12 अक्टूबर 2026
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ब्रजेश पाठक के आवास पर एएनएम कर्मचारियों का घेराव, ₹10,000 वेतन पर 22 दिन से जारी है आंदोलन

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ब्रजेश पाठक के आवास पर एएनएम कर्मचारियों का घेराव, ₹10,000 वेतन पर 22 दिन से जारी है आंदोलन

सारांश

उत्तर प्रदेश में एएनएम महिला कर्मचारियों का 22 दिन से जारी आंदोलन सोमवार को तब और तेज़ हो गया जब 75 जिलों से आई कर्मचारियों ने स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आवास का घेराव किया। ₹10,000 प्रति माह के मानदेय पर वर्षों से काम कर रही इन महिलाओं की माँग है — समान वेतन और स्थायी नियुक्ति।

मुख्य बातें

एएनएम महिला कर्मचारियों ने 12 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आवास का घेराव किया।
कर्मचारियों को मात्र ₹10,000 प्रति माह मानदेय मिलता है; माँग है कि स्थायी कर्मचारियों के बराबर वेतन दिया जाए।
22 दिनों से जारी धरने के बावजूद अब तक कोई मंत्री या सरकारी प्रतिनिधि नहीं पहुँचा।
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों से महिला कर्मचारी लखनऊ में एकत्रित हुईं।
कुछ महिलाएं 15 से 20 वर्षों से संविदा पर कार्यरत हैं और अब भी नियमितीकरण का इंतज़ार कर रही हैं।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के लखनऊ स्थित आवास के बाहर सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को एएनएम महिला कर्मचारियों ने जोरदार घेराव किया। कर्मचारियों की मुख्य माँगें हैं — समान काम के लिए समान वेतन और स्थायी नियुक्ति। उनका कहना है कि वे वर्षों से मात्र ₹10,000 प्रति माह के मानदेय पर स्वास्थ्य विभाग में संविदा आधार पर कार्यरत हैं।

मुख्य घटनाक्रम

एएनएम कर्मचारियों ने बताया कि 22 दिनों से इको गार्डन में धरना देने के बाद भी कोई सरकारी प्रतिनिधि उनकी बात सुनने नहीं आया। इसी के चलते मजबूर होकर उन्होंने उपमुख्यमंत्री के आवास तक मार्च किया। प्रदर्शनकारी महिलाएं उत्तर प्रदेश के 75 जिलों से लखनऊ पहुँची थीं।

कर्मचारियों की आवाज़

एएनएम कर्मचारी आरती वर्मा ने कहा, 'इको गार्डन में जब हमारी आवाज़ नहीं सुनी गई तो हम लोग अपनी माँगें लेकर उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आवास पर आए हैं। हम लोगों की दो ही माँगें हैं — समान काम, समान वेतन और स्थाई नौकरी। हम लोगों की ओर से धरना देते आज 22 दिन हो गए हैं, कोई सुनवाई नहीं हो रही है।'

आरती वर्मा ने आगे जोड़ा, 'हम लोगों को ₹10,000 प्रति माह वेतन मिलता है। महंगाई इतनी बढ़ गई है कि 10 हजार में कुछ होने वाला नहीं है। जितना वेतन स्थायी कर्मचारियों का है, उतना ही हमारा कर दें — हम उनके बराबर ही काम करते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि कुछ महिलाएं 15 से 20 वर्षों से सेवा देने के बावजूद अब भी संविदा पर ही हैं।

एएनएम कर्मचारी मंजिला गौतम ने स्वास्थ्य मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, 'एएनएम को स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ की हड्डी बताया जाता है और उन्हीं को कह रहे हैं कि हम जानते नहीं। अगर स्वास्थ्य मंत्री होकर नहीं जान रहे हैं तो हम लोगों को कौन जानेगा? बीते 22 दिनों से प्रदर्शन किया जा रहा है, कोई मंत्री नहीं पहुँचा।' वहीं एएनएम कर्मचारी रंजना राय ने संक्षेप में कहा, 'समान काम का समान वेतन चाहिए और हमें स्थायी किया जाए।'

संविदा प्रथा और व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि भारत के स्वास्थ्य ढाँचे में एएनएम (ऑग्जिलियरी नर्स मिडवाइफ) की भूमिका ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की नींव मानी जाती है। टीकाकरण, प्रसव पूर्व देखभाल और महामारी निगरानी जैसे कार्यों में इनकी केंद्रीय भागीदारी रहती है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में संविदा स्वास्थ्यकर्मियों के नियमितीकरण की माँग विभिन्न राज्यों में उठ रही है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में, जहाँ स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या लाखों में है, यह मुद्दा विशेष रूप से संवेदनशील है।

सरकार की प्रतिक्रिया

रिपोर्टों के अनुसार, 22 दिनों के लंबे प्रदर्शन के दौरान अब तक कोई वरिष्ठ मंत्री या सरकारी प्रतिनिधि कर्मचारियों से मिलने नहीं पहुँचा है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से किसी आधिकारिक बयान की जानकारी इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक उपलब्ध नहीं थी।

क्या होगा आगे

कर्मचारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी माँगें नहीं सुनी गईं तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा। 75 जिलों से एकत्रित हुई इन महिला स्वास्थ्यकर्मियों के संगठित विरोध ने राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। अब यह देखना होगा कि उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक इस माँग पर क्या रुख अपनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 प्रति माह पर स्वास्थ्य विभाग की 'रीढ़' को टिकाए रखना — यह उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। 15-20 वर्षों की सेवा के बाद भी संविदा की बेड़ियाँ यह दर्शाती हैं कि नीतिगत इरादे और ज़मीनी अमल के बीच की खाई कितनी गहरी है। गौरतलब है कि यह समस्या सिर्फ यूपी की नहीं — देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा हिस्सा ऐसे संविदा कर्मचारियों पर टिका है जिन्हें स्थायित्व की गारंटी नहीं। 22 दिनों की चुप्पी यह संकेत देती है कि सरकार इस मुद्दे को राजनीतिक प्राथमिकता नहीं मान रही — जो कि एक चूक है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एएनएम कर्मचारियों की मुख्य माँगें क्या हैं?
एएनएम कर्मचारियों की दो मुख्य माँगें हैं — समान काम के लिए समान वेतन और संविदा से स्थायी नियुक्ति। उनका कहना है कि वे स्थायी कर्मचारियों जितना काम करती हैं, लेकिन उन्हें मात्र ₹10,000 प्रति माह मिलता है।
एएनएम आंदोलन कितने दिनों से चल रहा है?
यह आंदोलन 12 अक्टूबर 2026 तक 22 दिनों से जारी है। कर्मचारियों ने पहले लखनऊ के इको गार्डन में धरना दिया और सुनवाई न होने पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आवास का घेराव किया।
इस प्रदर्शन में कितने जिलों की कर्मचारी शामिल हुईं?
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों से एएनएम महिला कर्मचारी लखनऊ पहुँचीं। इनमें से कुछ 15 से 20 वर्षों से संविदा पर कार्यरत हैं।
ब्रजेश पाठक के आवास पर घेराव क्यों किया गया?
कर्मचारियों के अनुसार, 22 दिनों के धरने के बाद भी कोई मंत्री या सरकारी अधिकारी उनसे मिलने नहीं आया। इसी कारण मजबूर होकर उन्होंने उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के आवास तक मार्च किया, ताकि उनकी आवाज़ सुनी जा सके।
एएनएम कर्मचारियों को वर्तमान में कितना वेतन मिलता है?
एएनएम कर्मचारियों को वर्तमान में ₹10,000 प्रति माह का मानदेय मिलता है। कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच यह राशि परिवार का खर्च चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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