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जम्मू-कश्मीर: अनंतनाग में झेलम नदी में दो भाइयों की डूबने से मृत्यु, शव मिले

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जम्मू-कश्मीर: अनंतनाग में झेलम नदी में दो भाइयों की डूबने से मृत्यु, शव मिले

सारांश

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में झेलम नदी में दो भाइयों के डूबने की घटना ने सभी को हिला दिया है। इस घटना के बाद बचाव अभियान चलाया गया, जिसमें दोनों भाइयों के शव बरामद कर लिए गए। जानें इस दुखद घटना के पीछे की कहानी।

मुख्य बातें

अनंतनाग में नदी में डूबने की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
पुलिस और एसडीआरएफ का सहयोग महत्वपूर्ण है।
स्थानिक निवासियों को बचाव अभियानों में शामिल होने की आवश्यकता है।
नदी किनारे सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
अवसाद के प्रभाव में युवाओं के लिए सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं।

श्रीनगर, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस) जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के बिजबेहारा क्षेत्र में झेलम नदी में दो भाई डूब गए। यह जानकारी सोमवार को पुलिस द्वारा दी गई।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि बिजबेहारा के बादशाहबाग क्षेत्र में झेलम नदी में गलती से फिसल जाने के कारण दोनों भाइयों की डूबने से मृत्यु हुई। उन्होंने आगे बताया कि दोनों भाइयों के शव बरामद कर लिए गए हैं।

मृतकों की पहचान माजिद अहमद मलिक और शाहिद अहमद मलिक के रूप में हुई है, जो जबलीपोरा के निवासी थे।

एक अधिकारी ने कहा, "आज नहाते समय उनका संतुलन बिगड़ गया, वे फिसल गए और नदी के गहरे पानी में गिर गए, जिसके बाद वे लापता हो गए। घटना के तुरंत बाद, बिजबेहारा की एक पुलिस टीम ने स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर लापता भाइयों को खोजने के लिए एक बड़ा बचाव अभियान शुरू किया। बाद में पुलिस और एसडीआरएफ कर्मियों की मदद से स्थानीय लोगों के सहयोग से शव बरामद कर लिए गए।"

हाल के वर्षों में घाटी में झेलम नदी में डूबने की कई घटनाएँ हुई हैं, जिनमें से लगभग सभी घटनाएँ वसंत के अंत, गर्मियों और पतझड़ के महीनों में हुई हैं। डूबने की घटनाएँ अक्सर कपड़े धोते समय, नहाते समय या नदी के किनारों पर गलती से फिसलने के कारण होती हैं।

इससे पहले, एसडीआरएफ और रिवर पुलिस ने 12 अप्रैल को श्रीनगर के गौकदल स्थित बसंत बाग के पास से स्थानीय निवासी अयाज अहमद का शव बरामद किया था। इसी तरह, 8 जुलाई 2025 को पीरनिया, बोनियार में एक लड़की झेलम जलाशय (लोअर झेलम हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट) में कूद गई थी।

राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और स्थानीय पुलिस को तलाशी अभियानों के लिए नियमित रूप से तैनात किया जाता है, लेकिन नदी के तेज बहाव और कठिन परिस्थितियाँ बचाव कार्यों को और भी चुनौतीपूर्ण बना देती हैं।

अधिकारियों और स्थानीय रिपोर्टों ने नदी के किनारे सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया है, क्योंकि फिसलने के कारण कई घटनाएँ हुई हैं।

अवसाद या नशे के प्रभाव में आए युवाओं द्वारा आत्महत्या के प्रयासों को रोकने के लिए एक एहतियाती उपाय के तौर पर, श्रीनगर शहर में झेलम नदी पर बने सभी पुलों के दोनों ओर ऊँची बाड़ लगाई गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या भाइयों की पहचान हो गई है?
हाँ, मृतकों की पहचान माजिद अहमद मलिक और शाहिद अहमद मलिक के रूप में हुई है।
बचाव अभियान में कौन शामिल था?
बचाव अभियान में पुलिस और एसडीआरएफ कर्मियों ने स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर काम किया।
क्या यह पहली बार है कि झेलम नदी में डूबने की घटना हुई है?
नहीं, हाल के वर्षों में इस नदी में कई डूबने की घटनाएँ हुई हैं।
क्या प्रशासन ने नदी किनारे सुरक्षा के लिए कोई कदम उठाए हैं?
हाँ, प्रशासन ने नदी के किनारे सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
क्या इस घटना से पहले भी कोई अन्य डूबने की घटना हुई थी?
हाँ, इससे पहले भी कई डूबने की घटनाएँ हो चुकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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