24 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: जींद-सोनीपत रूट पर 5 दिन में 900 किमी, जीरो उत्सर्जन का नया रिकॉर्ड

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: जींद-सोनीपत रूट पर 5 दिन में 900 किमी, जीरो उत्सर्जन का नया रिकॉर्ड

सारांश

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन ने जींद-सोनीपत रूट पर 5 दिनों में 900 किमी तय कर इतिहास रचा — जीरो कार्बन उत्सर्जन के साथ, और किराया महज ₹10–₹25। यह सफलता देश के हरित परिवहन भविष्य का पहला ठोस प्रमाण है।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई 2026 को भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल पैसेंजर ट्रेन का उद्घाटन किया।
ट्रेन ने पहले 5 दिनों में जींद-सोनीपत रूट पर लगभग 900 किलोमीटर की दूरी तय की।
10-कोच ट्रेन में दो 1,200-किलोवाट हाइड्रोजन-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम लगे हैं; उत्सर्जन में केवल जलवाष्प।
टिकट किराया सामान्य डीएमयू सेवाओं के बराबर — ₹10 से ₹25 के बीच।
जींद में स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग सुविधा स्थापित; राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत संचालित।

भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल पैसेंजर ट्रेन ने जींद-सोनीपत रूट पर अपने शुरुआती व्यावसायिक संचालन में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। 17 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित इस ट्रेन ने पहले पाँच दिनों में लगभग 900 किलोमीटर की दूरी तय की — और इस पूरे सफर में उत्सर्जन के नाम पर केवल जलवाष्प और ऊष्मा निकली। यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करती है जो हाइड्रोजन रेल प्रौद्योगिकी का सफल व्यावसायिक संचालन कर रहे हैं।

तकनीकी संरचना: कैसे चलती है यह ट्रेन

पारंपरिक डीजल इंजन की जगह इस 10-कोच ट्रेन में दो 1,200-किलोवाट हाइड्रोजन-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम लगाए गए हैं। ट्रेन में स्थापित फ्यूल सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक अभिक्रिया से विद्युत उत्पन्न करते हैं, जिससे ट्रेन संचालित होती है। इस प्रक्रिया में केवल जलवाष्प और ऊष्मा उप-उत्पाद के रूप में निकलती है — कोई कार्बन उत्सर्जन नहीं। यह जीरो-एमिशन तकनीक डीजल और पारंपरिक विद्युत-चालित ट्रेनों की तुलना में ऊर्जा खपत को उल्लेखनीय रूप से कम करती है।

किराया: आम यात्री पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं

अत्याधुनिक तकनीक के बावजूद यात्रियों के लिए टिकट किराया सामान्य डीएमयू (डीजल मल्टीपल यूनिट) सेवाओं के बराबर रखा गया है — ₹10 से ₹25 के बीच। इस नीतिगत निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हरित और टिकाऊ यात्रा का विकल्प केवल संपन्न वर्ग तक सीमित न रहे, बल्कि आम यात्री भी इसका लाभ उठा सकें।

स्वदेशी अवसंरचना: जींद में बना रीफ्यूलिंग केंद्र

जींद में विशेष रूप से निर्मित एक स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग सुविधा इस ट्रेन के दीर्घकालिक संचालन की रीढ़ है। यह सुविधा न केवल ईंधन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करती है, बल्कि आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाकर भारतीय रेलवे की परिचालन लागत को भी नियंत्रित रखती है। गौरतलब है कि यह पूरा ढाँचा राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत विकसित किया गया है।

राष्ट्रीय महत्व और व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने 2070 नेट-ज़ीरो लक्ष्य की दिशा में रेलवे क्षेत्र को हरित बनाने पर ज़ोर दे रहा है। जींद-सोनीपत रूट की सफलता देश के अन्य गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों पर हाइड्रोजन ट्रेनों की तैनाती के लिए एक व्यावहारिक खाका प्रस्तुत करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह मॉडल बड़े पैमाने पर दोहराया जाए तो भारतीय रेलवे डीजल आयात पर होने वाले भारी खर्च से मुक्ति पा सकती है।

आगे की राह

जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन की प्रारंभिक सफलता भारत के लिए एक विश्वसनीय हरित परिवहन ब्लूप्रिंट के रूप में उभरी है। आने वाले महीनों में इस परियोजना के विस्तार और अन्य रूटों पर इसकी संभावनाओं पर निर्णय अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब इसे देश के सैकड़ों गैर-विद्युतीकृत रूटों पर बड़े पैमाने पर उतारा जाएगा। हाइड्रोजन उत्पादन की लागत और ग्रीन हाइड्रोजन की उपलब्धता अभी भी बड़ी चुनौतियाँ हैं — यदि हाइड्रोजन जीवाश्म ईंधन से बनाई जाए तो 'जीरो एमिशन' का दावा केवल ट्रेन तक सीमित रहता है, पूरी आपूर्ति श्रृंखला तक नहीं। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि रीफ्यूलिंग अवसंरचना कितनी तेज़ी से और किस ऊर्जा स्रोत से विकसित होती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन कहाँ और कब शुरू हुई?
भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल पैसेंजर ट्रेन 17 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जींद-सोनीपत रूट पर शुरू की गई। इसने पहले पाँच दिनों में लगभग 900 किलोमीटर की दूरी तय की।
हाइड्रोजन ट्रेन कैसे काम करती है और यह पर्यावरण के लिए कैसे फायदेमंद है?
ट्रेन में लगे फ्यूल सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक अभिक्रिया से विद्युत उत्पन्न करते हैं, जिससे ट्रेन चलती है और उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प निकलती है। इससे कोई कार्बन उत्सर्जन नहीं होता, जो इसे डीजल ट्रेनों की तुलना में पूरी तरह जीरो-एमिशन विकल्प बनाता है।
जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन का टिकट किराया कितना है?
इस ट्रेन का टिकट किराया सामान्य डीएमयू (डीजल मल्टीपल यूनिट) सेवाओं के बराबर रखा गया है — ₹10 से ₹25 के बीच। उन्नत तकनीक के बावजूद यात्रियों पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला गया है।
इस हाइड्रोजन ट्रेन की तकनीकी विशेषताएँ क्या हैं?
यह 10-कोच ट्रेन दो 1,200-किलोवाट हाइड्रोजन-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम से संचालित होती है। जींद में एक स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग सुविधा भी स्थापित की गई है जो इसके दीर्घकालिक संचालन को सुनिश्चित करती है।
यह ट्रेन भारत के हरित हाइड्रोजन मिशन से कैसे जुड़ी है?
जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का व्यावहारिक क्रियान्वयन है। यह परियोजना डीजल आयात पर निर्भरता घटाने और 2070 के नेट-ज़ीरो लक्ष्य की दिशा में रेलवे क्षेत्र को हरित बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 दिन पहले
  2. 6 दिन पहले
  3. 6 दिन पहले
  4. 6 दिन पहले
  5. 6 दिन पहले
  6. 6 दिन पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 1 सप्ताह पहले