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जींद से चली देश की पहली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन, PM मोदी ने दिखाई हरी झंडी

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जींद से चली देश की पहली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन, PM मोदी ने दिखाई हरी झंडी

सारांश

जींद से सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन दौड़ी — यह सिर्फ एक नई ट्रेन नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे के 2030 नेट-ज़ीरो लक्ष्य की दिशा में एक ठोस कदम है। हरियाणा का यह छोटा-सा शहर अब देश की हरित परिवहन क्रांति का प्रतीक बन गया है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 18 जुलाई 2025 को जींद रेलवे स्टेशन, हरियाणा से देश की पहली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई।
यह ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच संचालित होगी और हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक पर आधारित है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस ट्रेन का किराया सामान्य ट्रेनों की तुलना में कम रखा गया है।
यह पहल भारतीय रेलवे के 2030 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
स्थानीय निवासियों — कैप्टन राठी , पाला राम और राम निवास — ने इस पहल का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 जुलाई 2025 को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से भारत की पहली हाइड्रोजन-चालित पैसेंजर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जींद से सोनीपत के बीच शुरू हुई इस सेवा ने भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। स्थानीय निवासियों ने इस ऐतिहासिक पहल का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

मुख्य घटनाक्रम

यह ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच संचालित होगी और हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक पर आधारित है, जो परंपरागत डीज़ल या बिजली-चालित ट्रेनों की तुलना में पर्यावरण की दृष्टि से कहीं अधिक स्वच्छ विकल्प है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस ट्रेन का किराया अन्य सामान्य ट्रेनों की तुलना में कम रखा गया है, जिससे आम यात्रियों को सीधी आर्थिक राहत मिलेगी।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

स्थानीय निवासी कैप्टन राठी ने कहा कि जींद जिले से हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन शुरू होना पूरे जिले के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा, 'आज जींद पूरे भारत में चर्चा का केंद्र बन गया है और यह उपलब्धि इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है।' उनका यह भी मानना था कि भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में भी जींद और हाइड्रोजन ट्रेन से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे।

एक अन्य स्थानीय निवासी पाला राम ने कहा कि इस ट्रेन के संचालन से जींद का नाम न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी चर्चित हो गया है। उन्होंने कहा कि कम किराये के कारण आम यात्रियों को आर्थिक राहत मिलेगी। राम निवास ने भी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन जैसी आधुनिक और स्वच्छ तकनीक भविष्य में भारतीय रेलवे को नई दिशा देगी।

आम जनता पर असर

स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि इस ट्रेन के संचालन से यात्रियों का समय बचेगा और यात्रा अधिक सुविधाजनक होगी। हाइड्रोजन-चालित तकनीक होने के कारण यह ट्रेन प्रदूषण मुक्त परिवहन का विकल्प है, जो पर्यावरण के प्रति जागरूक यात्रियों के लिए भी अनुकूल है। जींद-सोनीपत मार्ग पर इस सेवा से दोनों जिलों के बीच संपर्क और मजबूत होगा।

भारतीय रेलवे की हरित पहल

गौरतलब है कि भारतीय रेलवे ने 2030 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। हाइड्रोजन ट्रेन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह ऐसे समय में आया है जब रेलवे डीज़ल पर अपनी निर्भरता कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ने की कोशिश में है। जींद से शुरू हुई यह पहल भविष्य में अन्य मार्गों पर भी इस तकनीक के विस्तार का आधार बन सकती है।

क्या होगा आगे

स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना की सफलता के आधार पर हाइड्रोजन ट्रेन सेवा को अन्य राज्यों और मार्गों तक विस्तारित किया जा सकता है। जींद इस ऐतिहासिक पहल के केंद्र के रूप में उभरा है और आने वाले समय में यह शहर भारत की हरित रेलवे क्रांति का प्रतीक बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि यह पायलट परियोजना कितनी तेज़ी से और कितने व्यापक पैमाने पर दोहराई जाती है। भारतीय रेलवे के विशाल नेटवर्क में हाइड्रोजन तकनीक को व्यापक रूप से अपनाने के लिए हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण और रिफ्यूलिंग बुनियादी ढाँचे में भारी निवेश की ज़रूरत होगी — जिसका ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई देश हाइड्रोजन ट्रेनों के पायलट प्रोजेक्ट के बाद लागत और स्केलेबिलिटी की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। जींद की यह शुरुआत उत्साहजनक है, पर इसे सफल तभी माना जाएगा जब यह मॉडल पूरे देश में फैले।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की पहली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन कहाँ से शुरू हुई?
भारत की पहली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से शुरू हुई। PM नरेंद्र मोदी ने 18 जुलाई 2025 को इसे हरी झंडी दिखाई और यह जींद से सोनीपत के बीच संचालित होगी।
हाइड्रोजन ट्रेन सामान्य ट्रेनों से कैसे अलग है?
हाइड्रोजन ट्रेन हाइड्रोजन ईंधन सेल तकनीक पर चलती है, जो डीज़ल या बिजली की बजाय हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में उपयोग करती है और उत्सर्जन के रूप में केवल जलवाष्प छोड़ती है। यह पर्यावरण के लिए अधिक स्वच्छ विकल्प है और स्थानीय निवासियों के अनुसार इसका किराया भी सामान्य ट्रेनों से कम है।
जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन से यात्रियों को क्या फायदा होगा?
इस ट्रेन से यात्रियों का समय बचेगा, यात्रा अधिक सुविधाजनक होगी और किराया सामान्य ट्रेनों की तुलना में कम होने से आम यात्रियों को आर्थिक राहत मिलेगी। साथ ही, यह एक प्रदूषण-मुक्त परिवहन विकल्प है।
भारतीय रेलवे का हाइड्रोजन ट्रेन से क्या लक्ष्य है?
भारतीय रेलवे ने 2030 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। हाइड्रोजन ट्रेन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो डीज़ल पर निर्भरता कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ने की रेलवे की नीति का हिस्सा है।
क्या भविष्य में अन्य मार्गों पर भी हाइड्रोजन ट्रेन चलेगी?
स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि जींद-सोनीपत पायलट परियोजना की सफलता के आधार पर इस तकनीक को अन्य राज्यों और मार्गों तक विस्तारित किया जा सकता है। हालाँकि, इस संबंध में सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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