अमित शाह 27 सितंबर को साबरमती से करेंगे देश की पहली LNG ट्रेन का शुभारंभ, ₹25 लाख/वर्ष बचत का अनुमान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 27 सितंबर 2026 को अहमदाबाद के साबरमती रेलवे स्टेशन से भारत की पहली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) संचालित ट्रेन का शुभारंभ करेंगे। यह भारतीय रेलवे के इतिहास में एक मील का पत्थर है, जो पारंपरिक डीजल ईंधन पर निर्भरता घटाने और परिचालन लागत में कमी लाने की दिशा में उठाया गया ठोस कदम है। आंकड़ों के अनुसार, इस तकनीक से प्रति ड्राइविंग पावर कार (DPC) प्रति वर्ष लगभग ₹25 लाख की बचत होने का अनुमान लगाया गया है।
तकनीकी स्वरूप: क्या है यह LNG ड्यूल-फ्यूल प्रणाली
भारतीय रेलवे में पहली बार ट्रेन की ड्राइविंग पावर कार (DPC) में LNG आधारित ड्यूल-फ्यूल प्रणाली को सफलतापूर्वक एकीकृत किया गया है। इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक ही इंजन में LNG और डीजल दोनों ईंधनों का उपयोग संभव है और ईंधन की उपलब्धता के अनुसार इंजन दोनों के बीच सहज रूप से स्विच कर सकता है।
इस परियोजना के तहत 1,400 हॉर्सपावर क्षमता वाली दो DPC को LNG ड्यूल-फ्यूल प्रणाली में परिवर्तित किया गया है। प्रत्येक DPC में लगभग 2,200 लीटर क्षमता का LNG टैंक स्थापित किया गया है, जिसमें लगभग 850 से 900 किलोग्राम उपयोगी LNG भरी जा सकती है।
फील्ड ट्रायल और परिचालन दक्षता
लॉन्च से पहले दोनों परिवर्तित DPC पर 2,000 किलोमीटर से अधिक का सफल फील्ड ट्रायल पूरा किया जा चुका है। ट्रायल के दौरान तकनीक की विश्वसनीयता और प्रदर्शन को कड़ी कसौटी पर परखा गया। गौरतलब है कि एक बार पूर्ण LNG भराव के बाद यह प्रणाली लगभग 1,600 किलोमीटर के निर्बाध संचालन के लिए पर्याप्त ईंधन प्रदान करती है, जिससे बार-बार ईंधन भरने की ज़रूरत काफी कम हो जाती है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय रेलवे अपनी परिचालन लागत घटाने और हरित ऊर्जा की ओर संक्रमण के लिए कई मोर्चों पर काम कर रहा है। LNG की लागत डीजल की तुलना में कम होने के कारण इसका आंशिक उपयोग भी परिचालन व्यय में उल्लेखनीय बचत कर सकता है।
आर्थिक और रणनीतिक लाभ
LNG ड्यूल-फ्यूल प्रणाली से डीजल की खपत में कमी के साथ-साथ आयात खर्च में भी कटौती होने की संभावना है। परीक्षण के दौरान प्राप्त आंकड़ों के आधार पर लगभग ₹25 लाख प्रति DPC प्रति वर्ष की बचत का अनुमान लगाया गया है।
इसके अलावा, यह तकनीक विदेशी मुद्रा संरक्षण के नज़रिए से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी डीजल ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के ज़रिए पूरा करता है। LNG के घरेलू या कम लागत वाले आयात स्रोतों से ईंधन खर्च में और कमी लाई जा सकती है।
भविष्य की राह और व्यापक संभावनाएँ
भारतीय रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक को भविष्य में और अधिक DPC तथा रेल इंजनों पर लागू किया जा सकता है। यह पहल रेलवे के उस दीर्घकालिक लक्ष्य से जुड़ी है, जिसमें 2030 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन हासिल करने की महत्वाकांक्षा शामिल है।
LNG ड्यूल-फ्यूल प्रणाली का डिज़ाइन इस तरह किया गया है कि पारंपरिक डीजल इंजन की शक्ति, विश्वसनीयता और परिचालन क्षमता में कोई कमी न आए। यह भारत के रेल इतिहास में ऊर्जा विविधीकरण का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जिसकी सफलता आने वाले वर्षों में रेलवे की हरित रणनीति को नई दिशा दे सकती है।