आंध्र प्रदेश में 70 सरकारी डॉक्टर बर्खास्त, कुल 493 स्वास्थ्यकर्मी ड्यूटी से नदारद
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश सरकार ने 2 अक्टूबर 2026 को बिना अनुमति एक वर्ष से अधिक समय तक ड्यूटी से गायब रहने वाले 70 सरकारी डॉक्टरों को सेवा से बर्खास्त कर दिया। डायरेक्टर ऑफ सेकेंडरी हेल्थ (डीएसएच) द्वारा की गई इस कार्रवाई से पहले सभी निर्धारित प्रक्रियाएं — कारण बताओ नोटिस सहित — पूरी की गई थीं। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव के सख्त निर्देशों के बाद विभागों ने यह अभियान तेज़ किया है।
बर्खास्तगी की प्रक्रिया और कानूनी आधार
बर्खास्त किए गए सभी 70 डॉक्टर सिविल असिस्टेंट सर्जन पद पर कार्यरत थे। डीएसएच निदेशक चक्रधर बाबू के अनुसार, इन डॉक्टरों के विरुद्ध आंध्र प्रदेश सिविल सेवा (सीसीए) नियम, 1991 के नियम 20 के तहत कार्रवाई की गई। इनमें स्त्री रोग, ईएनटी और जनरल मेडिसिन समेत विभिन्न विशेषज्ञताओं के चिकित्सक शामिल हैं।
नोटिस का जवाब देकर ड्यूटी पर लौटने वाले डॉक्टरों को वेतन वृद्धि में कटौती जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ वापस काम पर आने का अवसर दिया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत डीएसएच के 78 डॉक्टर पहले ही अपनी ड्यूटी पर वापस लौट चुके हैं।
डीएमई के तहत अनुपस्थित 39 डॉक्टरों को अंतिम मौका
सरकार ने डायरेक्टरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन (डीएमई) के तहत कार्यरत 39 डॉक्टरों को एक अंतिम अवसर देने का निर्णय लिया है। ये डॉक्टर बिना अनुमति एक वर्ष से अधिक, लेकिन दो वर्ष से कम समय से अनुपस्थित हैं और कारण बताओ नोटिस का जवाब भी नहीं दिया है।
डीएमई निदेशक डॉ. विष्णुवर्धन के अनुसार, यदि ये डॉक्टर इस अंतिम मौके के बाद भी जवाब नहीं देते, तो उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया जाएगा। इन 39 डॉक्टरों में 5 प्रोफेसर, 4 एसोसिएट प्रोफेसर और 30 असिस्टेंट प्रोफेसर शामिल हैं।
गौरतलब है कि इसी वर्ष मई 2026 में डीएमई के तहत कार्यरत 51 डॉक्टरों को स्थायी रूप से सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। इस प्रकार यह आंध्र प्रदेश में अनुपस्थित चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई का दूसरा बड़ा चरण है।
व्यापक तस्वीर: 493 स्वास्थ्यकर्मी अनुपस्थित
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के सभी विभागाध्यक्ष कार्यालयों के ताज़ा आकलन में कुल 493 डॉक्टर और अन्य कर्मचारी ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए हैं। इनमें सबसे अधिक मामले डीएसएच और डीएमई के अंतर्गत सामने आए हैं।
इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत संविदा कर्मचारी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, आयुष, औषधि नियंत्रण प्रशासन विभाग और डॉ. एनटीआर यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज से जुड़े कर्मचारी भी अनुपस्थित पाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन 493 मामलों में संबंधित सेवा नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
अनुपस्थिति के कारण और सरकार की नीति
अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय से अनुपस्थित रहने वाले डॉक्टरों के मामलों में निजी प्रैक्टिस, पोस्टिंग से असंतुष्टि, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी तथा पारिवारिक या अन्य व्यक्तिगत कारण सामने आए हैं। कुछ डॉक्टर ऐसे भी हैं जिन्होंने सरकारी सेवा में शामिल होने के तुरंत बाद ड्यूटी पर आना बंद कर दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण और दूरदराज़ के क्षेत्रों में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर पहले से ही दबाव बना हुआ है। डीएसएच और डीएमई के तहत 154 अन्य डॉक्टर भी अभी भी बिना अनुमति अनुपस्थित हैं और उनके विरुद्ध कार्रवाई के विभिन्न चरण चल रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश और आगे की राह
स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि बर्खास्तगी की प्रक्रिया तय मानकों के आधार पर अधिकतम तीन महीने के भीतर पूरी की जाए और इसमें बेवजह देरी न हो। उन्होंने खाली होने वाले पदों को 'जीरो वैकेंसी पॉलिसी' के तहत शीघ्र भरने के निर्देश भी दिए हैं।
इस नीति के क्रियान्वयन से आने वाले महीनों में आंध्र प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पद-रिक्तता और नई भर्तियों की प्रक्रिया दोनों एक साथ तेज़ होने की संभावना है।