जींद से चली देश की पहली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन, PM मोदी ने दिखाई हरी झंडी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 जुलाई 2025 को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से भारत की पहली हाइड्रोजन-चालित पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जींद से सोनीपत के बीच शुरू हुई इस सेवा ने भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। स्थानीय निवासियों ने इस ऐतिहासिक पहल का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
मुख्य घटनाक्रम
यह ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच संचालित होगी और हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक पर आधारित है, जो परंपरागत डीज़ल या बिजली-चालित ट्रेनों की तुलना में पर्यावरण की दृष्टि से कहीं अधिक स्वच्छ विकल्प है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस ट्रेन का किराया अन्य सामान्य ट्रेनों की तुलना में कम रखा गया है, जिससे आम यात्रियों को सीधी आर्थिक राहत मिलेगी।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासी कैप्टन राठी ने कहा कि जींद जिले से हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन शुरू होना पूरे जिले के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा, 'आज जींद पूरे भारत में चर्चा का केंद्र बन गया है और यह उपलब्धि इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है।' उनका यह भी मानना था कि भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में भी जींद और हाइड्रोजन ट्रेन से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे।
एक अन्य स्थानीय निवासी पाला राम ने कहा कि इस ट्रेन के संचालन से जींद का नाम न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी चर्चित हो गया है। उन्होंने कहा कि कम किराये के कारण आम यात्रियों को आर्थिक राहत मिलेगी। राम निवास ने भी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन जैसी आधुनिक और स्वच्छ तकनीक भविष्य में भारतीय रेलवे को नई दिशा देगी।
आम जनता पर असर
स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि इस ट्रेन के संचालन से यात्रियों का समय बचेगा और यात्रा अधिक सुविधाजनक होगी। हाइड्रोजन-चालित तकनीक होने के कारण यह ट्रेन प्रदूषण मुक्त परिवहन का विकल्प है, जो पर्यावरण के प्रति जागरूक यात्रियों के लिए भी अनुकूल है। जींद-सोनीपत मार्ग पर इस सेवा से दोनों जिलों के बीच संपर्क और मजबूत होगा।
भारतीय रेलवे की हरित पहल
गौरतलब है कि भारतीय रेलवे ने 2030 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। हाइड्रोजन ट्रेन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह ऐसे समय में आया है जब रेलवे डीज़ल पर अपनी निर्भरता कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ने की कोशिश में है। जींद से शुरू हुई यह पहल भविष्य में अन्य मार्गों पर भी इस तकनीक के विस्तार का आधार बन सकती है।
क्या होगा आगे
स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना की सफलता के आधार पर हाइड्रोजन ट्रेन सेवा को अन्य राज्यों और मार्गों तक विस्तारित किया जा सकता है। जींद इस ऐतिहासिक पहल के केंद्र के रूप में उभरा है और आने वाले समय में यह शहर भारत की हरित रेलवे क्रांति का प्रतीक बन सकता है।