तमिलनाडु फसल ऋण माफी पर पीएमके का स्वागत, रामदास ने माँगा व्यापक राहत पैकेज
सारांश
मुख्य बातें
पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के संस्थापक एस. रामदास ने मंगलवार, 26 मई को तमिलनाडु सरकार के उस निर्णय का स्वागत किया, जिसमें सहकारी समितियों के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों के फसल ऋण माफ करने की घोषणा की गई है। साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से कृषि क्षेत्र में गहराते आर्थिक संकट को देखते हुए और अधिक व्यापक राहत उपाय लागू करने की माँग भी रखी।
ऋण माफी योजना का ब्यौरा
रामदास ने अपने बयान में कहा कि पिछले वर्ष मई से सहकारी समितियों के जरिए लिए गए ₹50,000 तक के फसल ऋण को पूरी तरह माफ करने का फैसला एक सकारात्मक और आवश्यक कदम है। उन्होंने उच्च श्रेणी के ऋणों पर आंशिक राहत देने के प्रावधान का भी स्वागत किया।
जिन किसानों का फसल ऋण ₹50,000 से ₹1 लाख के बीच है, उन्हें ₹5,000 से ₹40,000 तक की आंशिक राहत देने का प्रावधान किया गया है। रामदास ने माना कि यह घोषणा सभी किसानों का पूरा बोझ नहीं उठाती, लेकिन मौजूदा कठिन आर्थिक परिस्थितियों में यह किसानों को सहयोग और भरोसा देने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।
किसानों की बहुआयामी समस्याएँ
पीएमके नेता ने रेखांकित किया कि तमिलनाडु के विभिन्न क्षेत्रों के किसान इस समय एक साथ कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहे हैं — बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाएँ, लगातार बढ़ती उत्पादन लागत और कृषि उपज का उचित बाज़ार मूल्य न मिलना। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में कृषि संकट की चर्चा एक बार फिर तेज हो रही है।
गौरतलब है कि तमिलनाडु में सहकारी समितियों का नेटवर्क ग्रामीण ऋण वितरण की रीढ़ रहा है, और इस योजना का लाभ सीधे उन्हीं किसानों तक पहुँचेगा जो इस तंत्र से जुड़े हैं।
रामदास की अतिरिक्त माँगें
रामदास ने सरकार से माँग की कि सहकारी समितियों के माध्यम से सभी किसानों को बीज, उर्वरक और अन्य कृषि सामग्री रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जाए। उनके अनुसार, समय पर इन संसाधनों की उपलब्धता से खेती की लागत में कमी आएगी और उत्पादकता में सुधार होगा।
उन्होंने यह भी माँग की कि जिन किसानों को फसल ऋण माफी का लाभ मिला है, उन्हें बिना किसी प्रशासनिक बाधा के सहकारी समितियों के जरिए नए ऋण भी प्रदान किए जाएँ, ताकि कृषि कार्य निर्बाध रूप से जारी रह सके।
व्यापक राहत पैकेज की अपील
पीएमके संस्थापक ने राज्य सरकार से अपील की कि छोटे और सीमांत किसानों के अलावा अन्य श्रेणियों के किसानों को भी आंशिक फसल ऋण राहत देने पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों की आजीविका की सुरक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारियों में से एक होनी चाहिए।
रामदास के अनुसार, कृषि संकट से दीर्घकालिक निपटने के लिए निरंतर किसान-हितैषी नीतियाँ अपरिहार्य हैं। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और योजना के क्रियान्वयन की गति यह तय करेगी कि यह राहत वास्तविक धरातल पर कितनी प्रभावी साबित होती है।