बस्तर के नक्सल-पीड़ित आदिवासियों के घाव भरना सरकार की जिम्मेदारी: अमित शाह
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 15 अक्टूबर 2026 को कहा कि नक्सलवाद ने पिछले पाँच दशकों में छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के गरीब आदिवासियों को शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर गहरी चोट पहुँचाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा के कारण दिव्यांग हुए इन लोगों के जीवन में पुनः खुशहाली लाना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना अब केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
समारोह का संदर्भ और उद्देश्य
शाह छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों एवं दिव्यांगजनों के लिए आयोजित सहायता उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में चलाए जा रहे सेवा कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा है।
इस पहल के तहत छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के कारण दिव्यांग हुए आदिवासियों को कृत्रिम अंग और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे बेहतर और स्वावलंबी जीवन जी सकें।
मुख्य घटनाक्रम और आँकड़े
गृह मंत्री ने बताया कि 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत 5 से 7 अक्टूबर के बीच जगदलपुर में सहायता उपकरण वितरण शिविर आयोजित किया गया। इस अभियान से 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए, जिनमें अकेले बस्तर के 1,570 से अधिक लाभार्थी शामिल थे।
शाह ने कहा कि ये आँकड़े बस्तर के दर्द और वहाँ के गरीब आदिवासी परिवारों पर नक्सलवाद के दुष्प्रभाव को रेखांकित करते हैं। बड़ी संख्या में लोगों को हिंसा के कारण दिव्यांगता झेलनी पड़ी, जिससे उनकी आजीविका और सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।
अमित शाह के प्रमुख वक्तव्य
गृह मंत्री ने कहा, 'नक्सलवाद को खत्म करने का मतलब यह नहीं है कि हम पिछले पाँच दशकों में झेले गए दुखों को मिटा सकते हैं। जहाँ भी इन दुखों के निशान हैं, हमें उन घावों को भरना होगा। प्रभावित लोगों को अपना जीवन फिर से संवारने में मदद करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि वे सम्मान के साथ जी सकें।'
उन्होंने नक्सल हिंसा में हाथ-पैर गँवाने वाले, श्रवण शक्ति खो चुके और दृष्टिहीन हुए लोगों की मदद को अनिवार्य बताया। शाह ने एक लाभार्थी का अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक ऐसे व्यक्ति की बात सुनी जिसे इस कार्यक्रम के तहत कृत्रिम अंग मिला था और जो तीन साल बाद पहली बार अपने हाथ से गिलास उठाकर खुद पानी पी सका।
नक्सलवाद के अंत के बाद पुनर्वास पर जोर
शाह ने दोहराया कि मोदी सरकार ने 31 मार्च 2026 से पहले देश से नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था और अब नक्सलवाद समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब प्राथमिकता नक्सल-प्रभावित लोगों के पुनर्वास और उनके जीवन को बेहतर बनाने की है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ में सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ पुनर्वास और विकास कार्यों को समानांतर रूप से आगे बढ़ा रही है। 'सेवा संकल्प अभियान' का उद्देश्य दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और सम्मानजनक जीवन में सहयोग देना है।
आगे की राह
शाह ने विश्वास जताया कि कृत्रिम अंगों और सहायक उपकरणों की सहायता से नक्सल हिंसा से प्रभावित लोग अपने जीवन को नई दिशा दे सकेंगे। सरकार का इरादा है कि हिंसा से जीवन प्रभावित हुए सभी जरूरतमंदों की पहचान कर उन्हें आवश्यक सहायता देकर आगे बढ़ने के अवसर सुलभ कराए जाएँ। यह पुनर्वास अभियान आने वाले समय में बस्तर और छत्तीसगढ़ के अन्य नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में और विस्तृत रूप लेने की संभावना है।