भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने पूरे किए 1,200 किमी, बचाए 3,200 लीटर डीजल
सारांश
मुख्य बातें
भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन ने 1,200 किलोमीटर से अधिक का सफर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिसके दौरान 3,200 लीटर से अधिक डीजल की बचत दर्ज की गई। रेलवे मंत्रालय ने 25 जुलाई 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी। यह 10-कोच मॉडल संचालन के दौरान केवल जलवाष्प उत्सर्जित करता है और इसे देश की सबसे स्वच्छ रेल प्रोपल्शन तकनीक बताया जा रहा है।
तकनीकी विशेषताएँ
रेलवे मंत्रालय के अनुसार, इस ट्रेन में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक प्रक्रिया से ट्रेन के भीतर ही बिजली उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया का एकमात्र उप-उत्पाद जलवाष्प है, जिससे टेलपाइप कार्बन उत्सर्जन शून्य रहता है।
ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार लगाई गई हैं, जो कुल मिलाकर 2,400 किलोवाट की शक्ति प्रदान करती हैं। इन्हें लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियों और हाइड्रोजन सिलेंडरों का भी सहयोग मिलता है। ग्रीन हाइड्रोजन को 500 बार तक के दबाव पर संग्रहित किया गया है, जबकि आपूर्ति 350 बार के दबाव पर होती है। ट्रेन की कुल हाइड्रोजन भंडारण क्षमता लगभग 3,000 किलोग्राम है।
सुरक्षा प्रणाली
मंत्रालय ने बताया कि ट्रेन में कई स्वतंत्र सुरक्षा प्रणालियाँ स्थापित की गई हैं, जो गैस रिसाव, अत्यधिक गर्मी, आग और धुएँ का तत्काल पता लगा सकती हैं। इसके साथ ही ऑटोमैटिक शट-ऑफ सिस्टम, निरंतर वेंटिलेशन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया है। सभी आवश्यक तकनीकी परीक्षण भी पूरे किए जा चुके हैं।
परिचालन और अगला चरण
जींद और सोनीपत के बीच सफल संचालन के बाद, मंत्रालय ने घोषणा की है कि शीघ्र ही इस ट्रेन का दिल्ली रूट पर भी ट्रायल शुरू किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय रेलवे 2030 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है।
रेल मंत्री की प्रतिक्रिया
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत ने इस स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) राइट्स अपने पास सुरक्षित रखे हैं, जिससे भविष्य में इस तकनीक का निर्यात भी संभव होगा। उन्होंने कहा, 'रेलवे ने परिवहन क्षेत्र के लिए पूरी तरह स्वदेशी 2,400 किलोवाट क्षमता वाला हाइड्रोजन प्रोपल्शन सिस्टम विकसित किया है, जिसे इस ट्रेन में लगाया गया है। यह तकनीक पूरी तरह स्वदेशी है और 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को साकार करती है।'
वैष्णव ने यह भी कहा कि हाइड्रोजन केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में भविष्य के प्रमुख ईंधन के रूप में उभर रहा है और भारतीय रेलवे इसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कर रहा है। मंत्रालय के अनुसार, इस उपलब्धि ने देश में स्वदेशी हाइड्रोजन रेल इकोसिस्टम की नींव रखी है और भारत को स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाया है।