पीएमके नेता अंबुमणि की माँग: वेट्री पयानम बस स्कीम के लिए अग्रिम फंड दे तमिलनाडु सरकार, ₹25 करोड़ रोज़ाना के घाटे की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने 28 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु सरकार से वेट्री पयानम फ्री बस ट्रैवल स्कीम के लिए हर माह अग्रिम धनराशि जारी करने की माँग की। उन्होंने आगाह किया कि राज्य के परिवहन निगम देरी से मिलने वाले मुआवज़े के कारण डीजल, टायर और स्पेयर पार्ट्स जैसी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने में गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।
क्या है समस्या की जड़
अंबुमणि के बयान के अनुसार, विस्तारित स्कीम के लिए विलंबित मुआवज़े की वजह से परिवहन निगमों को रोज़ाना लगभग ₹25 करोड़ के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी सब्सिडी हटाने के बाद रोज़ाना की परिचालन आय ₹21 करोड़ से घटकर मात्र ₹7 करोड़ से ₹8 करोड़ के बीच रह गई है।
ट्रेड यूनियनों के आँकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि अन्य सब्सिडी सहित कुल दैनिक आय ₹47 करोड़ से घटकर ₹22 करोड़ पर आ गई है — यानी करीब आधी। यह वित्तीय सेंध उस दौर में आई है जब 2 अक्टूबर 2026 से विस्तारित वेट्री पयानम स्कीम शुरू हुई, जो द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार के विदियाल पयानम कार्यक्रम के तहत पहले दी जाने वाली मुफ़्त यात्रा सुविधा का विस्तार है।
स्कीम का दायरा और बसों की संख्या
अंबुमणि के अनुसार, पुरानी योजना में 7,714 शहरी बसें शामिल थीं, जबकि नई विस्तारित स्कीम के तहत अब 84.32 लाख महिलाएँ रोज़ाना 12,695 बसों में नि:शुल्क यात्रा कर सकती हैं। राज्यभर में परिवहन निगम कुल 19,283 बसें संचालित करते हैं।
मुआवज़े के आँकड़ों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पिछली स्कीम के लिए पिछले वर्ष लगभग ₹3,599 करोड़ के मुआवज़े का अनुमान था, जो इस वर्ष बढ़कर ₹3,999 करोड़ हो गया है।
दैनिक खर्च और नकदी संकट
अंबुमणि ने स्पष्ट किया कि परिवहन निगम रोज़ाना डीजल पर ₹16.17 करोड़ और रखरखाव पर ₹2.35 करोड़ — कुल मिलाकर ₹18.52 करोड़ — खर्च करते हैं। इसके मुकाबले किराए से होने वाली दैनिक वसूली महज़ ₹8 करोड़ है, जो इन खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि विस्तारित स्कीम शुरू होने के बाद से निगमों पर तेल कंपनियों का ₹150 करोड़ का बकाया जमा हो गया है। पिछले 25 दिनों में उधार पर डीजल खरीदने से करीब ₹3 करोड़ का अतिरिक्त नुकसान उठाना पड़ा है, क्योंकि नकद भुगतान पर दो प्रतिशत की छूट मिलती है जो निगमों को नहीं मिल पाई।
यात्री सुरक्षा पर ख़तरा
अंबुमणि ने चिंता जताई कि नकदी की किल्लत के चलते ऑपरेटरों को रिट्रेडेड टायर और पहले इस्तेमाल किए गए स्पेयर पार्ट्स उपयोग करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल बसों के रखरखाव को प्रभावित करती है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी संभावित जोखिम पैदा करती है।
गौरतलब है कि यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब तमिलनाडु में सरकारी बस सेवाओं पर करोड़ों यात्री निर्भर हैं और मुफ़्त यात्रा योजना महिला सशक्तीकरण की एक प्रमुख राजनीतिक प्राथमिकता रही है।
पीएमके की माँग और आगे की राह
अंबुमणि ने माँग की कि फ्री ट्रैवल स्कीम को बनाए रखने और बाधारहित बस सेवा सुनिश्चित करने के लिए तमिलनाडु सरकार प्रत्येक माह अग्रिम धनराशि जारी करे। उन्होंने नकदी संकट दूर करने के लिए तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की अपील की। यदि सरकार शीघ्र कदम नहीं उठाती, तो परिवहन सेवाओं के संचालन में व्यवधान और यात्रियों को असुविधा की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।