11 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तमिलनाडु फसल ऋण माफी पर पीएमके का स्वागत, रामदास ने माँगा व्यापक राहत पैकेज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तमिलनाडु फसल ऋण माफी पर पीएमके का स्वागत, रामदास ने माँगा व्यापक राहत पैकेज

सारांश

तमिलनाडु सरकार की फसल ऋण माफी योजना को पीएमके ने सराहा, लेकिन यह स्वागत अधूरा है — रामदास ने साफ कहा कि ₹50,000 की सीमा सभी किसानों की पीड़ा नहीं मिटाती। प्राकृतिक आपदाओं, बढ़ती लागत और उचित मूल्य के अभाव से जूझते किसानों के लिए वे व्यापक राहत पैकेज और रियायती कृषि सामग्री की माँग कर रहे हैं।

मुख्य बातें

रामदास ने 26 मई को तमिलनाडु सरकार की फसल ऋण माफी योजना का स्वागत किया।
सहकारी समितियों के माध्यम से लिए गए ₹50,000 तक के फसल ऋण पूरी तरह माफ किए जाएँगे।
₹50,000 से ₹1 लाख के बीच के ऋण पर ₹5,000 से ₹40,000 तक की आंशिक राहत का प्रावधान।
रामदास ने सरकार से व्यापक राहत पैकेज और रियायती दरों पर बीज, उर्वरक व कृषि सामग्री उपलब्ध कराने की माँग की।
लाभार्थी किसानों को बिना प्रशासनिक बाधा के नए ऋण देने की भी अपील की गई।

पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के संस्थापक एस. रामदास ने मंगलवार, 26 मई को तमिलनाडु सरकार के उस निर्णय का स्वागत किया, जिसमें सहकारी समितियों के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों के फसल ऋण माफ करने की घोषणा की गई है। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से कृषि क्षेत्र में गहराते आर्थिक संकट को देखते हुए और अधिक व्यापक राहत उपाय लागू करने की माँग भी रखी।

ऋण माफी योजना का ब्यौरा

रामदास ने अपने बयान में कहा कि पिछले वर्ष मई से सहकारी समितियों के जरिए लिए गए ₹50,000 तक के फसल ऋण को पूरी तरह माफ करने का फैसला एक सकारात्मक और आवश्यक कदम है। उन्होंने उच्च श्रेणी के ऋणों पर आंशिक राहत देने के प्रावधान का भी स्वागत किया।

जिन किसानों का फसल ऋण ₹50,000 से ₹1 लाख के बीच है, उन्हें ₹5,000 से ₹40,000 तक की आंशिक राहत देने का प्रावधान किया गया है। रामदास ने माना कि यह घोषणा सभी किसानों का पूरा बोझ नहीं उठाती, लेकिन मौजूदा कठिन आर्थिक परिस्थितियों में यह किसानों को सहयोग और भरोसा देने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।

किसानों की बहुआयामी समस्याएँ

पीएमके नेता ने रेखांकित किया कि तमिलनाडु के विभिन्न क्षेत्रों के किसान इस समय एक साथ कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहे हैं — बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाएँ, लगातार बढ़ती उत्पादन लागत और कृषि उपज का उचित बाज़ार मूल्य न मिलना। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में कृषि संकट की चर्चा एक बार फिर तेज हो रही है।

गौरतलब है कि तमिलनाडु में सहकारी समितियों का नेटवर्क ग्रामीण ऋण वितरण की रीढ़ रहा है, और इस योजना का लाभ सीधे उन्हीं किसानों तक पहुँचेगा जो इस तंत्र से जुड़े हैं।

रामदास की अतिरिक्त माँगें

रामदास ने सरकार से माँग की कि सहकारी समितियों के माध्यम से सभी किसानों को बीज, उर्वरक और अन्य कृषि सामग्री रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाए। उनके अनुसार, समय पर इन संसाधनों की उपलब्धता से खेती की लागत में कमी आएगी और उत्पादकता में सुधार होगा।

उन्होंने यह भी माँग की कि जिन किसानों को फसल ऋण माफी का लाभ मिला है, उन्हें बिना किसी प्रशासनिक बाधा के सहकारी समितियों के जरिए नए ऋण भी प्रदान किए जाएँ, ताकि कृषि कार्य निर्बाध रूप से जारी रह सके।

व्यापक राहत पैकेज की अपील

पीएमके संस्थापक ने राज्य सरकार से अपील की कि छोटे और सीमांत किसानों के अलावा अन्य श्रेणियों के किसानों को भी आंशिक फसल ऋण राहत देने पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों की आजीविका की सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारियों में से एक होनी चाहिए।

रामदास के अनुसार, कृषि संकट से दीर्घकालिक निपटने के लिए निरंतर किसान-हितैषी नीतियाँ अपरिहार्य हैं। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और योजना के क्रियान्वयन की गति यह तय करेगी कि यह राहत वास्तविक धरातल पर कितनी प्रभावी साबित होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी संरचना सवाल उठाती है — ₹50,000 की सीमा उन किसानों को बाहर रखती है जिन्होंने थोड़ा अधिक उधार लिया और शायद उन्हें सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। पीएमके का 'स्वागत-सह-माँग' का रुख यह दर्शाता है कि विपक्षी दल योजना को नकार नहीं सकते, लेकिन उसकी सीमाओं को उजागर करना राजनीतिक रूप से फायदेमंद है। असली परीक्षा यह है कि क्या सहकारी समितियाँ — जो पहले से ही संसाधन-संकट में हैं — इस योजना को ज़मीन पर उतार पाएँगी, या यह भी उन घोषणाओं की सूची में जुड़ जाएगी जो कागज़ पर बड़ी दिखती हैं।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु की फसल ऋण माफी योजना में किसे लाभ मिलेगा?
सहकारी समितियों के माध्यम से लिए गए ₹50,000 तक के फसल ऋण वाले छोटे और सीमांत किसानों को पूरी माफी मिलेगी। ₹50,000 से ₹1 लाख के बीच के ऋण पर ₹5,000 से ₹40,000 तक की आंशिक राहत दी जाएगी।
पीएमके ने इस योजना पर क्या रुख अपनाया?
पीएमके संस्थापक एस. रामदास ने योजना का स्वागत किया, लेकिन साथ ही कहा कि यह सभी किसानों का पूरा बोझ नहीं उठाती। उन्होंने सरकार से व्यापक राहत पैकेज और रियायती कृषि सामग्री उपलब्ध कराने की माँग की।
रामदास ने सरकार से और क्या माँगें रखीं?
रामदास ने माँग की कि सहकारी समितियों के जरिए बीज, उर्वरक और कृषि सामग्री रियायती दरों पर दी जाए। साथ ही जिन किसानों को ऋण माफी मिली है, उन्हें बिना प्रशासनिक बाधा के नए ऋण भी प्रदान किए जाएँ।
यह योजना किस अवधि के ऋणों पर लागू होगी?
पिछले वर्ष मई से सहकारी समितियों के माध्यम से लिए गए फसल ऋण इस माफी के दायरे में आएँगे। योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जिन्होंने सहकारी तंत्र के ज़रिए ऋण लिया है।
तमिलनाडु के किसान इस समय किन समस्याओं से जूझ रहे हैं?
रामदास के अनुसार, तमिलनाडु के किसान बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं, बढ़ती उत्पादन लागत और कृषि उपज का उचित बाज़ार मूल्य न मिलने जैसी समस्याओं से एक साथ जूझ रहे हैं। इन्हीं कारणों से वे व्यापक राहत पैकेज को ज़रूरी मानते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 घंटे पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले