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आंध्र प्रदेश: 9,000 जूनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाएं ठप कीं, स्टाइपेंड में 15% बढ़ोतरी की मांग

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आंध्र प्रदेश: 9,000 जूनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाएं ठप कीं, स्टाइपेंड में 15% बढ़ोतरी की मांग

सारांश

आंध्र प्रदेश में 9,000 जूनियर डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाएं ठप कर दीं। APJUDA 15% स्टाइपेंड बढ़ोतरी की माँग पर अड़ी है, जबकि सरकार केवल 3-5% देने को तैयार है। 19 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाएं बाधित, और गतिरोध जारी है।

मुख्य बातें

आंध्र प्रदेश के 9,000 जूनियर डॉक्टरों ने 18 अगस्त को इमरजेंसी सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार किया।
राज्य के सभी 19 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ICU , कैजुअल्टी वार्ड और लेबर रूम प्रभावित।
APJUDA ने 15% स्टाइपेंड बढ़ोतरी माँगी; सरकार ने PG डॉक्टरों के लिए 3% और इंटर्न के लिए 5% का प्रस्ताव दिया।
स्टाइपेंड बढ़ोतरी 1 जनवरी से लंबित; 2009 के सरकारी आदेश में हर दो साल में समीक्षा का प्रावधान।
सरकार 9,501 जूनियर डॉक्टरों पर सालाना ₹586.08 करोड़ खर्च करती है; 15% बढ़ोतरी से ₹87.91 करोड़ अतिरिक्त भार पड़ेगा।
चरणबद्ध हड़ताल 11 अगस्त को शुरू हुई थी; लिखित आश्वासन न मिलने पर APJUDA ने विरोध और तेज किया।

आंध्र प्रदेश के करीब 9,000 जूनियर डॉक्टरों ने 18 अगस्त 2025 को इमरजेंसी सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार कर दिया, जिससे राज्य के सभी 19 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से बाधित हो गईं। आंध्र प्रदेश जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (APJUDA) ने स्टाइपेंड में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की मांग को लेकर यह कदम उठाया, जिसे सरकार ने अब तक लिखित आश्वासन देने से इनकार किया है।

हड़ताल का दायरा और असर

हड़ताल में रेजिडेंट डॉक्टर, मेडिकल इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट, सुपर-स्पेशियलिटी पोस्ट-ग्रेजुएट, सीनियर रेजिडेंट और डिस्ट्रिक्ट रेजिडेंसी प्रोग्राम (DRP) के तहत तैनात डॉक्टर शामिल हैं। इनके कार्य से विरत रहने के कारण आईसीयू, कैजुअल्टी वार्ड और लेबर रूम सहित अन्य अत्यावश्यक इकाइयों पर सीधा असर पड़ा।

सभी सरकारी टीचिंग अस्पतालों, सुपर-स्पेशियलिटी यूनिट्स और परिधीय मेडिकल कॉलेजों में गैर-आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बंद रहीं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के सरकारी अस्पतालों पर पहले से ही मरीजों का भारी दबाव बना रहता है।

हड़ताल का क्रमिक विस्तार

APJUDA का यह विरोध एकाएक नहीं उभरा। चरणबद्ध हड़ताल की शुरुआत 11 अगस्त को गैर-आपातकालीन सेवाओं को निश्चित समय के लिए बंद करने से हुई थी। सरकार की ओर से कोई लिखित आश्वासन न मिलने पर APJUDA ने अपना विरोध और तीव्र किया और अंततः इमरजेंसी सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार घोषित कर दिया।

APJUDA नेताओं के अनुसार, स्टाइपेंड बढ़ोतरी 1 जनवरी से लंबित है। स्वास्थ्य, चिकित्सा और परिवार कल्याण विभाग द्वारा 2009 में जारी आदेश के तहत जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में हर दो साल में लगभग 15 प्रतिशत की समीक्षा का प्रावधान है। APJUDA नेताओं ने कहा कि बार-बार अपील के बावजूद अधिकारियों ने कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई, जिससे उन्हें हड़ताल पर जाने के लिए विवश होना पड़ा।

मांगें और सरकार का प्रस्ताव

APJUDA ने स्टाइपेंड में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की माँग की है, जबकि सरकार ने पोस्ट-ग्रेजुएट जूनियर डॉक्टरों के लिए 3 प्रतिशत और हाउस सर्जनों व इंटर्न के लिए 5 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है — जो डॉक्टरों को स्वीकार्य नहीं है।

इसके अलावा APJUDA क्लिनिकल फैकल्टी पदों पर MSc और PhD डिग्री धारकों की भर्ती में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों को लागू करने की माँग कर रहा है। साथ ही, डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति की आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने के सरकारी प्रस्ताव का भी विरोध कर रहा है।

सरकार की प्रतिक्रिया

राज्य सरकार ने कहा है कि उसने हड़ताल के दौरान मरीजों की सेवा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए हैं। स्वास्थ्य विभाग जिला कलेक्टरों, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपलों और अस्पताल अधीक्षकों के साथ मिलकर स्थिति की निगरानी कर रहा है। आवश्यकतानुसार अतिरिक्त डॉक्टरों को स्टैंडबाय पर रखा गया है और आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, NICU, PICU, डायलिसिस यूनिट और ट्रॉमा सेवाओं के निर्बाध संचालन के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, सरकार वर्तमान में 9,501 जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड पर सालाना लगभग ₹586.08 करोड़ खर्च करती है। यदि 15 प्रतिशत बढ़ोतरी की माँग मान ली जाती है, तो सरकारी खजाने पर सालाना करीब ₹87.91 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा। सरकार ने वित्त विभाग की आर्थिक बाधाओं का हवाला देते हुए जूनियर डॉक्टरों से प्रस्तावित वृद्धि स्वीकार करने का आग्रह किया है।

आगे क्या होगा

फिलहाल दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना हुआ है। APJUDA ने सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने तक हड़ताल जारी रखने का संकेत दिया है। गौरतलब है कि देश के कई राज्यों में जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड और सेवा शर्तों को लेकर इस तरह के विवाद पहले भी उठते रहे हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे में मानव संसाधन नीति की गहरी खामियों को उजागर करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ सरकारें जूनियर डॉक्टरों को सस्ती श्रमशक्ति की तरह इस्तेमाल करती हैं। 2009 का वह आदेश जो हर दो साल में 15% समीक्षा का वादा करता है, वर्षों से कागज़ पर ही रहा — और अब जब डॉक्टर उसे लागू करवाने की कोशिश कर रहे हैं, तो वित्त विभाग की 'आर्थिक बाधाओं' की दीवार खड़ी हो जाती है। ₹87.91 करोड़ का अतिरिक्त सालाना बोझ उस सरकार के लिए असहनीय नहीं होना चाहिए जो ₹586 करोड़ पहले से खर्च कर रही है — असली सवाल प्राथमिकता का है, संसाधनों का नहीं।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल क्यों हो रही है?
APJUDA स्टाइपेंड में 15% बढ़ोतरी की माँग कर रहा है, जो 2009 के सरकारी आदेश के तहत 1 जनवरी से लंबित है। सरकार ने केवल PG डॉक्टरों के लिए 3% और इंटर्न के लिए 5% बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है, जिसे डॉक्टरों ने अस्वीकार कर दिया।
हड़ताल से कौन-कौन सी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं?
राज्य के सभी 19 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ICU, कैजुअल्टी वार्ड, लेबर रूम और गैर-आपातकालीन सेवाएं बाधित हुई हैं। सुपर-स्पेशियलिटी यूनिट्स और परिधीय मेडिकल कॉलेज भी इससे अछूते नहीं रहे।
सरकार ने हड़ताल से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
स्वास्थ्य विभाग ने जिला कलेक्टरों, मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपलों और अस्पताल अधीक्षकों के साथ मिलकर स्थिति की निगरानी शुरू की है। अतिरिक्त डॉक्टरों को स्टैंडबाय पर रखा गया है और दवाइयों, ऑक्सीजन व रक्त की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
15% स्टाइपेंड बढ़ोतरी से सरकार पर कितना अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा?
सरकार वर्तमान में 9,501 जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड पर सालाना लगभग ₹586.08 करोड़ खर्च करती है। 15% बढ़ोतरी स्वीकार करने पर सालाना लगभग ₹87.91 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
APJUDA की स्टाइपेंड के अलावा और क्या माँगें हैं?
APJUDA क्लिनिकल फैकल्टी पदों पर MSc और PhD डिग्री धारकों की भर्ती में NMC के नियम लागू करने की माँग कर रहा है। साथ ही, डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने के सरकारी प्रस्ताव का भी विरोध कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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