भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: जींद-सोनीपत रूट पर 5 दिन में 900 किमी, जीरो उत्सर्जन का नया रिकॉर्ड
सारांश
मुख्य बातें
भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल पैसेंजर ट्रेन ने जींद-सोनीपत रूट पर अपने शुरुआती व्यावसायिक संचालन में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। 17 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित इस ट्रेन ने पहले पाँच दिनों में लगभग 900 किलोमीटर की दूरी तय की — और इस पूरे सफर में उत्सर्जन के नाम पर केवल जलवाष्प और ऊष्मा निकली। यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करती है जो हाइड्रोजन रेल प्रौद्योगिकी का सफल व्यावसायिक संचालन कर रहे हैं।
तकनीकी संरचना: कैसे चलती है यह ट्रेन
पारंपरिक डीजल इंजन की जगह इस 10-कोच ट्रेन में दो 1,200-किलोवाट हाइड्रोजन-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम लगाए गए हैं। ट्रेन में स्थापित फ्यूल सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक अभिक्रिया से विद्युत उत्पन्न करते हैं, जिससे ट्रेन संचालित होती है। इस प्रक्रिया में केवल जलवाष्प और ऊष्मा उप-उत्पाद के रूप में निकलती है — कोई कार्बन उत्सर्जन नहीं। यह जीरो-एमिशन तकनीक डीजल और पारंपरिक विद्युत-चालित ट्रेनों की तुलना में ऊर्जा खपत को उल्लेखनीय रूप से कम करती है।
किराया: आम यात्री पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं
अत्याधुनिक तकनीक के बावजूद यात्रियों के लिए टिकट किराया सामान्य डीएमयू (डीजल मल्टीपल यूनिट) सेवाओं के बराबर रखा गया है — ₹10 से ₹25 के बीच। इस नीतिगत निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हरित और टिकाऊ यात्रा का विकल्प केवल संपन्न वर्ग तक सीमित न रहे, बल्कि आम यात्री भी इसका लाभ उठा सकें।
स्वदेशी अवसंरचना: जींद में बना रीफ्यूलिंग केंद्र
जींद में विशेष रूप से निर्मित एक स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग सुविधा इस ट्रेन के दीर्घकालिक संचालन की रीढ़ है। यह सुविधा न केवल ईंधन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करती है, बल्कि आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाकर भारतीय रेलवे की परिचालन लागत को भी नियंत्रित रखती है। गौरतलब है कि यह पूरा ढाँचा राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत विकसित किया गया है।
राष्ट्रीय महत्व और व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने 2070 नेट-ज़ीरो लक्ष्य की दिशा में रेलवे क्षेत्र को हरित बनाने पर ज़ोर दे रहा है। जींद-सोनीपत रूट की सफलता देश के अन्य गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों पर हाइड्रोजन ट्रेनों की तैनाती के लिए एक व्यावहारिक खाका प्रस्तुत करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह मॉडल बड़े पैमाने पर दोहराया जाए तो भारतीय रेलवे डीजल आयात पर होने वाले भारी खर्च से मुक्ति पा सकती है।
आगे की राह
जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन की प्रारंभिक सफलता भारत के लिए एक विश्वसनीय हरित परिवहन ब्लूप्रिंट के रूप में उभरी है। आने वाले महीनों में इस परियोजना के विस्तार और अन्य रूटों पर इसकी संभावनाओं पर निर्णय अपेक्षित है।