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तमिलनाडु में खनिज परिवहन पर 3 महीने की रोक: पीएमके नेता अंबुमणि ने की स्थायी प्रतिबंध की मांग

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तमिलनाडु में खनिज परिवहन पर 3 महीने की रोक: पीएमके नेता अंबुमणि ने की स्थायी प्रतिबंध की मांग

सारांश

तमिलनाडु सरकार ने काला पत्थर, बजरी और एम-सैंड के अंतर-राज्यीय परिवहन पर 3 महीने की रोक लगाई है। पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि ने इसका स्वागत करते हुए स्थायी प्रतिबंध की मांग की और तिरुनेलवेली, तेनकासी व कोयंबटूर से केरल में खनिज तस्करी के गंभीर आरोप लगाए।

मुख्य बातें

तमिलनाडु सरकार ने काला पत्थर, बजरी, एम-सैंड सहित निर्माण खनिजों के पड़ोसी राज्यों में परिवहन पर 3 महीने की अस्थायी रोक लगाई।
भू-विज्ञान और खनन विभाग के अनुसार, यह कदम राज्य की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए सामग्री की उपलब्धता और संसाधन संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया।
अंबुमणि रामदास ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे स्थायी प्रतिबंध में बदलने की मांग की।
अंबुमणि ने आरोप लगाया कि तिरुनेलवेली, तेनकासी और कोयंबटूर से बड़े पैमाने पर खनिज केरल तस्करी किए जा रहे थे।
उन्होंने 22 जुलाई को ही खनिज निर्यात पर तत्काल पूर्ण रोक की मांग की थी।

पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने तमिलनाडु सरकार के उस निर्णय का स्वागत किया है, जिसके तहत काला पत्थर, बजरी, एम-सैंड और निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली अन्य खनिज सामग्री को पड़ोसी राज्यों में भेजने पर तीन महीने के लिए अस्थायी रोक लगाई गई है। 28 जुलाई को दी गई अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि अवैध खनन पर लगाम लगाने और राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए इस रोक को स्थायी बनाया जाए।

सरकार का फैसला और उसके उद्देश्य

तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में भू-विज्ञान और खनन विभाग के माध्यम से यह अस्थायी प्रतिबंध लागू किया। विभाग के अनुसार, इस कदम का प्राथमिक उद्देश्य राज्य की इंफ्रास्ट्रक्चर और आवास परियोजनाओं के लिए निर्माण सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है। साथ ही खनिज संसाधनों के अत्यधिक दोहन को रोकना भी इस निर्णय के पीछे एक अहम कारण बताया गया है।

अंबुमणि के आरोप और स्थायी प्रतिबंध की मांग

डॉ. अंबुमणि ने कहा कि तिरुनेलवेली, तेनकासी और कोयंबटूर जिलों से बड़ी मात्रा में खनिज सामग्री केरल भेजी जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली डीएमके सरकार के कार्यकाल में अवैध खनन और तस्करी बड़े पैमाने पर फली-फूली, और इसमें कथित तौर पर कुछ प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों का संरक्षण भी शामिल था।

उन्होंने यह भी बताया कि तमिलनाडु और केरल को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क चौड़ीकरण के कारण खनिज परिवहन पर पहले भी रोक लगाई गई थी, लेकिन तस्करों ने वैकल्पिक रास्ते अपनाकर अवैध कारोबार जारी रखा।

पूर्व में की गई मांग का संदर्भ

22 जुलाई को दिए अपने बयान का उल्लेख करते हुए अंबुमणि ने कहा कि उन्होंने तब ही खनिज निर्यात पर तत्काल और पूर्ण प्रतिबंध की मांग की थी — विशेष रूप से तब, जब राज्य खुद निर्माण सामग्री की कमी से जूझ रहा था। उनके अनुसार, टीवीके सरकार के सत्ता में आते ही उन्होंने प्रशासन से अवैध परिवहन रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का आग्रह किया था।

आगे की राह

पीएमके नेता ने स्पष्ट किया कि सरकार का मौजूदा आदेश एक सकारात्मक कदम है, लेकिन अपर्याप्त है। उनके अनुसार, राज्य के खनिज संसाधनों की वास्तविक सुरक्षा और पर्यावरणीय क्षति को रोकने के लिए स्थायी प्रतिबंध के साथ-साथ अवैध खनन और परिवहन के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। यह देखना होगा कि तमिलनाडु सरकार तीन महीने की समयसीमा समाप्त होने के बाद इस नीति की समीक्षा किस दिशा में करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल उठता है कि अस्थायी रोक से अवैध खनन नेटवर्क टूटेगा या तस्कर फिर वैकल्पिक रास्ते खोज लेंगे — जैसा कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर पिछली रोक के दौरान हुआ था। अंबुमणि के राजनीतिक संरक्षण के आरोप गंभीर हैं, लेकिन उन्हें सत्यापित साक्ष्य के साथ सामने आना होगा। असली परीक्षा यह है कि क्या राज्य सरकार तीन महीने में एक पारदर्शी निगरानी तंत्र खड़ा कर पाती है, अन्यथा यह प्रतिबंध भी पिछले प्रयासों की तरह कागज़ों तक सीमित रह सकता है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु में खनिज परिवहन पर रोक क्यों लगाई गई है?
तमिलनाडु सरकार ने राज्य की इंफ्रास्ट्रक्चर और आवास परियोजनाओं के लिए निर्माण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने और खनिज संसाधनों के अत्यधिक दोहन को रोकने के लिए यह 3 महीने का अस्थायी प्रतिबंध लगाया है। भू-विज्ञान और खनन विभाग ने इस कदम की पुष्टि की है।
इस रोक में कौन-कौन सी खनिज सामग्री शामिल है?
इस प्रतिबंध के दायरे में काला पत्थर, बजरी, एम-सैंड और निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली अन्य संबंधित खनिज सामग्री शामिल है। इन्हें पड़ोसी राज्यों में भेजने पर 3 महीने के लिए रोक लगाई गई है।
पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने क्या मांग की है?
पीएमके अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने सरकार के अस्थायी प्रतिबंध का स्वागत करते हुए इसे स्थायी बनाने की मांग की है। उन्होंने अवैध खनन और तस्करी के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की भी अपील की है।
तमिलनाडु से किन राज्यों में खनिज तस्करी के आरोप हैं?
अंबुमणि ने आरोप लगाया है कि तिरुनेलवेली, तेनकासी और कोयंबटूर जिलों से बड़ी मात्रा में खनिज सामग्री केरल भेजी जा रही थी। उनके अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहले लगाई गई रोक के बावजूद तस्करों ने वैकल्पिक रास्ते अपना लिए।
यह प्रतिबंध कब तक लागू रहेगा और आगे क्या होगा?
फिलहाल यह प्रतिबंध 3 महीने के लिए लागू किया गया है। पीएमके ने सरकार से आग्रह किया है कि इस अवधि के बाद इसे स्थायी रूप दिया जाए। तीन महीने की समयसीमा के बाद नीति की समीक्षा होगी।
राष्ट्र प्रेस
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