13 अक्टूबर 2026
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पल्लीकरनई वेटलैंड का सुरक्षा क्षेत्र 8,397 एकड़ से घटाकर 316 एकड़: अंबुमणि रामदास ने अथॉरिटी को घेरा

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पल्लीकरनई वेटलैंड का सुरक्षा क्षेत्र 8,397 एकड़ से घटाकर 316 एकड़: अंबुमणि रामदास ने अथॉरिटी को घेरा

सारांश

पल्लीकरनई का सुरक्षा-कवच 8,397 एकड़ से सिमटकर 316 एकड़ — और नोटिफिकेशन दस महीने से लंबित। अंबुमणि रामदास का सीधा सवाल: अथॉरिटी डेवलपर्स के लिए काम कर रही है या जनता के लिए? चेन्नई की प्राकृतिक बाढ़-रक्षा पंक्ति एक बार फिर दाँव पर।

मुख्य बातें

पल्लीकरनई वेटलैंड का 'जोन ऑफ इन्फ्लुएंस' 8,397 एकड़ से घटाकर 316 एकड़ करने की योजना को तमिलनाडु राज्य वेटलैंड अथॉरिटी ने मद्रास उच्च न्यायालय को बताया।
पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने 13 अक्टूबर 2026 को अथॉरिटी पर निजी डेवलपर्स के हित में काम करने का आरोप लगाया।
सर्वोच्च न्यायालय के 11 दिसंबर 2024 के वेटलैंड-नोटिफिकेशन निर्देश पर दस महीने से अधिक समय बाद भी अमल नहीं।
इसरो वेटलैंड एटलस 2021 के अनुसार तमिलनाडु में 2.25 हेक्टेयर से बड़े 26,883 वेटलैंड्स हैं जिनकी सैटेलाइट मैपिंग संभव है।
पल्लीकरनई मार्श कभी 15,000 एकड़ में फैला था, अब कथित अतिक्रमण के कारण सिमटकर 1,725 एकड़ रह गया है।
अंबुमणि ने 3 किलोमीटर लंबी दीवार और 2 किलोमीटर वॉकवे के निर्माण पर रोक तथा पहले बने ढाँचों को गिराने की माँग की।

पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने 13 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु राज्य वेटलैंड अथॉरिटी पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि वह पल्लीकरनई मार्श की पारिस्थितिक सुरक्षा के बजाय निजी डेवलपर्स के व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता दे रही है। अथॉरिटी ने मद्रास उच्च न्यायालय को सूचित किया था कि 30 सितंबर 2026 को हुई अंतर-विभागीय बैठक के बाद वेटलैंड का 'जोन ऑफ इन्फ्लुएंस' 8,397 एकड़ से घटाकर मात्र 316 एकड़ कर दिया जाएगा।

मुख्य घटनाक्रम

यह विवाद उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया जो निजी निर्माण कंपनियों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के 24 सितंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती देते हुए दायर की थीं, जिसमें दलदली इलाके के एक किलोमीटर के दायरे में सभी निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाई गई थी। अथॉरिटी द्वारा सुरक्षित क्षेत्र में इस भारी कटौती का डेवलपर्स ने खुले तौर पर स्वागत किया, जिसे अंबुमणि ने संदेह की नज़र से देखा।

रामदास ने सवाल उठाया कि अगर अथॉरिटी इतनी तेज़ी से जोन का आकार घटा सकती है, तो सर्वोच्च न्यायालय के 11 दिसंबर 2024 के उस निर्देश को लागू करने में नाकाम क्यों रही जिसमें वेटलैंड की सीमाएँ तय कर उन्हें नोटिफाई करने का आदेश दिया गया था? उन्होंने पूछा, 'क्या अथॉरिटी सरकार और लोगों के लिए काम कर रही है, या निजी निर्माण कंपनियों के लिए?'

नोटिफिकेशन में देरी पर आरोप

अंबुमणि ने याद दिलाया कि अथॉरिटी ने 3 दिसंबर 2025 को उच्च न्यायालय को बताया था कि पल्लीकरनई की सैटेलाइट-आधारित मैपिंग 99 प्रतिशत पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय माँगा था। उन्होंने आरोप लगाया कि उसके बावजूद दस महीने से अधिक समय गुज़रने के बाद भी नोटिफिकेशन लंबित है।

गौरतलब है कि 2016 में अथॉरिटी के गठन और 2017 में वेटलैंड संरक्षण नियम लागू होने के बाद से भी कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में बेहद सीमित प्रगति हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब चेन्नई लगातार बाढ़ के खतरों से जूझ रहा है और पर्यावरणविद् पल्लीकरनई को शहर की प्राकृतिक जल-निकासी प्रणाली का अभिन्न अंग मानते हैं।

इसरो डेटा से सर्वे की माँग

2021 के इसरो वेटलैंड एटलस का संदर्भ देते हुए अंबुमणि ने कहा कि सैटेलाइट डेटा की सहायता से तमिलनाडु के 2.25 हेक्टेयर से बड़े 26,883 वेटलैंड्स की पहचान और सीमा-निर्धारण वैज्ञानिक तरीके से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पीएमके जोन ऑफ इन्फ्लुएंस को साक्ष्य-आधारित पद्धति से तय करने और वेटलैंड की सीमाओं का पूर्ण सर्वे कर उन्हें नोटिफाई करने के पक्ष में है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे क्षेत्रों में निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय उसे विनियमित किया जाना चाहिए — जो NGT के एकमुश्त रोक वाले आदेश से एक अलग नीतिगत रुख है।

पल्लीकरनई की सिकुड़ती ज़मीन

अंबुमणि ने बताया कि पल्लीकरनई मार्श कभी अडयार नदी और बकिंघम नहर के बीच 15,000 एकड़ में फैला था और गुइंडी से सिरुसेरी तक विस्तृत था। कथित तौर पर अतिक्रमण के कारण यह सिमटकर अब मात्र 1,725 एकड़ रह गया है। यह आँकड़ा दशकों के अनियंत्रित शहरीकरण की कहानी बयान करता है।

निर्माण कार्यों पर रोक की माँग

अंबुमणि ने टीवीके सरकार से पिछली डीएमके सरकार के कार्यकाल से चली आ रही देरी समाप्त करने और अथॉरिटी को उसकी जिम्मेदारियाँ निभाने पर बाध्य करने का आग्रह किया। उन्होंने पल्लीकरनई में प्रस्तावित तीन किलोमीटर लंबी, छह फीट ऊँची सुरक्षा दीवार और दो किलोमीटर लंबे वॉकवे के निर्माण को तत्काल रोकने तथा पहले हो चुके निर्माण को ध्वस्त करने की माँग की। सभी वेटलैंड्स के लिए तत्काल नोटिफिकेशन और कानूनी संरक्षण की भी उन्होंने अपील की।

संपादकीय दृष्टिकोण

397 एकड़ से घटाकर 316 एकड़ करना — यानी मूल क्षेत्र का मात्र 3.7 प्रतिशत — एक प्रशासनिक फैसला कम और नीतिगत पीछेहट ज़्यादा लगता है, खासतौर पर तब जब यह कदम निजी निर्माण कंपनियों की अदालती चुनौती के ठीक बाद आया है। असली सवाल यह है कि जब सर्वोच्च न्यायालय का नोटिफिकेशन आदेश और इसरो का तैयार सैटेलाइट डेटा दोनों मौजूद हैं, तो अथॉरिटी की 'तकनीकी बाधाएँ' क्यों केवल संरक्षण के मामले में आती हैं — कटौती के मामले में नहीं? चेन्नई में बाढ़ के हर मौसम के बाद वेटलैंड की अहमियत पर चर्चा होती है, लेकिन जब नोटिफिकेशन की बारी आती है तो फाइलें धूल खाती रहती हैं। यह देरी महज़ लालफीताशाही नहीं, बल्कि उस शासन-संस्कृति की झलक है जहाँ पर्यावरण-सुरक्षा कानून कागज़ पर मज़बूत और ज़मीन पर कमज़ोर रहती है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पल्लीकरनई वेटलैंड का जोन ऑफ इन्फ्लुएंस क्या होता है और इसे क्यों घटाया जा रहा है?
जोन ऑफ इन्फ्लुएंस वह बफर क्षेत्र है जो वेटलैंड के आसपास निर्माण गतिविधियों को सीमित करता है ताकि उसकी पारिस्थितिकी सुरक्षित रहे। तमिलनाडु राज्य वेटलैंड अथॉरिटी ने मद्रास उच्च न्यायालय को बताया कि 30 सितंबर 2026 की अंतर-विभागीय बैठक के बाद इसे 8,397 एकड़ से घटाकर 316 एकड़ किया जाएगा, जो निजी निर्माण कंपनियों की याचिकाओं के बाद आया निर्णय है।
अंबुमणि रामदास ने अथॉरिटी पर क्या आरोप लगाए हैं?
पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने आरोप लगाया है कि अथॉरिटी जोन घटाने में तो फुर्ती दिखाती है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के 11 दिसंबर 2024 के वेटलैंड-नोटिफिकेशन आदेश को दस महीने से अधिक समय बाद भी लागू नहीं किया गया। उन्होंने सीधे पूछा कि क्या अथॉरिटी निजी कंस्ट्रक्शन कंपनियों के हित में काम कर रही है।
सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी ने पल्लीकरनई को लेकर क्या आदेश दिए हैं?
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 24 सितंबर 2025 को पल्लीकरनई मार्श के एक किलोमीटर के दायरे में निर्माण पर रोक लगाई थी। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने 11 दिसंबर 2024 को वेटलैंड की सीमाएँ तय कर उन्हें नोटिफाई करने का निर्देश दिया था, जिस पर अभी तक अमल नहीं हुआ है।
पल्लीकरनई मार्श का क्षेत्रफल कितना घट गया है?
अंबुमणि रामदास के अनुसार पल्लीकरनई मार्श कभी अडयार नदी और बकिंघम नहर के बीच 15,000 एकड़ में फैला था। कथित अतिक्रमण के कारण यह अब सिमटकर मात्र 1,725 एकड़ रह गया है, यानी मूल क्षेत्रफल का लगभग 11.5 प्रतिशत।
पीएमके वेटलैंड संरक्षण पर क्या नीतिगत रुख रखती है?
पीएमके का मानना है कि जोन ऑफ इन्फ्लुएंस को वैज्ञानिक और सैटेलाइट-आधारित पद्धति से तय किया जाए तथा इसरो वेटलैंड एटलस 2021 के डेटा का उपयोग कर तमिलनाडु के 26,883 वेटलैंड्स की सीमाएँ नोटिफाई की जाएँ। पार्टी ने निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध की जगह विनियमन का समर्थन किया है।
राष्ट्र प्रेस
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