गए हैं। गौरतलब है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में BJP ने प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता बरकरार रखी थी, जबकि सपा मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी थी। अखिलेश यादव का यह बयान उस रणनीतिक दबाव का हिस्सा माना जा रहा है जिसके ज़रिये सपा चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ दल दोनों को कटघरे में खड़ा करना चाहती है।
आगे क्या होगा
चुनाव आयोग ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आएंगे, धांधली और निष्पक्षता का यह विमर्श और तेज़ होगा। सपा और BJP दोनों दलों के लिए उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटें प्रतिष्ठा का सवाल हैं।