संसद में केंद्र के आंकड़े: आंध्र में सिर्फ 2 प्रोजेक्ट पूरे, 22,167 नौकरियाँ केवल अनुमानित — वाईएसआरसीपी का टीडीपी पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने 21 जुलाई को आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के निवेश और रोजगार के दावों की असलियत केंद्र सरकार के उन्हीं आधिकारिक आंकड़ों से उजागर हो गई है, जो हाल ही में लोकसभा में पेश किए गए। पार्टी का कहना है कि राज्य सरकार प्रस्तावों को उपलब्धि, निर्माणाधीन परियोजनाओं को चालू उद्योग और भविष्य के अनुमानित रोजगार को वास्तविक नौकरियों के रूप में प्रचारित कर रही है।
संसद में क्या सामने आया
वाईएसआरसीपी सांसद पी.वी. मिथुन रेड्डी के एक सवाल के जवाब में वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा को बताया कि पिछले दो वर्षों में डीपीआईआईटी और इन्वेस्ट इंडिया की निगरानी में आंध्र प्रदेश में केवल 10 निवेश परियोजनाएँ जमीन पर उतरी हैं। इनमें से सिर्फ दो परियोजनाओं का निर्माण पूरा हुआ है, जबकि शेष अभी भी निर्माणाधीन हैं।
केंद्र के अनुसार, इन परियोजनाओं से जुड़ा कुल निवेश अनुमानित ₹6,962 करोड़ है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि इनसे संबद्ध 22,167 नौकरियाँ केवल अनुमानित रोजगार अवसर हैं — ये परियोजनाओं के पूरी तरह चालू होने के बाद सृजित होने की उम्मीद है, न कि अभी तक पैदा हुई नौकरियाँ।
गौरतलब है कि केंद्र के इस जवाब में अब तक हुए वास्तविक निवेश, वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने वाले उद्योगों की संख्या या वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या का कोई उल्लेख नहीं किया गया।
एमएसएमई प्रशिक्षण के आंकड़े
एक अन्य संसदीय जवाब में केंद्र ने बताया कि 2024-25 के दौरान 201 उद्यमिता विकास कार्यक्रमों में 10,093 लोग शामिल हुए, जबकि 2025-26 में 625 कार्यक्रमों में 32,428 प्रतिभागी थे। हालाँकि, इस जवाब में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इनमें से कितने प्रशिक्षुओं ने उद्यम स्थापित किए, वित्तीय सहायता प्राप्त की या रोजगार पैदा किया।
वाईएसआरसीपी का तर्क है कि कौशल प्रशिक्षण की भागीदारी को औद्योगिक विकास के समतुल्य नहीं माना जा सकता।
वाईएसआरसीपी का आरोप
विपक्षी दल ने कहा कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उनकी गठबंधन सरकार ने आंध्र प्रदेश में लाखों करोड़ रुपए के निवेश और लाखों नौकरियों का जो प्रचार किया, उसकी तुलना में केंद्र के आधिकारिक आंकड़े एक बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करते हैं। पार्टी के अनुसार, राज्य सरकार निवेश प्रस्तावों को वास्तविक निवेश, निर्माणाधीन परियोजनाओं को चालू उद्योग और भविष्य की अनुमानित नौकरियों को पहले ही दी जा चुकी नौकरियों के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश में औद्योगिक विकास की रफ्तार और राज्य सरकार के दावों की विश्वसनीयता पर राजनीतिक बहस तेज है। आलोचकों का कहना है कि बिना स्वतंत्र सत्यापन तंत्र के, निवेश के आँकड़े भ्रामक हो सकते हैं।
आगे क्या
संसद में सामने आए इन आंकड़ों के बाद टीडीपी गठबंधन पर विपक्ष का दबाव बढ़ने की संभावना है। वाईएसआरसीपी ने माँग की है कि राज्य सरकार वास्तविक निवेश, चालू उद्योगों और सृजित रोजगार के सत्यापित आंकड़े सार्वजनिक करे। अब यह देखना होगा कि चंद्रबाबू नायडू सरकार इन सवालों का जवाब किस तरह देती है।