15 अक्टूबर 2026
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बस्तर के नक्सल-पीड़ित आदिवासियों के घाव भरना सरकार की जिम्मेदारी: अमित शाह

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बस्तर के नक्सल-पीड़ित आदिवासियों के घाव भरना सरकार की जिम्मेदारी: अमित शाह

सारांश

पाँच दशकों की नक्सल हिंसा के बाद अब बस्तर के ज़ख्मों को भरने की बारी है। अमित शाह ने जगदलपुर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग वितरण के बाद कहा — नक्सलवाद का खात्मा काफी नहीं, घाव भरना भी उतना ही जरूरी है।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 15 अक्टूबर 2026 को नक्सल-पीड़ित दिव्यांगजनों के लिए सहायता उपकरण वितरण समारोह को संबोधित किया।
'सेवा संकल्प अभियान' के तहत 5–7 अक्टूबर को जगदलपुर में शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए।
कुल लाभार्थियों में अकेले बस्तर के 1,570 से अधिक आदिवासी शामिल थे।
शाह ने घोषणा की कि मोदी सरकार के संकल्प के अनुसार 31 मार्च 2026 से पहले देश में नक्सलवाद समाप्त हो चुका है।
अभियान का लक्ष्य नक्सल-प्रभावित दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
यह कार्यक्रम PM मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर देशव्यापी सेवा कार्यक्रमों का हिस्सा है।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 15 अक्टूबर 2026 को कहा कि नक्सलवाद ने पिछले पाँच दशकों में छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के गरीब आदिवासियों को शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर गहरी चोट पहुँचाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा के कारण दिव्यांग हुए इन लोगों के जीवन में पुनः खुशहाली लाना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना अब केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

समारोह का संदर्भ और उद्देश्य

शाह छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों एवं दिव्यांगजनों के लिए आयोजित सहायता उपकरण वितरण समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में चलाए जा रहे सेवा कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा है।

इस पहल के तहत छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के कारण दिव्यांग हुए आदिवासियों को कृत्रिम अंग और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे वे बेहतर और स्वावलंबी जीवन जी सकें।

मुख्य घटनाक्रम और आँकड़े

गृह मंत्री ने बताया कि 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत 5 से 7 अक्टूबर के बीच जगदलपुर में सहायता उपकरण वितरण शिविर आयोजित किया गया। इस अभियान से 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए, जिनमें अकेले बस्तर के 1,570 से अधिक लाभार्थी शामिल थे।

शाह ने कहा कि ये आँकड़े बस्तर के दर्द और वहाँ के गरीब आदिवासी परिवारों पर नक्सलवाद के दुष्प्रभाव को रेखांकित करते हैं। बड़ी संख्या में लोगों को हिंसा के कारण दिव्यांगता झेलनी पड़ी, जिससे उनकी आजीविका और सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।

अमित शाह के प्रमुख वक्तव्य

गृह मंत्री ने कहा, 'नक्सलवाद को खत्म करने का मतलब यह नहीं है कि हम पिछले पाँच दशकों में झेले गए दुखों को मिटा सकते हैं। जहाँ भी इन दुखों के निशान हैं, हमें उन घावों को भरना होगा। प्रभावित लोगों को अपना जीवन फिर से संवारने में मदद करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि वे सम्मान के साथ जी सकें।'

उन्होंने नक्सल हिंसा में हाथ-पैर गँवाने वाले, श्रवण शक्ति खो चुके और दृष्टिहीन हुए लोगों की मदद को अनिवार्य बताया। शाह ने एक लाभार्थी का अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक ऐसे व्यक्ति की बात सुनी जिसे इस कार्यक्रम के तहत कृत्रिम अंग मिला था और जो तीन साल बाद पहली बार अपने हाथ से गिलास उठाकर खुद पानी पी सका।

नक्सलवाद के अंत के बाद पुनर्वास पर जोर

शाह ने दोहराया कि मोदी सरकार ने 31 मार्च 2026 से पहले देश से नक्सलवाद समाप्त करने का संकल्प लिया था और अब नक्सलवाद समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि अब प्राथमिकता नक्सल-प्रभावित लोगों के पुनर्वास और उनके जीवन को बेहतर बनाने की है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ में सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ पुनर्वास और विकास कार्यों को समानांतर रूप से आगे बढ़ा रही है। 'सेवा संकल्प अभियान' का उद्देश्य दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और सम्मानजनक जीवन में सहयोग देना है।

आगे की राह

शाह ने विश्वास जताया कि कृत्रिम अंगों और सहायक उपकरणों की सहायता से नक्सल हिंसा से प्रभावित लोग अपने जीवन को नई दिशा दे सकेंगे। सरकार का इरादा है कि हिंसा से जीवन प्रभावित हुए सभी जरूरतमंदों की पहचान कर उन्हें आवश्यक सहायता देकर आगे बढ़ने के अवसर सुलभ कराए जाएँ। यह पुनर्वास अभियान आने वाले समय में बस्तर और छत्तीसगढ़ के अन्य नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में और विस्तृत रूप लेने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बस्तर में 3,600 लाभार्थियों की संख्या पाँच दशकों की हिंसा की व्यापकता के सामने सीमित लगती है, और विशेषज्ञ इस बात पर सवाल उठाते रहे हैं कि क्या कृत्रिम अंग वितरण अकेले उस सामाजिक-आर्थिक रिक्तता को भर सकता है जो दशकों की अशांति ने पैदा की है। नक्सलवाद के 'समाप्त' होने का दावा जाँच की माँग करता है — मैदानी हकीकत और सरकारी आँकड़ों के बीच की दूरी अभी भी स्वतंत्र सत्यापन की प्रतीक्षा कर रही है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने बस्तर के नक्सल पीड़ितों के लिए क्या घोषणा की?
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सल हिंसा से दिव्यांग हुए आदिवासियों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण देकर आत्मनिर्भर बनाना सरकार की जिम्मेदारी है। 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत जगदलपुर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजनों को सहायता उपकरण वितरित किए गए।
सेवा संकल्प अभियान क्या है और इससे कितने लोग लाभान्वित हुए?
'सेवा संकल्प अभियान' प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित देशव्यापी सेवा कार्यक्रमों की श्रृंखला है। इसके तहत 5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए, जिनमें बस्तर के 1,570 से अधिक आदिवासी शामिल थे।
क्या भारत में नक्सलवाद सच में समाप्त हो चुका है?
अमित शाह ने दावा किया कि मोदी सरकार के 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद समाप्त करने के संकल्प के अनुसार अब नक्सलवाद समाप्त हो चुका है। हालाँकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि और मैदानी स्थिति का स्वतंत्र मूल्यांकन अभी जारी है।
बस्तर के नक्सल-प्रभावित आदिवासियों को किस प्रकार की सहायता दी जा रही है?
सरकार नक्सल हिंसा में हाथ-पैर गँवाने वाले, श्रवण शक्ति खोने वाले और दृष्टिहीन हुए लोगों को कृत्रिम अंग और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध करा रही है। इसका उद्देश्य प्रभावित लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
यह कार्यक्रम PM मोदी की 25वीं वर्षगाँठ से कैसे जुड़ा है?
यह सहायता उपकरण वितरण समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित सेवा कार्यक्रमों की कड़ी का हिस्सा है। इस श्रृंखला के तहत विभिन्न राज्यों में जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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