पल्लीकरनई वेटलैंड का सुरक्षा क्षेत्र 8,397 एकड़ से घटाकर 316 एकड़: अंबुमणि रामदास ने अथॉरिटी को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने 13 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु राज्य वेटलैंड अथॉरिटी पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि वह पल्लीकरनई मार्श की पारिस्थितिक सुरक्षा के बजाय निजी डेवलपर्स के व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता दे रही है। अथॉरिटी ने मद्रास उच्च न्यायालय को सूचित किया था कि 30 सितंबर 2026 को हुई अंतर-विभागीय बैठक के बाद वेटलैंड का 'जोन ऑफ इन्फ्लुएंस' 8,397 एकड़ से घटाकर मात्र 316 एकड़ कर दिया जाएगा।
मुख्य घटनाक्रम
यह विवाद उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया जो निजी निर्माण कंपनियों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के 24 सितंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती देते हुए दायर की थीं, जिसमें दलदली इलाके के एक किलोमीटर के दायरे में सभी निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाई गई थी। अथॉरिटी द्वारा सुरक्षित क्षेत्र में इस भारी कटौती का डेवलपर्स ने खुले तौर पर स्वागत किया, जिसे अंबुमणि ने संदेह की नज़र से देखा।
रामदास ने सवाल उठाया कि अगर अथॉरिटी इतनी तेज़ी से जोन का आकार घटा सकती है, तो सर्वोच्च न्यायालय के 11 दिसंबर 2024 के उस निर्देश को लागू करने में नाकाम क्यों रही जिसमें वेटलैंड की सीमाएँ तय कर उन्हें नोटिफाई करने का आदेश दिया गया था? उन्होंने पूछा, 'क्या अथॉरिटी सरकार और लोगों के लिए काम कर रही है, या निजी निर्माण कंपनियों के लिए?'
नोटिफिकेशन में देरी पर आरोप
अंबुमणि ने याद दिलाया कि अथॉरिटी ने 3 दिसंबर 2025 को उच्च न्यायालय को बताया था कि पल्लीकरनई की सैटेलाइट-आधारित मैपिंग 99 प्रतिशत पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय माँगा था। उन्होंने आरोप लगाया कि उसके बावजूद दस महीने से अधिक समय गुज़रने के बाद भी नोटिफिकेशन लंबित है।
गौरतलब है कि 2016 में अथॉरिटी के गठन और 2017 में वेटलैंड संरक्षण नियम लागू होने के बाद से भी कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में बेहद सीमित प्रगति हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब चेन्नई लगातार बाढ़ के खतरों से जूझ रहा है और पर्यावरणविद् पल्लीकरनई को शहर की प्राकृतिक जल-निकासी प्रणाली का अभिन्न अंग मानते हैं।
इसरो डेटा से सर्वे की माँग
2021 के इसरो वेटलैंड एटलस का संदर्भ देते हुए अंबुमणि ने कहा कि सैटेलाइट डेटा की सहायता से तमिलनाडु के 2.25 हेक्टेयर से बड़े 26,883 वेटलैंड्स की पहचान और सीमा-निर्धारण वैज्ञानिक तरीके से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पीएमके जोन ऑफ इन्फ्लुएंस को साक्ष्य-आधारित पद्धति से तय करने और वेटलैंड की सीमाओं का पूर्ण सर्वे कर उन्हें नोटिफाई करने के पक्ष में है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे क्षेत्रों में निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय उसे विनियमित किया जाना चाहिए — जो NGT के एकमुश्त रोक वाले आदेश से एक अलग नीतिगत रुख है।
पल्लीकरनई की सिकुड़ती ज़मीन
अंबुमणि ने बताया कि पल्लीकरनई मार्श कभी अडयार नदी और बकिंघम नहर के बीच 15,000 एकड़ में फैला था और गुइंडी से सिरुसेरी तक विस्तृत था। कथित तौर पर अतिक्रमण के कारण यह सिमटकर अब मात्र 1,725 एकड़ रह गया है। यह आँकड़ा दशकों के अनियंत्रित शहरीकरण की कहानी बयान करता है।
निर्माण कार्यों पर रोक की माँग
अंबुमणि ने टीवीके सरकार से पिछली डीएमके सरकार के कार्यकाल से चली आ रही देरी समाप्त करने और अथॉरिटी को उसकी जिम्मेदारियाँ निभाने पर बाध्य करने का आग्रह किया। उन्होंने पल्लीकरनई में प्रस्तावित तीन किलोमीटर लंबी, छह फीट ऊँची सुरक्षा दीवार और दो किलोमीटर लंबे वॉकवे के निर्माण को तत्काल रोकने तथा पहले हो चुके निर्माण को ध्वस्त करने की माँग की। सभी वेटलैंड्स के लिए तत्काल नोटिफिकेशन और कानूनी संरक्षण की भी उन्होंने अपील की।