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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने पूरे किए 1,200 किमी, बचाए 3,200 लीटर डीजल

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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने पूरे किए 1,200 किमी, बचाए 3,200 लीटर डीजल

सारांश

भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन ने 1,200 किमी का सफर पूरा कर 3,200 लीटर डीजल बचाया — यह सिर्फ एक तकनीकी मील का पत्थर नहीं, बल्कि IP राइट्स अपने पास रखने और निर्यात की संभावना के साथ 'आत्मनिर्भर भारत' की रेल क्रांति का पहला अध्याय है।

मुख्य बातें

भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन ने 1,200 किलोमीटर से अधिक का सफर सफलतापूर्वक पूरा किया।
परिचालन के दौरान 3,200 लीटर से अधिक डीजल की बचत दर्ज; टेलपाइप कार्बन उत्सर्जन शून्य ।
ट्रेन में 2,400 किलोवाट की दो हाइड्रोजन पावर कार; 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन भंडारण क्षमता।
जींद-सोनीपत रूट पर सफल ट्रायल के बाद अब दिल्ली रूट पर परीक्षण की तैयारी।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि तकनीक के IP राइट्स भारत के पास; भविष्य में निर्यात संभव।

भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन ने 1,200 किलोमीटर से अधिक का सफर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिसके दौरान 3,200 लीटर से अधिक डीजल की बचत दर्ज की गई। रेलवे मंत्रालय ने 25 जुलाई 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी। यह 10-कोच मॉडल संचालन के दौरान केवल जलवाष्प उत्सर्जित करता है और इसे देश की सबसे स्वच्छ रेल प्रोपल्शन तकनीक बताया जा रहा है।

तकनीकी विशेषताएँ

रेलवे मंत्रालय के अनुसार, इस ट्रेन में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक प्रक्रिया से ट्रेन के भीतर ही बिजली उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया का एकमात्र उप-उत्पाद जलवाष्प है, जिससे टेलपाइप कार्बन उत्सर्जन शून्य रहता है।

ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार लगाई गई हैं, जो कुल मिलाकर 2,400 किलोवाट की शक्ति प्रदान करती हैं। इन्हें लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियों और हाइड्रोजन सिलेंडरों का भी सहयोग मिलता है। ग्रीन हाइड्रोजन को 500 बार तक के दबाव पर संग्रहित किया गया है, जबकि आपूर्ति 350 बार के दबाव पर होती है। ट्रेन की कुल हाइड्रोजन भंडारण क्षमता लगभग 3,000 किलोग्राम है।

सुरक्षा प्रणाली

मंत्रालय ने बताया कि ट्रेन में कई स्वतंत्र सुरक्षा प्रणालियाँ स्थापित की गई हैं, जो गैस रिसाव, अत्यधिक गर्मी, आग और धुएँ का तत्काल पता लगा सकती हैं। इसके साथ ही ऑटोमैटिक शट-ऑफ सिस्टम, निरंतर वेंटिलेशन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया है। सभी आवश्यक तकनीकी परीक्षण भी पूरे किए जा चुके हैं।

परिचालन और अगला चरण

जींद और सोनीपत के बीच सफल संचालन के बाद, मंत्रालय ने घोषणा की है कि शीघ्र ही इस ट्रेन का दिल्ली रूट पर भी ट्रायल शुरू किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय रेलवे 2030 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है।

रेल मंत्री की प्रतिक्रिया

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत ने इस स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) राइट्स अपने पास सुरक्षित रखे हैं, जिससे भविष्य में इस तकनीक का निर्यात भी संभव होगा। उन्होंने कहा, 'रेलवे ने परिवहन क्षेत्र के लिए पूरी तरह स्वदेशी 2,400 किलोवाट क्षमता वाला हाइड्रोजन प्रोपल्शन सिस्टम विकसित किया है, जिसे इस ट्रेन में लगाया गया है। यह तकनीक पूरी तरह स्वदेशी है और 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को साकार करती है।'

वैष्णव ने यह भी कहा कि हाइड्रोजन केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में भविष्य के प्रमुख ईंधन के रूप में उभर रहा है और भारतीय रेलवे इसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कर रहा है। मंत्रालय के अनुसार, इस उपलब्धि ने देश में स्वदेशी हाइड्रोजन रेल इकोसिस्टम की नींव रखी है और भारत को स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

200 किलोमीटर का यह आँकड़ा प्रभावशाली है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब यह ट्रेन घनी आबादी वाले दिल्ली रूट पर व्यावसायिक पैमाने पर चलेगी। ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की लागत अभी भी डीजल से कहीं अधिक है, और यह सवाल अनुत्तरित है कि राष्ट्रीय स्तर पर हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कब और कैसे खड़ा होगा। IP राइट्स अपने पास रखना और निर्यात की संभावना का उल्लेख एक सकारात्मक कदम है, लेकिन जर्मनी और चीन जैसे देश इस तकनीक में वर्षों से आगे हैं — भारत को वैश्विक बाज़ार में जगह बनाने के लिए केवल पायलट ट्रायल से आगे जाना होगा।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन क्या है और यह कैसे काम करती है?
यह भारतीय रेलवे द्वारा विकसित एक 10-कोच स्वदेशी ट्रेन है, जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न करती है। इस प्रक्रिया का एकमात्र उप-उत्पाद जलवाष्प है, जिससे टेलपाइप कार्बन उत्सर्जन शून्य रहता है।
हाइड्रोजन ट्रेन ने अब तक कितना सफर तय किया और कितना डीजल बचाया?
रेलवे मंत्रालय के अनुसार, ट्रेन ने 1,200 किलोमीटर से अधिक का सफर पूरा किया है और इस दौरान 3,200 लीटर से अधिक डीजल की बचत हुई है। जींद और सोनीपत के बीच यह परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
हाइड्रोजन ट्रेन का दिल्ली रूट पर ट्रायल कब शुरू होगा?
रेलवे मंत्रालय ने कहा है कि जींद-सोनीपत रूट पर सफल संचालन के बाद शीघ्र ही दिल्ली रूट पर भी ट्रायल शुरू किया जाएगा। हालाँकि, इसकी कोई निश्चित तिथि अभी तक घोषित नहीं की गई है।
इस ट्रेन की तकनीक कितनी सुरक्षित है?
ट्रेन में कई स्वतंत्र सुरक्षा प्रणालियाँ लगाई गई हैं, जो गैस रिसाव, अत्यधिक गर्मी, आग और धुएँ का तत्काल पता लगा सकती हैं। ऑटोमैटिक शट-ऑफ सिस्टम, निरंतर वेंटिलेशन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया है।
क्या भारत इस हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक का निर्यात कर सकेगा?
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत ने इस तकनीक के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) राइट्स अपने पास सुरक्षित रखे हैं, जिससे भविष्य में इसका निर्यात संभव होगा। यह पूरी तरह स्वदेशी 2,400 किलोवाट हाइड्रोजन प्रोपल्शन प्रणाली है।
राष्ट्र प्रेस
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