30 जुलाई 2026
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बस्तर प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति मुर्मु से की मुलाकात, अमित शाह बोले — नक्सलमुक्त बस्तर बनेगा छत्तीसगढ़ का सबसे विकसित संभाग

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बस्तर प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति मुर्मु से की मुलाकात, अमित शाह बोले — नक्सलमुक्त बस्तर बनेगा छत्तीसगढ़ का सबसे विकसित संभाग

सारांश

पहली बार पारंपरिक वेशभूषा में राष्ट्रपति भवन पहुँचे बस्तरवासियों ने एक नई तस्वीर पेश की — हिंसा की छाया से निकलकर संस्कृति और विकास की रोशनी की ओर बढ़ता बस्तर। अमित शाह का दावा है कि यह संभाग जल्द छत्तीसगढ़ का सबसे विकसित क्षेत्र बनेगा।

मुख्य बातें

बस्तर संभाग के प्रतिनिधिमंडल ने 30 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलमुक्त बस्तर छत्तीसगढ़ का सबसे विकसित संभाग बनेगा।
यह पहला अवसर था जब बस्तर के लोग पारंपरिक वेशभूषा में राष्ट्रपति भवन पहुँचे।
राष्ट्रपति मुर्मु ने बस्तर पंडुम को सांस्कृतिक पहचान का उत्सव बताया और पर्यटन व रोज़गार में इसकी भूमिका रेखांकित की।
हाल ही में बस्तर ओलंपिक खेलों का आयोजन किया गया, जो जनजातीय युवाओं को राष्ट्रीय मंच देने का प्रयास है।
दूर-दराज के गाँवों तक सड़क, बिजली और पेयजल पहुँचाने और बंद विद्यालयों को पुनः खोलने की प्रगति को राष्ट्रपति ने सराहा।

नई दिल्ली, 30 जुलाई को बस्तर संभाग के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। यह पहला अवसर था जब बस्तर के लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा में राष्ट्रपति भवन पहुँचे।

गृह मंत्री का संदेश: नक्सलमुक्त बस्तर की नई पहचान

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि बस्तर पंडुम के विजेताओं और मांझी-चालकी परंपरा के प्रमुखों के साथ राष्ट्रपति के संवाद ने एक नई इबारत लिखी है। उन्होंने कहा कि जो बस्तर कभी नक्सली हिंसा के कारण अपनी समृद्ध विरासत, संस्कृति और परंपराओं को खोता जा रहा था, वह आज नक्सलमुक्त होकर अपनी धरोहरों को सहेज रहा है।

शाह ने विश्वास जताया कि विकास के पथ पर अग्रसर बस्तर आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ का सबसे विकसित संभाग बनकर नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बस्तर में बुनियादी ढाँचे और रोज़गार सृजन पर ज़ोर दे रही हैं।

राष्ट्रपति का संबोधन: बस्तर पंडुम सिर्फ उत्सव नहीं, पहचान है

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह बस्तर की गौरवशाली परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान का उत्सव है। उनके अनुसार, इसका उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों मंचों पर बस्तर की वास्तविक पहचान स्थापित करना है।

राष्ट्रपति ने यह भी रेखांकित किया कि बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने युवाओं को अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत से पुनः जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम पर्यटन को बढ़ावा देते हैं और रोज़गार के अवसर भी उत्पन्न करते हैं।

मांझी-चालकी की भूमिका और सामाजिक सेतु

राष्ट्रपति मुर्मु ने सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में मांझी और चालकी की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये दोनों समुदाय और प्रशासन के बीच एक प्रभावी सेतु के रूप में कार्य करते हैं। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि ये अपने समर्पण और नेतृत्व से समाज में सुख, शांति और समृद्धि के लिए कार्य करते रहेंगे।

आम जनता पर असर: शिक्षा, सड़क और रोज़गार

राष्ट्रपति ने संतोष व्यक्त किया कि सरकार के प्रयासों और बस्तर के लोगों की सक्रिय भागीदारी से यह क्षेत्र विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि दूर-दराज के गाँवों तक सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुँच रही हैं। लंबे समय तक बंद रहे विद्यालयों में फिर से बच्चों की चहल-पहल दिखाई दे रही है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में छत्तीसगढ़ में बस्तर ओलंपिक खेलों का आयोजन किया गया, जो जनजातीय युवाओं की खेल और कला प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच देने का प्रयास है।

आगे की राह: सांस्कृतिक पहचान के साथ विकास

राष्ट्रपति मुर्मु ने महिलाओं, बच्चों, समाज के वंचित वर्गों और वरिष्ठ नागरिकों के सशक्तीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने लोगों से जल, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आग्रह किया। यह परिवर्तन, उनके अनुसार, पूरे देश के लिए प्रसन्नता और गर्व का विषय है — और बस्तर के उज्ज्वल भविष्य का शुभ संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'सबसे विकसित संभाग' का दावा तब तक अधूरा रहेगा जब तक विकास के ठोस मापदंड — प्रति व्यक्ति आय, साक्षरता दर, स्वास्थ्य सुविधाएँ — सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत न किए जाएँ। नक्सल हिंसा में कमी एक उपलब्धि है, परंतु दशकों की उपेक्षा को पाटने के लिए सांस्कृतिक उत्सवों से आगे बढ़कर संरचनात्मक निवेश की ज़रूरत है। बस्तर ओलंपिक और पंडुम जैसे आयोजन जनजातीय पहचान को मज़बूत करते हैं, किंतु रोज़गार और शिक्षा के सत्यापन-योग्य आँकड़े ही असली कसौटी होंगे।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बस्तर प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन में किससे और क्यों मुलाकात की?
30 जुलाई को बस्तर संभाग के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। यह मुलाकात बस्तर पंडुम के विजेताओं और मांझी-चालकी परंपरा के प्रमुखों को सम्मानित करने के उद्देश्य से आयोजित हुई।
बस्तर पंडुम क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
बस्तर पंडुम एक सांस्कृतिक महोत्सव है जो बस्तर की जनजातीय परंपराओं, रीति-रिवाजों और विरासत को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करता है। राष्ट्रपति मुर्मु के अनुसार, यह पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ रोज़गार के अवसर भी उत्पन्न करता है।
अमित शाह ने बस्तर के विकास को लेकर क्या कहा?
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलमुक्त हो चुका बस्तर आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ का सबसे विकसित संभाग बनकर विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करेगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जो बस्तर कभी नक्सली हिंसा में अपनी संस्कृति खो रहा था, वह आज अपनी धरोहरों को सहेज रहा है।
मांझी और चालकी कौन होते हैं और बस्तर में उनकी क्या भूमिका है?
मांझी और चालकी बस्तर की पारंपरिक ग्राम प्रशासन व्यवस्था के प्रमुख होते हैं, जो समुदाय और प्रशासन के बीच सेतु का कार्य करते हैं। राष्ट्रपति मुर्मु ने सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में उनकी भूमिका की सराहना की।
बस्तर ओलंपिक खेल क्या हैं और इनका उद्देश्य क्या है?
बस्तर ओलंपिक खेल हाल ही में छत्तीसगढ़ में आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य जनजातीय युवाओं की खेल और कला प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच प्रदान करना है। राष्ट्रपति मुर्मु ने इस आयोजन को जनजातीय समुदाय की नैसर्गिक प्रतिभा के सम्मान के रूप में रेखांकित किया।
राष्ट्र प्रेस
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